- समीक्षा भवन में डीएसपी और सभी थानों के प्रभारियों की लगी ‘क्लास’; डिजिटल पुलिसिंग की बारीकियों को समझा
- ट्रेनर ने बताया- पोर्टल पर कैसे दर्ज होगी FIR, दस्तावेज अपलोड करने से लेकर रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तक की मिली जानकारी
- मकसद साफ- पुलिसिंग में आएगी पारदर्शिता, समय बचेगा और आम जनता को मिलेगा त्वरित न्याय
द वॉयस ऑफ बिहार (भागलपुर)
भागलपुर पुलिस अब और भी ‘स्मार्ट’ और ‘हाई-टेक’ होने जा रही है। जिले में अपराध नियंत्रण और केस डायरी के रखरखाव को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। भागलपुर के समीक्षा भवन (Samiksha Bhavan) स्थित सभागार में पुलिस अधिकारियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ‘ऑनलाइन केस रजिस्ट्रेशन’ (Online Case Registration) की पूरी प्रक्रिया समझाई गई।
डीएसपी से लेकर थानेदार तक रहे मौजूद
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में जिले के पुलिस महकमे के तमाम बड़े चेहरे शामिल हुए।
- कार्यक्रम में जिले के सभी पुलिस उपाधीक्षक (DSP), सभी अनुमंडलों के थानाध्यक्ष (SHO) और विभिन्न थानों के पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।
- मकसद था कि शीर्ष अधिकारी से लेकर जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुलिसकर्मी तक, सभी इस नई डिजिटल व्यवस्था से वाकिफ हो सकें।
ट्रेनर ने सिखाए डिजिटल गुर
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ ट्रेनर ने ऑनलाइन माध्यम से केस दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया को डेमो के साथ विस्तार से समझाया। अधिकारियों को निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया:
- पोर्टल का उपयोग: पुलिस के डिजिटल पोर्टल को कैसे लॉग-इन और ऑपरेट करना है।
- एफआईआर (FIR) दर्ज करना: ऑनलाइन एफआईआर की एंट्री कैसे करनी है।
- डेटा अपलोड: केस से जुड़ी आवश्यक जानकारियां और दस्तावेज (Documents) कैसे अपलोड करने हैं।
- तकनीकी समाधान: सर्वर या पोर्टल में आने वाली तकनीकी समस्याओं (Technical Glitches) का समाधान कैसे करना है।
- रिकॉर्ड की सुरक्षा: डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित और व्यवस्थित कैसे रखना है।
पारदर्शिता और त्वरित न्याय पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान पुलिस अधिकारियों को बताया गया कि ऑनलाइन केस रजिस्ट्रेशन लागू होने से पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता (Transparency) आएगी।
- मैनुअल काम कम होने से समय की बचत होगी।
- सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा, क्योंकि डिजिटल रिकॉर्ड होने से उन्हें त्वरित न्याय प्रक्रिया में सहायता मिलेगी और फाइलों के गुम होने या छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म होगी।
प्रशिक्षण सत्र के अंत में एक प्रश्नोत्तरी (Q&A) सत्र भी रखा गया, जिसमें अधिकारियों ने अपनी शंकाओं को साझा किया, जिनका समाधान ट्रेनर द्वारा मौके पर ही किया गया।


