भागलपुर से लापता केशव का 10 दिन बाद भी सुराग नहीं, इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे मां-पिता, SSP से लगाई गुहार

भागलपुर। बिहार के भागलपुर में कानून-व्यवस्था और पुलिसिया सक्रियता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ईशाकचक थाना क्षेत्र से लापता हुए 16 वर्षीय किशोर केशव कुमार को गायब हुए आज पूरे 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। शनिवार, 25 अप्रैल 2026 की सुबह तक केशव का कोई सुराग न मिलना न केवल ईशाकचक पुलिस की विफलता को दर्शाता है, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार के उजड़ते अरमानों की कड़वी कहानी भी बयां कर रहा है। न्याय की आस में दर-दर की ठोकरें खाने के बाद, हताश और परेशान माता-पिता ने अब भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय का दरवाजा खटखटाया है। अपनी आंखों में आंसू और हाथ में बेटे की तस्वीर लिए ये माता-पिता अब केवल एक ही सवाल पूछ रहे हैं— “क्या सुरक्षित समाज में एक बच्चा सुबह टहलने भी नहीं जा सकता?” पुलिस के आश्वासनों और फाइलों के बीच केशव की तलाश कहीं गुम होती नजर आ रही है, जिसने पूरे जिले में किशोरों की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

15 अप्रैल की वो मनहूस सुबह: जब घर से निकला और फिर नहीं लौटा

​घटनाक्रम की शुरुआत 15 अप्रैल 2026 की तड़के हुई थी। ईशाकचक थाना क्षेत्र के इंद्रप्रस्थ कॉलोनी निवासी मुकेश कुमार का पुत्र केशव कुमार हर रोज की तरह सुबह करीब 5 बजे नींद से जागा। उसने अपने माता-पिता से कहा कि वह ताजी हवा लेने और टहलने के लिए बायपास की ओर जा रहा है। घर से निकलते समय उसके चेहरे पर वही चिर-परिचित मुस्कान थी, जो अब परिजनों की यादों में कैद होकर रह गई है। केशव ने परिजनों को आश्वस्त किया था कि वह थोड़ी देर में वापस लौट आएगा, लेकिन वह सुबह कभी वापस नहीं आई।

​जब सूरज चढ़ने लगा और केशव वापस नहीं लौटा, तो परिजनों की धड़कनें बढ़ने लगीं। शुरुआत में उन्होंने सोचा कि शायद वह किसी दोस्त के पास रुक गया होगा, लेकिन जब उसका मोबाइल फोन मिलाया गया, तो वह स्विच्ड ऑफ (बंद) आ रहा था। इसके बाद शुरू हुआ तलाश का वह सिलसिला जो अब तक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। मोहल्ले से लेकर बायपास की गलियों और अस्पतालों से लेकर रेलवे स्टेशनों तक, परिजनों ने हर जगह खाक छानी, लेकिन केशव का कहीं कोई पता नहीं चला।

मेधावी छात्र और 84% का गौरव: आखिर क्या हुआ केशव के साथ?

​केशव केवल एक किशोर नहीं था, बल्कि वह अपने परिवार का भविष्य और इंद्रप्रस्थ कॉलोनी का एक होनहार छात्र था। परिजनों के अनुसार, केशव पढ़ाई में बेहद मेधावी था। अभी हाल ही में उसने सीबीएसई (CBSE) की दसवीं बोर्ड परीक्षा में 84% अंक हासिल किए थे। उसकी इस सफलता से घर में उत्सव का माहौल था और वह आगे की पढ़ाई के लिए बड़े सपने देख रहा था।

​एक ऐसा बच्चा जो अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर इतना सजग हो, उसका अचानक लापता हो जाना कई गहरे संदेह पैदा करता है। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि केशव किसी भी तरह के तनाव या गलत संगत में नहीं था। बोर्ड परीक्षा के बेहतर परिणाम ने उसे नई ऊर्जा दी थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या केशव किसी अपहरणकर्ता गिरोह का शिकार हो गया? या फिर बायपास की सूनी सड़कों पर उसके साथ कोई अनहोनी घट गई? मोबाइल का बंद होना इस बात की ओर प्रबल संकेत करता है कि यह केवल स्वेच्छा से घर छोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे किसी गहरी साजिश या आपराधिक कृत्य की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

ईशाकचक पुलिस की ‘सुस्ती’ और परिजनों का आक्रोश

​केशव के लापता होने के तुरंत बाद पिता मुकेश कुमार ने ईशाकचक थाने में मामला दर्ज कराया था। नियमानुसार, एक नाबालिग (किशोर) के लापता होने पर पुलिस को तुरंत ‘रेड अलर्ट’ मोड में आना चाहिए था, लेकिन परिजनों का आरोप है कि शुरुआती दिनों में पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। 10 दिन का समय किसी भी जांच के लिए बहुत लंबा होता है, खासकर तब जब किसी बच्चे की जान खतरे में हो सकती है।

​परिजनों का कहना है कि वे बार-बार थाने के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें केवल “जांच चल रही है” जैसा रटा-रटाया जवाब मिलता रहा। पुलिस न तो अब तक केशव के मोबाइल की लास्ट लोकेशन को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दे पाई है और न ही बायपास क्षेत्र के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से कोई सुराग निकाल सकी है। पुलिस की इसी सुस्ती और उदासीनता ने परिवार के धैर्य का बांध तोड़ दिया, जिसके बाद उन्हें मजबूरन एसएसपी कार्यालय की शरण लेनी पड़ी।

एसएसपी कार्यालय में गुहार: मां की सिसकियां और पिता की बेबसी

​शुक्रवार को भागलपुर एसएसपी कार्यालय का नजारा बेहद भावुक था। केशव की मां रश्मि कुमारी का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी आंखों के आंसू सूख चुके हैं और वे केवल अपने बेटे का नाम पुकार रही हैं। रश्मि कुमारी ने नम आंखों से अधिकारियों से कहा, “मेरा बेटा बहुत सीधा है, उसने कभी किसी का बुरा नहीं किया। वह तो बस टहलने गया था, क्या उसे वापस लाना पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है?” मां की यह मार्मिक पुकार वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को झकझोर रही थी।

​पिता मुकेश कुमार ने वरीय पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि हर गुजरता पल उनकी उम्मीदों को तोड़ रहा है। 10 दिन बीत जाने के बाद भी अगर पुलिस अंधेरे में तीर चला रही है, तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या होगा? एसएसपी ने परिजनों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि पुलिस केशव को ढूंढने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। एसएसपी ने विशेष टीम को निर्देश दिए हैं कि इस मामले में तकनीकी अनुसंधान को तेज किया जाए और बायपास क्षेत्र के संदिग्धों से पूछताछ की जाए।

बायपास क्षेत्र: सुरक्षा पर उठते सवाल

​भागलपुर का बायपास क्षेत्र, जहाँ केशव टहलने गया था, सुबह और शाम के समय टहलने वालों के लिए एक प्रमुख स्थान है। लेकिन केशव के लापता होने की घटना ने इस क्षेत्र की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। क्या इस क्षेत्र में पुलिस की गश्ती केवल कागजों पर होती है? सुबह के समय जब बड़ी संख्या में छात्र और नागरिक सड़कों पर होते हैं, तब असामाजिक तत्वों का वहां सक्रिय होना पुलिस की विफलता है। स्थानीय नागरिकों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर एक होनहार छात्र इस तरह गायब हो जाता है, तो कल को कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।

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