​भागलपुर में एसटीएफ का बड़ा एक्शन: नाबालिग बच्ची को गर्म छड़ से दागने का आरोपी पूर्व मुखिया अगहनु मंडल शिवनारायणपुर से गिरफ्तार

पीरपैंती/भागलपुर, 23 मई 2026। भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एकचारी थाना इलाके में पिछले कई महीनों से फरार चल रहे कतिपय रसूखदार और दबंग चेहरों के खिलाफ कानून के जासूसी दस्तों ने एक प्रखर और बड़ी सफलता दर्ज की है। एक 12 वर्षीय बेगुनाह और मासूम नाबालिग बच्ची को चोरी का झूठा आरोप लगाकर बंधक बनाने, बर्बरतापूर्वक पीटने और दहकते हुए गर्म लोहे के सरिया (छड़) से कई जगह बेरहमी से दागने के विसंगतिपूर्ण मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपियों में शामिल पूर्व मुखिया सह वर्तमान मुखिया पति अगहनु मंडल को विधिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है।

​इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी को जिला पुलिस प्रशासन ने बिहार पुलिस की विशेष कार्य बल (STF) के समन्वय से अंजाम दिया है। शुक्रवार की रात मुकम्मल हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से पीरपैंती और एकचारी दियारा के प्रक्षेपों के भीतर अनधिकृत रूप से समानांतर सत्ता चलाने वाले कतिपय दबंग सिंडिकेट्स और जनप्रतिनिधियों के भीतर भारी सांगठनिक खौफ, मानसिक अवसाद और कानूनी हड़कंप की अवस्थिति साफ तौर पर परिलक्षित हो रही है।

संयुक्त टीम की घेराबंदी और शिवनारायणपुर से गिरफ्तारी का पूरा विन्यास

​इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील गिरफ्तारी के धरातलीय विन्यासों की कड़ियों को आपस में जोड़ने पर यह प्रामाणिक सत्य पटल पर आता है कि आरोपी अगहनु मंडल अपनी विधिक गिरफ्तारी को ब्लॉक करने के उद्देश्य से लगातार अपने छिपने के ठिकानों और मोबाइल लोकेशंस को कूटनीतिक ढंग से डाइवर्ट कर रहा था। वह पुलिसिया दबिश से बचने के लिए दियारा प्रक्षेप के तंग रास्तों का सहारा ले रहा था। शुक्रवार की शाम एकचारी थाना पुलिस की खुफिया इकाई को एक अत्यंत पुख्ता और सटीक इनपुट हस्तगत हुआ कि आरोपी पूर्व मुखिया शिवनारायणपुर अंचल के एक गुप्त हॉट-स्पॉट पर कतिपय लोगों से मिलने के इरादे से संधारित है।

​सूचना के लाइव होते ही एकचारी थानाध्यक्ष बबलू कुमार के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस बल और पटना से आई एसटीएफ के जांबाज जवानों की एक संयुक्त आक्रामक टीम ने त्वरित नाकेबंदी की। रात के करीब 8:00 बजे सुरक्षा बलों के इस संयुक्त दस्ते ने शिवनारायणपुर के उस चिन्हित ठिकाने पर प्रखर दबिश दी और चारों तरफ से अभेद्य घेराबंदी कर अगहनु मंडल को ऑन-防(स्पॉट) धर-दबोचा। उसकी गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस के खोजी दस्तों ने अंचल के कतिपय अन्य संदिग्ध ठिकानों पर भी देर रात तक छापेमारी प्रक्रम को सक्रिय रखा, ताकि इस मामले में फरार चल रहे अन्य कनिष्ठ सहयोगियों के भागने के विन्यासों को पूरी कड़ाई से लॉक किया जा सके।

अगस्त 2025 का वह भयावह कांड: चोरी के झूठे आरोप में मासूम पर ढाया गया था जुल्म

​इस अमानवीय और रूह कंपा देने वाले प्रकरण के काले पन्नों को पलटें तो ज्ञात होता है कि यह पूरी वीभत्स घटना 8 अगस्त 2025 को एकचारी दियारा के ग्रामीण प्रक्षेप के भीतर घटित हुई थी। अंचल के कतिपय रसूखदार दबंगों, जिनमें रामू प्रसाद और तात्कालिक जनप्रतिनिधि अगहनु मंडल मुख्य रूप से कप्तानी भूमिका में संधारित थे, ने एक 12 वर्षीय अबोध नाबालिग बच्ची और उसके छोटे भाई पर अपने घर के भीतर अवैध रूप से प्रविष्ट होने और मोबाइल फोन सहित कतिपय अन्य कीमती सामानों की चोरी करने का एक निराधार और एकतरफा आरोप मढ़ा था।

​कानून को अपने हाथ में लेते हुए इन दबंगों ने न तो स्थानीय पुलिस प्रशासन को इसकी कोई विधिक सूचना दी और न ही किसी विधिक पंचायत का सहारा लिया। इसके विपरीत, उन्होंने कनिष्ठ बच्चों को बंधक बना लिया और लाठी-डंडों से उनकी बेरहमी से पिटाई प्रारंभ कर दी। क्रूरता का ग्राफ तब चरम पर पहुंच गया जब इन रसूखदारों ने लोहे के एक मोटे सरिया (छड़) को आग के मलबे में डालकर पूरी तरह लाल और दहकता हुआ विनिर्मित किया। इसके बाद, रामू प्रसाद और अगहनु मंडल के इस खूनी सिंडिकेट ने उस 12 वर्षीय बच्ची के हाथों और शरीर के संवेदनशील अंगों पर उस दहकती छड़ से कई जगहों पर प्रखरता से दागा, जिससे बच्ची की त्वचा जलकर मलबे में तब्दील हो गई और वह असहनीय शारीरिक पीड़ा के कारण बेहोश हो गई।

