​भागलपुर लोक अदालत में ‘न्याय’ की सुनामी: 10 हजार से अधिक मामलों का निपटारा, जिला स्कूल में चालान भरने को लेकर मची भारी अफरातफरी

भागलपुर। जिले में शनिवार को आयोजित इस वर्ष की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत ने त्वरित न्याय और आपसी समझौते की दिशा में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भागलपुर व्यवहार न्यायालय से लेकर नवगछिया और कहलगांव अनुमंडल तक न्याय की ऐसी बयार चली कि वर्षों से लंबित पड़े हजारों मुकदमों का अंत महज कुछ ही घंटों में हो गया। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस विशेष अभियान के दौरान जिले भर में कुल 10,486 वादों का निष्पादन किया गया, जो हाल के वर्षों में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। इस दौरान विभिन्न विभागों और बैंक ऋणों से संबंधित मामलों में कुल 6,81,98,238 (करीब पौने सात करोड़) रुपये की राशि पर समझौता हुआ। सुलह और आपसी रजामंदी के आधार पर इन वादों के निष्पादन के लिए जिले में कुल 31 बेंचों का गठन किया गया था, जिसमें भागलपुर मुख्यालय में 22, नवगछिया में 7 और कहलगांव में 2 बेंच सक्रिय रहे। हालाँकि, सफलता के इन आंकड़ों के बीच जिला स्कूल परिसर में यातायात चालान के निपटारे को लेकर उत्पन्न हुई अफरातफरी ने प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए।

जिला स्कूल में उमड़ा जनसैलाब: अफरातफरी और हंगामे के बीच पहुँचे आलाधिकारी

​इस बार की लोक अदालत में सबसे अधिक चर्चा जिला स्कूल परिसर की रही, जहाँ यातायात चालान से संबंधित मामलों के निष्पादन के लिए विशेष रूप से पांच बेंच लगाए गए थे। परिवहन विभाग द्वारा दी गई छूट और पेंडिंग चालान को खत्म करने की जल्दबाजी में शनिवार की सुबह से ही जिला स्कूल के बाहर हजारों की संख्या में वाहन मालिकों की भीड़ जमा हो गई। चिलचिलाती धूप और लंबी कतारों के कारण लोगों का धैर्य जवाब देने लगा। भीड़ इतनी अधिक थी कि प्रबंधन की सारी व्यवस्थाएं बौनी साबित होने लगीं।

​कतार में खड़े लोग समय और व्यवस्था की कमी को लेकर हंगामा करने लगे, जिससे वहां अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया। स्थिति बिगड़ती देख सूचना मिलते ही जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव तुरंत मौके पर पहुँचे। दोनों अधिकारियों ने काफी देर तक वहां रुककर लोगों को समझाया-बुझाया और कतारों को व्यवस्थित कराया। इसके बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपांकर पाण्डेय, जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव रंजीता कुमारी और अन्य न्यायिक पदाधिकारी भी जिला स्कूल पहुँचे ताकि स्थिति को सामान्य किया जा सके। प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारियों की सक्रियता के बाद ही वहां चालान जमा करने की प्रक्रिया सुचारू हो पाई।

न्याय के महाकुंभ का उद्घाटन: समय और धन की बचत पर जोर

​राष्ट्रीय लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ शनिवार की सुबह भागलपुर व्यवहार न्यायालय परिसर में एक गरिमामय समारोह के साथ हुआ। इसका उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष दीपांकर पाण्डेय, कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश राज कुमार राजपूत, जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राज नारायण निगम, सीजेएम राज कपूर और प्राधिकार की सचिव रंजीता कुमारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

​इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपांकर पाण्डेय ने लोक अदालत की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अदालतों में मुकदमों का बोझ कम करने और आम आदमी को राहत देने के लिए लोक अदालत एक सशक्त माध्यम है। सुलह के आधार पर वादों का निपटारा करने से न केवल लोगों के समय और धन की बचत होती है, बल्कि यह समाज में शांति और सौहार्द को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने वादियों से अपील की कि वे छोटे-मोटे विवादों को आपसी रजामंदी से यहीं खत्म करें ताकि वे अपने जीवन में आगे बढ़ सकें।

