
भागलपुर। बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लागू करने और नशे के सौदागरों पर नकेल कसने की जिम्मेदारी जिस विभाग के कंधों पर है, उसी विभाग की एक गाड़ी ने शुक्रवार की आधी रात को प्रशासनिक शुचिता और कानून की धज्जियां उड़ा दीं। भागलपुर के नयनगर इलाके में स्थित मदनीनगर चौक के पास एक ऐसी घटना घटी, जिसने मद्य निषेध विभाग की कार्यशैली और अनुशासन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 की देर रात करीब 12:30 बजे, जब पूरा शहर सो रहा था और शादी समारोहों की रौनक अपने शबाब पर थी, तब ‘अधीक्षक मद्य निषेध ग्रुप सेंटर-3, भागलपुर’ लिखी एक सफेद चारपहिया गाड़ी ने सड़क पर तांडव मचाया। आरोप है कि गाड़ी का चालक शराब के नशे में धुत था और उसने न केवल राहगीरों के साथ बदतमीजी की, बल्कि शादी में आई महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर इंसानियत और खाकी (प्रशासनिक वाहन) की गरिमा को तार-तार कर दिया। इस घटना के बाद स्थानीय युवकों ने दिलेरी दिखाते हुए गाड़ी का पीछा किया और गोलंबर के पास उसे घेर लिया, जिसके बाद घंटों तक हंगामा होता रहा।
आधी रात का शोर: मैरेज हॉल के बाहर जब बेकाबू हुआ ‘सरकारी’ चालक
मदनीनगर चौक के पास स्थित एक मैरेज हॉल में शुक्रवार की रात खुशियों का माहौल था। शादी की रस्में चल रही थीं और मेहमानों का आना-जाना लगा हुआ था। इसी बीच, मद्य निषेध विभाग की एक बोलेरोनुमा गाड़ी वहां पहुँची। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गाड़ी की रफ्तार काफी अधिक थी और उस पर लगी लाल-नीली बत्ती (बीकन) लगातार जल रही थी, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि कोई बड़ा अधिकारी किसी गुप्त छापेमारी पर निकला है। लेकिन जैसे ही गाड़ी मैरेज हॉल के पास रुकी, मंजर कुछ और ही निकला।
गाड़ी के चालक ने नशे की हालत में वहां खड़ी महिलाओं को देखकर अभद्र भाषा का प्रयोग करना शुरू कर दिया। शादी समारोह में शामिल होने आई महिलाओं पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों ने वहां मौजूद लोगों के खून को खौला दिया। चालक का व्यवहार किसी पेशेवर सरकारी कर्मचारी जैसा नहीं, बल्कि एक बेलगाम अपराधी जैसा था। जब कुछ स्थानीय लोगों ने उसे टोकने की कोशिश की, तो वह उलटे उन्हें ही हड़काने लगा। लोगों का कहना है कि चालक के मुंह से शराब की तेज दुर्गंध आ रही थी और वह ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था, फिर भी वह स्टयरिंग थामे हुए था।
सड़क पर पीछा और गोलंबर पर घेराबंदी: स्थानीय युवकों का आक्रोश
चालक की बदतमीजी जब हद से पार हो गई, तो वहां मौजूद युवकों ने उसे सबक सिखाने का मन बना लिया। युवकों को विरोध करते देख चालक ने गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी और वहां से भागने की कोशिश की। इसके बाद मदनीनगर चौक से लेकर गोलंबर तक सड़क पर एक फिल्मी दृश्य जैसा नजारा देखने को मिला। दर्जनों युवक अपनी मोटरसाइकिलों और पैदल ही उस गाड़ी के पीछे दौड़ पड़े। करीब एक किलोमीटर तक पीछा करने के बाद युवकों ने गोलंबर के पास उस सरकारी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया।
गाड़ी रुकते ही चालक ने खुद को भीतर से लॉक कर लिया। वह बाहर निकलने से बचता रहा, जिससे लोगों का शक और गहरा गया। गोलंबर पर भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने गाड़ी के शीशे थपथपाकर उसे बाहर आने को कहा। इस दौरान चालक लगातार खुद को ‘एक्साइज अधिकारी’ (Excise Officer) बताकर लोगों को धमकाता रहा। उसने धौंस जमाते हुए कहा कि वह ड्यूटी पर है और उसे रोकने वालों को वह जेल भिजवा देगा। हालांकि, गाड़ी में उसके अलावा कोई दूसरा अधिकारी मौजूद नहीं था, जो इस बात की पुष्टि करता कि वह किसी आधिकारिक कार्य से बाहर है।
सत्ता का दुरुपयोग: बिना अधिकारी के लाल-नीली बत्ती का खेल
इस पूरी घटना ने सरकारी वाहनों के उपयोग के नियमों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। नियमानुसार, लाल या नीली बत्ती का उपयोग केवल तब किया जा सकता है जब संबंधित श्रेणी का अधिकारी वाहन में मौजूद हो या वाहन किसी आपातकालीन सेवा में लगा हो। मदनीनगर की घटना में चालक अकेले ही इस बत्ती का उपयोग कर रहा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह शक्ति का सरासर दुरुपयोग है।
अंधेरी रात में लाल-नीली बत्ती जलाकर वह लोगों में खौफ पैदा कर रहा था ताकि उसे कोई रोके नहीं। जब लोगों ने उससे जवाब-तलब किया कि “साहब कहाँ हैं?” तो उसके पास कोई जवाब नहीं था। वह बार-बार अपनी पहचान छिपाने की कोशिश करता रहा। अब तक चालक के नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन गाड़ी पर लिखे ‘ग्रुप सेंटर-3’ के टैग ने यह साफ कर दिया है कि यह वाहन सीधे तौर पर मद्य निषेध विभाग के उच्चाधिकारियों से जुड़ा है। सवाल यह उठता है कि क्या विभाग के ड्राइवरों को यह छूट मिली हुई है कि वे आधी रात को सरकारी तेल और सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल अपनी निजी ‘अय्याशियों’ के लिए करें?
