भागलपुर | 22 फरवरी, 2026: भागलपुर के टीचर ट्रेनिंग महाविद्यालय (टीटी कॉलेज) के प्रांगण में रविवार को एक भव्य ‘शिक्षक सम्मान समारोह’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन शिक्षकों के जज्बे को सलाम करना और उन्हें सम्मानित करना था, जो पारंपरिक शिक्षा पद्धति से इतर नई तकनीकों और नवाचार (Innovation) के माध्यम से बच्चों के भविष्य को संवार रहे हैं।
शिक्षा में नवाचार: जब ‘मोबाइल’ बना गुरु
समारोह में “मेरा मोबाइल, मेरी शिक्षा” पहल की विशेष सराहना की गई। इस डिजिटल मुहिम के तहत शिक्षक स्मार्ट उपकरणों का उपयोग कर कठिन विषयों को आसान और रोचक बना रहे हैं।
- डिजिटल लर्निंग: शिक्षकों द्वारा तैयार किए गए वीडियो और डिजिटल कंटेंट के जरिए बच्चे जटिल सिद्धांतों को एनिमेशन के माध्यम से समझ रहे हैं।
- सोशल मीडिया का उपयोग: क्लास में कराई जाने वाली गतिविधियों को यूट्यूब और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाता है, ताकि बच्चे घर पर भी उसका अभ्यास कर सकें।
कबाड़ से जुगाड़: शैक्षणिक मॉडलों की प्रदर्शनी
समारोह का एक मुख्य आकर्षण शिक्षकों द्वारा कागज के टुकड़ों, कार्डबोर्ड और बेकार पड़ी सामग्रियों से तैयार किए गए शैक्षणिक मॉडल (TLM) की प्रदर्शनी रही।
- दृश्य शिक्षण: प्रदर्शनी में विज्ञान, गणित और भाषा को समझाने के लिए कई जीवंत मॉडल पेश किए गए।
- रचनात्मकता: इन मॉडलों के निर्माण में शिक्षकों के साथ-साथ बच्चों की मेहनत और रचनात्मक सोच भी साफ झलक रही थी।
शिक्षिका अर्चना मिश्रा का संदेश: “बोझ नहीं, खेल है पढ़ाई”
सम्मानित होने वाली शिक्षकों में शामिल अर्चना मिश्रा ने अपनी शिक्षण पद्धति को साझा करते हुए बताया कि बच्चों के लिए शिक्षा को बोझ नहीं, बल्कि एक आनंदमयी गतिविधि बनाना उनका लक्ष्य है।
”हमारा प्रयास है कि बच्चे खेल-खेल में सीखें। जब हम किसी गतिविधि को सोशल मीडिया पर डालते हैं, तो बच्चे उसे बार-बार देखते हैं और उनका जुड़ाव पढ़ाई से बढ़ जाता है। कक्षा की हर गतिविधि को एक उत्सव की तरह मनाया जाना चाहिए।”
उद्देश्य और भविष्य की राह
कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि ऐसे समारोहों से शिक्षकों के भीतर छिपी रचनात्मक ऊर्जा को पहचान मिलती है। इससे अन्य शिक्षक भी प्रेरित होते हैं कि वे कक्षा में बच्चों को जोड़ने के लिए नए प्रयोग करें। जिला शिक्षा विभाग का मानना है कि नवाचार ही वह माध्यम है जिससे सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को निजी स्कूलों के समकक्ष लाया जा सकता है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


