
भागलपुर, 06 मई 2026 : भागलपुर नगर निगम परिसर में स्थायी सफाईकर्मियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा अपनी लंबित मांगों को लेकर शुरू की गई भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। नगर निगम परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी धरने पर बैठे रहे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
कर्मचारियों की मुख्य मांग सातवें वेतनमान का लाभ लागू करने और पिछले दो वर्षों से काटी गई राशि का भुगतान करने से जुड़ी है। आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर नगर निगम प्रशासन के पास आवेदन देते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। इससे कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है।
नगर सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष लड्डू हरि ने कहा कि नगर निगम के स्थायी सफाईकर्मी वर्षों से लगातार मेहनत कर शहर की सफाई व्यवस्था संभाल रहे हैं, लेकिन उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सातवें वेतनमान को लेकर कई बार अधिकारियों से बातचीत हुई, आवेदन दिए गए और ज्ञापन भी सौंपे गए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। अब कर्मचारियों के पास आंदोलन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
संघ के सचिव नागेश्वर हरि ने कहा कि नगर निगम कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष है। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम के एक बड़ा बाबू द्वारा फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत की मांग की गई। नागेश्वर हरि ने दावा किया कि उनसे ₹5000 रिश्वत ली गई, जिसे उन्होंने कर्ज लेकर दिया, लेकिन इसके बावजूद उनकी फाइल दो वर्षों से लंबित पड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि कई कर्मचारी इसी तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम कार्यालय में भ्रष्टाचार का माहौल है और बिना पैसे दिए कोई काम आगे नहीं बढ़ता। उनका कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी भी अपने बकाया भुगतान और अन्य लाभों के लिए लगातार कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल रही। इससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी बढ़ती जा रही है।
भूख हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारी अशोक हरि ने कहा कि नगर निगम के कर्मचारी बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। बारिश, धूप और बीमारी के बावजूद सफाई व्यवस्था को बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी होती है, लेकिन जब उनके अधिकारों और वेतन की बात आती है तो प्रशासन उदासीन रवैया अपनाता है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
सेवानिवृत्त कर्मचारी शंकराचार्य उपाध्याय ने कहा कि नौकरी पूरी करने के बाद भी उन्हें अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पेंशन, बकाया राशि और अन्य लाभों के भुगतान में लगातार देरी हो रही है, जिससे बुजुर्ग कर्मचारियों को भारी कठिनाई झेलनी पड़ रही है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
धरना स्थल पर कर्मचारियों ने सरकार और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द बातचीत कर समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। कई कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जा सकते हैं।
इधर नगर निगम प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहने से शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। नगर निगम के कई वार्डों में सफाई कार्य धीमा पड़ सकता है, जिसका असर आम लोगों पर भी पड़ेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाईकर्मियों की समस्याओं का जल्द समाधान होना चाहिए, क्योंकि शहर की स्वच्छता व्यवस्था काफी हद तक इन्हीं कर्मचारियों पर निर्भर करती है। यदि हड़ताल लंबी चली तो शहर में गंदगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
फिलहाल नगर निगम परिसर में आंदोलन जारी है और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है कि वह कर्मचारियों की मांगों को लेकर क्या निर्णय लेता है और कब तक इस विवाद का समाधान निकलता है।


