भागलपुर | 09 मार्च, 2026: अक्सर हम शहर की समस्याओं और विकास की फाइलों के बीच महापौर डॉ. वसुंधरा लाल को देखते हैं, लेकिन सोमवार को भागलपुर की प्रथम नागरिक एक अलग ही अंदाज़ में नज़र आईं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के उपलक्ष्य में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (क्षेत्रीय कार्यालय, भागलपुर) द्वारा आयोजित ‘स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम’ में मेयर महोदया ने एक वरिष्ठ चिकित्सक की भूमिका निभाते हुए बैंक की महिला कर्मियों और ग्राहकों को सेहत का ‘सुरक्षा कवच’ प्रदान किया।
दीप प्रज्वलन के साथ ‘स्वस्थ नारी’ का संकल्प
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. वसुंधरा लाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर यूनियन बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक सहित बैंक की तमाम महिला अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहीं। बैंक के औपचारिक माहौल में स्वास्थ्य की चर्चा ने एक नई ऊर्जा का संचार किया।
कामकाजी महिलाओं के लिए ‘डॉक्टर मेयर’ की सलाह
मेयर डॉ. वसुंधरा लाल ने अपने संबोधन में प्रशासनिक अनुभव और मेडिकल विशेषज्ञता का बेहतरीन संगम पेश किया। उन्होंने कामकाजी महिलाओं के सामने आने वाली शारीरिक और मानसिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
- पोषण और स्वरक्षा: डॉ. लाल ने जोर देकर कहा कि घर और दफ्तर की दोहरी जिम्मेदारी निभाने वाली महिलाओं के लिए खुद का स्वास्थ्य अक्सर आखिरी प्राथमिकता बन जाता है। उन्होंने संतुलित आहार और समय पर भोजन की महत्ता समझाई।
- तनाव प्रबंधन: कार्यस्थल (Workplace) के तनाव को सेहत पर हावी न होने देने के लिए उन्होंने छोटे-छोटे ‘ब्रेक्स’ और नियमित व्यायाम की सलाह दी।
- चेकअप की आदत: “एक स्वस्थ महिला ही एक स्वस्थ परिवार और सशक्त समाज का आधार होती है,” इस मंत्र के साथ उन्होंने महिलाओं को 35 की उम्र के बाद नियमित हेल्थ चेकअप कराने हेतु प्रेरित किया।
जिज्ञासाओं का समाधान: सीधे सवाल, सटीक जवाब
कार्यक्रम का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह रहा जब बैंक की महिला कर्मियों ने अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर डॉ. लाल से सवाल पूछे। एक अनुभवी चिकित्सक की तरह उन्होंने न केवल उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया, बल्कि दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाले सरल और प्रभावी नुस्खे भी साझा किए।
VOB का नजरिया: जब ‘हाकिम’ बने ‘हमदर्द’!
भागलपुर नगर निगम की कमान संभालने वाली डॉ. वसुंधरा लाल का यह ‘मेडिकल अवतार’ समाज के लिए एक प्रेरणा है। अक्सर प्रोफेशनल लाइफ की भागदौड़ में हम भूल जाते हैं कि ‘जान है तो जहान है’। यूनियन बैंक की यह पहल सराहनीय है, क्योंकि बैंकिंग जैसे तनावपूर्ण कार्यक्षेत्र में अपनी महिला कर्मचारियों की सेहत की चिंता करना एक प्रगतिशील संस्थान की पहचान है। उम्मीद है कि शहर की अन्य संस्थाएं भी अपनी ‘शक्ति’ (महिला शक्ति) को सहेजने के लिए ऐसे कदम उठाएंगी।


