भागलपुर पुलिस को अब ‘सरपंच’ का पाठ: समीक्षा भवन में लगी क्लास; थानेदारों को बताया गया- गांव की सरकार के क्या हैं अधिकार

  • समीक्षा भवन में एक दिवसीय कार्यशाला; पटना से आए एक्सपर्ट्स ने जिले के सभी थानेदारों को दी ट्रेनिंग
  • ग्राम कचहरी को मजबूत करने की पहल: सरपंच के अधिकारों और कानूनी भूमिका पर हुआ मंथन; पुलिस को समन्वय बनाने के मिले टिप्स
  • अब थाने का बोझ होगा कम: छोटे विवादों का निपटारा ग्राम कचहरी में ही करने पर जोर; एसएसपी ने जताई बेहतर काम की उम्मीद

द वॉयस ऑफ बिहार (भागलपुर)

​भागलपुर पुलिस अब ग्रामीण स्तर पर न्याय व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए ‘गांव की सरकार’ यानी सरपंचों के साथ मिलकर काम करेगी। इसी उद्देश्य से जिले के सभी थाना प्रभारियों (SHOs) के लिए समीक्षा भवन स्थित सभागार में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया.

पटना से आए एक्सपर्ट्स ने दी ट्रेनिंग

​इस कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों को ट्रेनिंग देने के लिए पटना से विशेषज्ञ प्रशिक्षक बुलाए गए थे.

  • उद्देश्य: कार्यशाला का मुख्य मकसद ग्राम कचहरी में सरपंच के अधिकार, कर्तव्य और उनकी कानूनी भूमिका को स्पष्ट करना था, ताकि पुलिस अधिकारी उनके कार्यक्षेत्र को बेहतर तरीके से समझ सकें.
  • समन्वय: ट्रेनिंग में इस बात पर विस्तार से चर्चा की गई कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस प्रशासन को सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ किस तरह समन्वय बनाकर काम करना चाहिए.

थानों का बोझ होगा कम

​प्रशिक्षकों ने बताया कि ग्राम स्तर पर होने वाले कई छोटे-मोटे विवादों का समाधान ग्राम कचहरी के माध्यम से ही संभव है.

  • फायदा: यदि पुलिस और सरपंच के बीच बेहतर तालमेल और आपसी सहयोग रहेगा, तो थानों पर अनावश्यक केस का बोझ काफी कम हो जाएगा.

एसएसपी ने जताई उम्मीद

​कार्यशाला के दौरान थाना प्रभारियों ने भी अपने जमीनी अनुभव साझा किए और ग्रामीण क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर विचार-विमर्श किया.

वहीं, एसएसपी (SSP) ने उम्मीद जताई है कि इस प्रशिक्षण से पुलिस और ग्राम कचहरी के बीच समन्वय मजबूत होगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर न्याय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी व पारदर्शी बनेगी.

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