भागलपुर में शुरू होगी हाईटेक इलेक्ट्रिक बस सेवा, तिलकामांझी में बनेगा आधुनिक ई-बस टर्मिनल

भागलपुर शहर अब आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक बस योजना के तहत शहर के तिलकामांझी स्थित सरकारी बस स्टैंड को अत्याधुनिक ई-बस टर्मिनल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के जरिए भागलपुर को न केवल आधुनिक परिवहन सुविधा मिलेगी, बल्कि शहर में प्रदूषण कम करने और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार परियोजना की विस्तृत योजना तैयार हो चुकी है और निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।

भागलपुर में बनने वाला यह ई-बस टर्मिनल बिहार के आधुनिक परिवहन ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अंतर्गत बनने वाली इस परियोजना पर लगभग 6.78 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें से करीब 1.45 करोड़ रुपये सिविल निर्माण कार्यों पर खर्च होंगे। अधिकारियों का कहना है कि यदि सब कुछ तय समय के अनुसार चला तो जुलाई महीने से निर्माण कार्य शुरू हो सकता है।

इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों और परिवहन विशेषज्ञों के बीच उत्साह का माहौल है। भागलपुर लंबे समय से बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की मांग करता रहा है। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों और आधुनिक टर्मिनल की योजना को शहर के विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार तिलकामांझी स्थित मौजूदा सरकारी बस स्टैंड को पूरी तरह आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा। यहां यात्रियों और कर्मचारियों दोनों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कई अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना के तहत जी प्लस वन प्रशासनिक भवन, आधुनिक कार्यशाला भवन, बसों की सफाई के लिए दो वाशिंग रैंप और सुरक्षा व्यवस्था के लिए दो सुरक्षा चौकियों का निर्माण किया जाएगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टर्मिनल परिसर में इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जाएगा। यहां कुल 10 ई-चार्जिंग प्वाइंट बनाए जाएंगे, जहां बसों को चार्ज किया जा सकेगा। इससे इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी और शहर में स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

अधिकारियों के अनुसार इस टर्मिनल से 12 मीटर और 9 मीटर लंबाई वाली कुल 25 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा यहां 10 अतिरिक्त सीएनजी और डीजल बसों के संचालन की भी सुविधा होगी। इससे यात्रियों को विभिन्न रूटों पर बेहतर और नियमित बस सेवा मिल सकेगी।

परियोजना लगभग 9.66 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी, जिसमें करीब 5.6 एकड़ भूमि पर ई-बस टर्मिनल का निर्माण होगा। इस बड़े क्षेत्र में पार्किंग, यात्री प्रतीक्षालय, प्रशासनिक सुविधाएं और बस संचालन से जुड़ी अन्य व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।

यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग प्रकार के वाहनों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था भी बनाई जाएगी। चारपहिया वाहन, ऑटो और दोपहिया वाहनों के लिए अलग पार्किंग क्षेत्र निर्धारित होंगे। इससे बस स्टैंड परिसर में अव्यवस्था कम होगी और ट्रैफिक संचालन अधिक सुगम बन सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू होने से भागलपुर शहर को कई स्तरों पर फायदा मिलेगा। सबसे बड़ा लाभ पर्यावरण को होगा, क्योंकि इलेक्ट्रिक बसें पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में बेहद कम प्रदूषण फैलाती हैं। इससे शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना है।

इसके अलावा ईंधन की बचत भी इस परियोजना का बड़ा लाभ मानी जा रही है। लगातार बढ़ती डीजल कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक बसें सार्वजनिक परिवहन को अधिक किफायती बना सकती हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय में यह परियोजना आर्थिक रूप से भी लाभदायक साबित होगी।

प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक बस योजना के तहत बिहार को कुल 400 इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं। इनमें से 50 बसें भागलपुर को आवंटित की जाएंगी। इतनी बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों के आने से शहर की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

भागलपुर के लोगों को उम्मीद है कि नई बस सेवा से शहर में सफर अधिक सुरक्षित, आरामदायक और समयबद्ध हो सकेगा। अभी शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था सीमित मानी जाती है, जिसके कारण लोगों को निजी वाहनों और ऑटो पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है। इलेक्ट्रिक बसों के शुरू होने से आम यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है।

परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस परियोजना को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो भागलपुर बिहार के उन शहरों में शामिल हो सकता है जहां आधुनिक और हरित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित हो चुकी होगी। इससे शहर की पहचान भी बदलेगी और निवेश तथा पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

जिला प्रशासन और परिवहन विभाग का लक्ष्य केवल बस टर्मिनल बनाना नहीं बल्कि पूरे जिले में इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क को धीरे-धीरे विस्तार देना है। भविष्य में शहर के विभिन्न प्रमुख रूटों और आसपास के क्षेत्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है।

परियोजना के निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है। निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को काम मिल सकता है, जबकि टर्मिनल के संचालन के बाद तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर भी रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन देश के अधिकांश शहरों की जरूरत बन जाएगा। बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए सरकारें अब हरित और टिकाऊ परिवहन मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। भागलपुर की यह परियोजना उसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि परियोजना समय पर पूरी हो जाती है तो इससे भागलपुर की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है। लोगों को उम्मीद है कि आधुनिक बस सेवा से यात्रा आसान होगी, ट्रैफिक दबाव कम होगा और शहर को नई पहचान मिलेगी।

फिलहाल प्रशासन परियोजना को जल्द शुरू करने की तैयारी में जुटा है। अधिकारियों के अनुसार सभी तकनीकी प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं और निर्माण एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। यदि तय समय पर काम शुरू होता है तो आने वाले कुछ वर्षों में भागलपुर बिहार के आधुनिक ई-बस नेटवर्क वाले प्रमुख शहरों में शामिल हो सकता है।

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