नवगछिया और कहलगांव: अनुमंडलों में भी रहा न्याय का उत्साह

​न्याय की यह मुहिम केवल जिला मुख्यालय तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि नवगछिया और कहलगांव अनुमंडलों में भी वादियों का भारी उत्साह देखा गया।

  • नवगछिया: नवगछिया व्यवहार न्यायालय में आयोजित लोक अदालत में कुल 541 मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया। यहाँ सात बेंचों के माध्यम से कुल 1,16,38,226 रुपये का सेटलमेंट किया गया, जिसमें से 1,06,12,847 रुपये की वास्तविक रिकवरी की गई। नवगछिया में बैंक ऋण और बिजली विभाग से जुड़े मामलों में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने विवादों को खत्म किया।
  • कहलगांव: कहलगांव व्यवहार न्यायालय परिसर में कुल 265 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया। यहाँ लोक अदालत का उद्घाटन प्राधिकार के अध्यक्ष सह अवर न्यायाधीश प्रथम अखिलेश कुमार, अवर न्यायाधीश मो. तस्नीम कौशर और मुंसिफ विकास गौरव ने किया। कहलगांव में भी पारिवारिक विवादों और दीवानी मामलों में कई पुराने झगड़ों का अंत हुआ।

सात करोड़ के करीब पहुँचा समझौता: राजस्व और राहत का संगम

​राष्ट्रीय लोक अदालत में इस बार रिकॉर्ड तोड़ समझौता राशि दर्ज की गई। कुल 6 करोड़ 81 लाख 98 हजार 238 रुपये का समझौता यह दर्शाता है कि लोग अब कानूनी दांव-पेच के बजाय समझौते की राह चुन रहे हैं। सबसे अधिक मामले बैंक ऋण, बिजली बिल बकाया, बीमा क्लेम, और आपराधिक शमनीय वादों से जुड़े थे।

​विशेष रूप से बिजली विभाग और बैंकों ने अपने बकायेदारों को विशेष छूट का लाभ दिया, जिससे उन लोगों को बड़ी राहत मिली जो आर्थिक तंगी के कारण अपना भुगतान नहीं कर पा रहे थे। लोक अदालत के माध्यम से होने वाले फैसलों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनके खिलाफ कहीं भी अपील नहीं की जा सकती, जिससे विवाद का स्थायी अंत हो जाता है। शनिवार को कई ऐसे मामले भी देखे गए जहाँ वर्षों से अलग रह रहे पति-पत्नी ने काउंसलिंग के बाद फिर से एक साथ रहने का निर्णय लिया, जिससे कई उजड़े हुए घर फिर से बस गए।

प्रशासनिक सतर्कता और न्यायिक समन्वय की जीत

​जिला स्कूल में उत्पन्न हुई अप्रिय स्थिति को यदि छोड़ दिया जाए, तो पूरे जिले में लोक अदालत का आयोजन बेहद सफल और शांतिपूर्ण रहा। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य केवल राजस्व संग्रह नहीं, बल्कि जनता को कानूनी बोझ से मुक्त करना है। एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने पुलिस बल को निर्देश दिया था कि सभी केंद्रों पर वादियों की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए।

​जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव रंजीता कुमारी ने बताया कि 10,486 वादों का निष्पादन एक सामूहिक प्रयास का परिणाम है। इसमें न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, बैंक अधिकारियों और आम जनता का पूरा सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मामले इस बार नहीं सुलझ सके, वे अगली लोक अदालत की तैयारी अभी से शुरू कर सकते हैं। शाम तक चली इस प्रक्रिया में भागलपुर व्यवहार न्यायालय परिसर में वादियों और उनके परिजनों की भारी उपस्थिति यह बता रही थी कि लोक अदालत अब न्याय का एक विश्वसनीय और लोकप्रिय विकल्प बन चुकी है।

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