भागलपुर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में 24 घंटे की हड़ताल, 1400 मेडिकल दुकानें रहीं बंद

भागलपुर, 20 मई 2026। ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री और नई दवा नीति के विरोध में बुधवार को भागलपुर में दवा कारोबारियों ने 24 घंटे की हड़ताल की। इस दौरान शहर समेत जिलेभर की करीब 1400 मेडिकल दुकानें और दवा एजेंसियां बंद रहीं, जिससे दवा बाजार पूरी तरह प्रभावित हो गया। दवा कारोबारियों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों पर छोटे व्यापारियों के हितों को नुकसान पहुंचाने और मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।

हड़ताल का नेतृत्व ने किया। संगठन के आह्वान पर शहर के प्रमुख दवा बाजारों में मेडिकल दुकानें बंद रहीं। कारोबारियों ने एमपी द्विवेदी रोड स्थित देवी बाबू धर्मशाला के पास एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया और ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शन के बाद दवा कारोबारियों ने शहर के दवा पट्टी इलाके में बाइक रैली निकाली। इस दौरान बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर संचालक और दवा व्यवसायी शामिल हुए। रैली के माध्यम से कारोबारियों ने सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का प्रयास किया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने और नई दवा नीति वापस लेने की मांग की।

दवा कारोबारियों का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर पारंपरिक मेडिकल दुकानों के व्यवसाय को प्रभावित कर रही हैं। उनका आरोप है कि बिना पर्याप्त निगरानी और नियंत्रण के ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री मरीजों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है।

ने कहा कि पूरे बिहार में लगभग 40 हजार दवा दुकानदार इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, जबकि केवल भागलपुर जिले में करीब 1400 मेडिकल दुकानें संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण छोटे और मध्यम स्तर के दवा कारोबारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ई-फार्मेसी कंपनियां बड़े स्तर पर छूट देकर बाजार पर कब्जा करने की कोशिश कर रही हैं, जबकि स्थानीय दवा दुकानदार नियमानुसार व्यवसाय करते हैं और लोगों को तत्काल सेवा उपलब्ध कराते हैं। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति जारी रही, तो हजारों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

घनश्याम दास ने कहा कि सरकार को तत्काल ऑनलाइन दवा बिक्री पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि और के निर्देश पर आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल भी की जा सकती है।

दवा कारोबारियों ने जिला प्रशासन, सिविल सर्जन, औषधि नियंत्रक और औषधि निरीक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से दवा बिक्री पर कड़ी निगरानी जरूरी है। उनका कहना है कि कई बार बिना वैध पर्चे के दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे मरीजों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मेडिकल दुकानों पर प्रशिक्षित फार्मासिस्ट मौजूद रहते हैं, जो मरीजों को दवा से संबंधित जरूरी जानकारी देते हैं। जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर केवल ऑर्डर और डिलीवरी की प्रक्रिया होती है, जिसमें कई बार दवा की गुणवत्ता और मरीज की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।

व्यापारियों का कहना है कि स्थानीय मेडिकल दुकानें केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा का भी माध्यम हैं। उन्होंने कोविड महामारी के दौरान अपनी भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि जब पूरा देश संकट से गुजर रहा था, तब दवा दुकानदार दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे हुए थे।

घनश्याम दास ने कहा कि कोविड काल में कई दवा व्यवसायियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को दवाइयां उपलब्ध कराईं। कई कारोबारी संक्रमित भी हुए, लेकिन इसके बावजूद दवा दुकानों ने सेवाएं बंद नहीं कीं। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में मोहल्ले की दवा दुकान ही लोगों के सबसे अधिक काम आती है।

उन्होंने यह भी कहा कि रात के समय आपात स्थिति में मरीजों को स्थानीय मेडिकल स्टोर से तुरंत दवा मिल जाती है, जबकि ऑनलाइन सेवा में समय लगता है। इसलिए पारंपरिक दवा दुकानों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हड़ताल के दौरान हालांकि आवश्यक सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया गया। गंभीर मरीजों और आपातकालीन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ आवश्यक दवाओं की सीमित व्यवस्था बनाए रखी गई थी। फिर भी आम लोगों को दिनभर दवाइयां खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

शहर के कई इलाकों में लोग मेडिकल दुकानें बंद मिलने के कारण परेशान दिखे। कई मरीजों और उनके परिजनों को जरूरी दवाओं के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। हालांकि दवा कारोबारियों का कहना था कि उनका उद्देश्य आम लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इसका असर पारंपरिक मेडिकल स्टोर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। एक तरफ उपभोक्ताओं को घर बैठे दवा और डिस्काउंट का लाभ मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर छोटे कारोबारियों के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती बढ़ रही है।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए मजबूत नियामक व्यवस्था जरूरी है, ताकि बिना पर्चे के दवाओं की बिक्री और नकली दवाओं जैसी समस्याओं को रोका जा सके।

फिलहाल भागलपुर में हुई इस हड़ताल ने ऑनलाइन दवा बिक्री और नई दवा नीति को लेकर दवा कारोबारियों की बढ़ती नाराजगी को स्पष्ट कर दिया है। आने वाले दिनों में यदि सरकार और दवा संगठनों के बीच बातचीत नहीं होती, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

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