तत्कालीन एसडीपीओ अर्जुन कुमार गुप्ता के विलेख और पीड़ित पिता का विधिक संघर्ष

​दबंगों के इस खौफनाक चक्रव्यूह और बंधक गृह से किसी तरह मुक्त होने के उपरांत, पीड़ित नाबालिग बच्ची को उसके लहूलुहान और झुलसे हुए विन्यास में स्थानीय रेफरल अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों के विशेष मेडिकल बोर्ड ने कड़े लाइफ-सपोर्ट प्रक्रमों के बल पर उसके घावों का उपचार मुकम्मल किया था। इस जघन्य सामाजिक विसंगति को लेकर पीड़ित नाबालिग के पिता ने अदम्य सांगठनिक साहस का परिचय दिया। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के रसूख और धमकियों को पूरी तरह से ब्लॉक करते हुए एकचारी थाने के पटल पर उपस्थित होकर मुख्य आरोपी अगहनु मंडल और रामू प्रसाद सहित कुल 14 नामजद दबंगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो अधिनियम की सुसंगत कड़क धाराओं के तहत एक विधिक प्राथमिकी (एफआईआर) पंजीकृत कराई थी।

​इस कांड की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्कालीन अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO 2) अर्जुन कुमार गुप्ता ने स्वयं घटना स्थल यानी एकचारी दियारा का फॉरेंसिक और भौतिक निरीक्षण संधारित किया था। तत्कालीन एसडीपीओ अर्जुन कुमार गुप्ता ने अपने विधिक विलेखों में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया था कि आरोपियों ने अपनी आंतरिक सनक में एक अबोध बच्ची पर अमानवीय अत्याचार मुकम्मल किया है। पुलिस कप्तानों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस समय ही छापेमारी कर इस खूनी सिंडिकेट के 6 मुख्य सदस्यों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल के सींखचों के पीछे भेज दिया था, जबकि अगहनु मंडल राजनीतिक रसूख की आड़ में तब से भूमिगत संधारित था।

एकचारी थानाध्यक्ष बबलू कुमार की पुष्टि और आरोपी का लंबा आपराधिक इतिहास

​एकचारी के वर्तमान थानाध्यक्ष बबलू कुमार ने शुक्रवार की रात हुई इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के विधिक विन्यासों की प्रामाणिक रूप से पुष्टि की है। थानाध्यक्ष बबलू कुमार ने बताया कि गिरफ्तार किया गया पूर्व मुखिया अगहनु मंडल कोई साधारण जनप्रतिनिधि नहीं है, बल्कि वह अंचल के भीतर संगठित अपराध, भूमि विवादों और अवैध वसूली के सिंडिकेट्स का एक मुख्य ऑपरेटर संधारित रहा है।

​पुलिस डायरी के सेवा रिकॉर्ड्स को खंगालने पर यह स्पष्ट प्रमाणित हुआ है कि अगहनु मंडल के खिलाफ एकचारी, पीरपैंती और आस-पड़ोस के थानों की विलेख संचिकाओं में पूर्व से ही रंगदारी, मारपीट, जालसाजी और आर्म्स एक्ट के कई अन्य संगीन विधिक मामले दर्ज संधारित हैं। पुलिस कप्तानों की एक विशेष जासूसी विंग अब उसके इन सभी पुराने मुकदमों के कानूनी स्टेटस की गहन स्क्रूटनी लाइव मोड पर कर रही है, ताकि उसकी जमानत के सभी विधिक रास्तों को पूरी तरह से लॉक (ब्लॉक) किया जा सके।

स्पीडी运行 ट्रायल के माध्यम से कड़ी सजा दिलाने की प्रशासनिक तैयारी

​वर्तमान समय में अगहनु मंडल की यह विधिक गिरफ्तारी मुख्य रूप से उसी 12 वर्षीय नाबालिग बच्ची और उसके भाई के साथ की गई बर्बर मारपीट और गर्म छड़ से दागने के गंभीर मामले संचिका के तहत मुकम्मल की गई है। पुलिस ने आरोपी पूर्व मुखिया को कड़े सशस्त्र सुरक्षा घेरे के भीतर एक गुप्त सेल में रखकर पूछताछ प्रक्रम को लाइव किया है, ताकि उसके फरार चल रहे अन्य 7 नामजद सहयोगियों के मोबाइल कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) और संभावित ठिकानों का सुराग लगाया जा सके।

​एकचारी थाना पुलिस इस केसनोट डायरी के विन्यासों को अदालत के समक्ष पूरी तरह अभेद्य बनाने के उद्देश्य से वैज्ञानिक साक्ष्यों और पीड़ित बच्ची के पूर्व में दर्ज कराए गए विधिक बयानों को चार्जशीट का मुख्य आधार विनिर्मित कर रही है। पुलिस प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि इस मामले को जिले के स्पीडी ट्रायल (त्वरित विधिक सुनवाई) के विन्यास से एकीकृत कराया जाएगा, ताकि इस बर्बर कांड के मुख्य सूत्रधार अगहनु मंडल को कानून के तहत कड़े से कड़े दंडात्मक विन्यास से ससमय एकीकृत कराया जा सके और दियारा प्रक्षेप के भीतर आम नागरिकों और कमजोर तबकों की सुरक्षा ग्रिड पूरी कड़ाई के साथ अभेद्य संधारित बनी रहे।

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