भागलपुर में शराब तस्करी मामले में बड़ा फैसला: 15.8 लीटर विदेशी और 600 एमएल देशी शराब बरामदगी केस में आरोपी को 5 साल की सजा, एक लाख का जुर्माना भी

भागलपुर। बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून के तहत अवैध शराब कारोबार के खिलाफ प्रशासन और न्यायपालिका लगातार सख्त रुख अपना रहे हैं। इसी कड़ी में भागलपुर की विशेष उत्पाद अदालत ने अवैध शराब बरामदगी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दोषी पाए गए आरोपी को कठोर सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले को शराबबंदी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

विशेष उत्पाद न्यायालय-02 सह जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश शिव कुमार शर्मा की अदालत ने मोजाहिदपुर थाना क्षेत्र में दर्ज शराब तस्करी के एक मामले में सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी पुलिस पासवान को दोषी करार दिया और उसे पांच वर्ष के सश्रम कारावास के साथ एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी निर्धारित जुर्माना राशि जमा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त छह माह का साधारण कारावास भुगतना होगा।

यह मामला वर्ष 2024 में हुई शराब बरामदगी से जुड़ा है, जिसमें पुलिस ने वाहन जांच के दौरान बड़ी मात्रा में विदेशी और देशी शराब जब्त की थी। मामले की जांच, आरोप-पत्र, साक्ष्य और न्यायालय में हुई सुनवाई के बाद आखिरकार अदालत ने अपना फैसला सुनाया।

विशेष अदालत ने सुनाया फैसला

भागलपुर स्थित विशेष उत्पाद न्यायालय-02 में चल रहे इस मामले की सुनवाई लंबे समय से चल रही थी। मोजाहिदपुर थाना कांड संख्या 178/2024 और विशेष उत्पाद वाद संख्या 2876/2024 के तहत दर्ज मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए थे।

न्यायालय ने 30 मई 2026 को मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रखने के बाद आरोपी पुलिस पासवान को बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 की धारा 30(ए) के तहत दोषी करार दिया था। वहीं, इस मामले में नामजद अन्य दो आरोपियों मनोज पासवान और डेजी देवी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

इसके बाद सजा के बिंदु पर हुई सुनवाई में अदालत ने दोषी पुलिस पासवान के खिलाफ कठोर रुख अपनाते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

गुप्त सूचना के आधार पर हुई थी कार्रवाई

अभियोजन पक्ष के अनुसार यह पूरा मामला 17 जुलाई 2024 का है। उस दिन पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक सफेद रंग की टाटा जेस्ट कार में अवैध शराब की खेप लेकर कुछ लोग भागलपुर शहर के बायपास क्षेत्र की ओर जा रहे हैं।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई। अधिकारियों के निर्देश पर बाल्टी कारखाना चौक के समीप वाहन जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान संदिग्ध वाहन की पहचान कर उसे रोक लिया गया और उसकी तलाशी ली गई।

पुलिस की यह कार्रवाई बाद में पूरे मामले की जांच का आधार बनी और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा भी रही।

वाहन की तलाशी में मिली बड़ी मात्रा में शराब

जांच के दौरान जब पुलिस ने टाटा जेस्ट कार की तलाशी ली तो उसमें से विभिन्न ब्रांडों की विदेशी शराब और देशी शराब बरामद हुई। अधिकारियों के अनुसार वाहन से कुल 15.800 लीटर विदेशी शराब और 600 एमएल देशी शराब बरामद की गई।

बिहार में लागू शराबबंदी कानून के तहत यह बरामदगी गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। पुलिस ने मौके पर ही शराब और वाहन को जब्त कर लिया तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए प्राथमिकी दर्ज की।

इसके बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई और जब्त सामग्री को आवश्यक परीक्षण एवं दस्तावेजी प्रक्रिया के लिए सुरक्षित रखा गया।

जांच के बाद दाखिल हुआ आरोप-पत्र

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच की। जांच के दौरान वाहन, बरामद शराब, घटनास्थल और आरोपियों से जुड़े विभिन्न तथ्यों को एकत्रित किया गया।

जांच पूरी होने के बाद संबंधित न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया गया। इसके बाद मामला विचारण के लिए विशेष उत्पाद न्यायालय में पहुंचा, जहां अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच विस्तृत सुनवाई हुई।

न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों का परीक्षण किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह परखा कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप कितने प्रमाणित हैं और उपलब्ध साक्ष्य किस हद तक अपराध को सिद्ध करते हैं।

एक आरोपी दोषी, दो को मिली राहत

विचारण के दौरान अदालत के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद न्यायाधीश ने पाया कि पुलिस पासवान के खिलाफ आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। इसी आधार पर उन्हें दोषी ठहराया गया।

हालांकि, सह-अभियुक्त मनोज पासवान और डेजी देवी के विरुद्ध अभियोजन पक्ष ऐसे ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका जिससे उनके अपराध में शामिल होने की पुष्टि हो सके। अदालत ने आपराधिक न्याय प्रणाली के मूल सिद्धांतों का पालन करते हुए दोनों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला इस बात को दर्शाता है कि अदालत प्रत्येक आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों का अलग-अलग मूल्यांकन करती है और केवल आरोप के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

शराबबंदी कानून के तहत सख्त संदेश

बिहार में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। इसके बाद से राज्य में अवैध शराब निर्माण, परिवहन, भंडारण और बिक्री के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।

सरकार और प्रशासन का दावा है कि शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए विशेष अदालतों, उत्पाद विभाग और पुलिस प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

भागलपुर की अदालत द्वारा सुनाया गया यह फैसला भी शराब तस्करी और अवैध शराब कारोबार में शामिल लोगों के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

अभियोजन पक्ष ने रखे मजबूत तर्क

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक भोला कुमार मंडल ने अदालत के समक्ष विस्तृत बहस प्रस्तुत की। उन्होंने जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा।

अभियोजन पक्ष की टीम में अधिवक्ता राजेंद्र कुमार, रविरंजन कुमार और पिंटू कुमार सिंह भी शामिल रहे, जिन्होंने मामले की सुनवाई के दौरान सहयोग किया।

कानूनी जानकारों के अनुसार किसी भी आपराधिक मुकदमे में प्रभावी पैरवी और साक्ष्यों की सही प्रस्तुति न्यायालय के निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस मामले में भी अभियोजन पक्ष ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध करने में सफलता प्राप्त की।

कानून के पालन की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला

भागलपुर की विशेष उत्पाद अदालत का यह निर्णय बिहार में शराबबंदी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसलों से कानून का डर बढ़ता है और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलती है। साथ ही यह संदेश भी जाता है कि न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय देने के लिए प्रतिबद्ध है।

शराबबंदी कानून के तहत आए इस फैसले को भागलपुर सहित पूरे बिहार में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह अवैध शराब कारोबार के खिलाफ चल रहे अभियान को और मजबूती प्रदान करता है।

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