नशे के विरुद्ध अभियान की विडंबना: ‘रक्षक’ ही निकला ‘भक्षक’
बिहार में शराबबंदी कानून को सफल बनाने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। मद्य निषेध विभाग के कर्मचारी दिन-रात छापेमारी कर रहे हैं ताकि राज्य को नशामुक्त बनाया जा सके। ऐसे में भागलपुर की यह घटना विभाग के मुंह पर एक करारा तमाचा है। जिस विभाग की गाड़ी को देखकर शराब तस्करों में खौफ होना चाहिए, उस गाड़ी का चालक खुद शराब पीकर महिलाओं का अपमान कर रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब सरकारी ड्राइवरों की ऐसी मनमानी सामने आई है। अक्सर देखा जाता है कि ड्यूटी खत्म होने के बाद या अधिकारियों को घर छोड़ने के बाद ड्राइवर गाड़ियों का इस्तेमाल रौब झाड़ने के लिए करते हैं। मदनीनगर चौक की घटना ने यह साबित कर दिया है कि विभाग के भीतर अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं बची है। अगर एक ड्राइवर शराब पीकर गाड़ी चला रहा है, तो इसका मतलब है कि वह कानून के रक्षकों की नाक के नीचे से शराब हासिल कर रहा है। यह शराबबंदी की विफलता का सबसे जीवंत और शर्मनाक उदाहरण है।
प्रशासनिक चुप्पी और जनता की मांग
घटना के घंटों बीत जाने के बाद भी मद्य निषेध विभाग के किसी बड़े अधिकारी का इस मामले पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। पुलिस प्रशासन ने भी इस मामले में अब तक किसी एफआईआर (FIR) की पुष्टि नहीं की है। हालांकि, गोलंबर पर हुए हंगामे की सूचना पुलिस को दी गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि ‘अपने विभाग’ का मामला होने के कारण पुलिस भी ढिलाई बरत रही है।
नयनगर और मदनीनगर के नागरिकों की मांग है कि:
- दोषी चालक की पहचान कर उसे तुरंत बर्खास्त किया जाए।
- यह जांच की जाए कि चालक के पास शराब कहाँ से आई।
- संबंधित अधीक्षक, जिनके नाम पर यह गाड़ी आवंटित है, उनसे भी स्पष्टीकरण मांगा जाए कि आधी रात को ड्राइवर गाड़ी लेकर बाहर कैसे था।
- महिलाओं के साथ की गई बदतमीजी के लिए चालक पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।
सुरक्षा पर सवाल: शादी समारोहों में बढ़ता जोखिम
शादी का सीजन होने के कारण इन दिनों सड़कों पर देर रात तक हलचल रहती है। ऐसे में सरकारी गाड़ियों के ड्राइवरों का यह हिंसक और अभद्र व्यवहार महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। मदनीनगर चौक पर यदि वहां मौजूद युवा सतर्क नहीं होते, तो शायद वह चालक किसी बड़ी दुर्घटना को अंजाम दे सकता था या किसी महिला के साथ अधिक गंभीर बदसलूकी कर सकता था।
लोगों का कहना है कि जब सरकारी गाड़ी का बोर्ड लगा वाहन सामने आता है, तो लोग सम्मान और डर की वजह से रास्ता दे देते हैं। इसी का फायदा उठाकर यह चालक नशे में तांडव मचा रहा था। इस घटना के बाद भागलपुर के लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर नशे के खिलाफ काम करने वाले ही नशेड़ी निकलेंगे, तो समाज में क्या संदेश जाएगा?
जवाबदेही तय करने का समय
भागलपुर की यह घटना केवल एक ड्राइवर की शराबखोरी का मामला नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम की सड़न को दर्शाता है जहाँ पावर का इस्तेमाल कमजोरों को दबाने और अपनी हवस पूरी करने के लिए किया जाता है। मद्य निषेध विभाग ग्रुप सेंटर-3 के अधीक्षक को इस मामले में सामने आकर जवाब देना चाहिए। उन्हें बताना होगा कि उनका चालक 12:30 बजे रात को मैरेज हॉल के पास क्या कर रहा था और गाड़ी की लाल-नीली बत्ती क्यों जल रही थी?
The Voice of Bihar (VOB) की टीम इस मामले की निरंतर पड़ताल कर रही है। हम प्रशासन से अपील करते हैं कि इस मामले को ठंडे बस्ते में न डाला जाए। एक ऐसी सरकार जो शराबबंदी को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानती है, उसके राज में एक सरकारी विभाग की गाड़ी का ड्राइवर नशे में हंगामा करे, यह डूब मरने वाली बात है। पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलना चाहिए और उस अज्ञात चालक को सलाखों के पीछे होना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी सरकारी पद और गाड़ी का ऐसा दुरुपयोग करने की हिम्मत न कर सके। भागलपुर की जनता अब केवल ‘आश्वासन’ नहीं, बल्कि ‘कार्रवाई’ चाहती है।


