भक्ति में डूबा भागलपुर: मां काली की आराधना में उमड़ा जनसैलाब, आज रात निकलेगी प्रतिमाओं की शोभायात्रा

भागलपुर | 22 अक्टूबर 2025: जुल्मी काली, जंगली काली, मशानी काली, बम काली… नाम भले अलग हों, लेकिन भाव एक ही — मां के प्रति अटूट श्रद्धा का। दीपावली के बाद भागलपुर में मंगलवार को मां काली की आराधना का पर्व पूरे भव्यता और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। शहर के काली मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हर गली, हर चौक भक्ति की ध्वनि से गूंजता रहा। देर रात तक मां काली के जयघोष और ढाक-ढोल की थाप पर भक्त झूमते रहे।

आज देर रात निकलेगी काली विसर्जन शोभायात्रा

बुधवार की रात से शुरू होगी भागलपुर की बहुप्रतीक्षित काली विसर्जन शोभायात्रा
करीब 80 प्रतिमाएं शहर की सड़कों से होकर विसर्जन स्थल तक पहुंचेंगी।
पूरे शहर में सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण, रोशनी और पेयजल की विशेष व्यवस्था की है।

काली विसर्जन अब सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भागलपुर की पहचान बन चुका है।
यह आयोजन अब सामूहिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बन गया है।

काली मंदिरों में दिनभर चला दर्शन-पूजन

मंगलवार को परबत्ती, इशाकचक, बुढ़ानाथ रोड, गुड़हट्टा, नाथनगर, हबीबपुर, ललमटिया, जोगसर और तिलकामांझी के काली मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
कहीं भक्ति गीतों की धुन बजी, तो कहीं मां काली की आरती में पूरा परिवार शामिल दिखा।
मंदिरों के बाहर सजे मेलों में महिलाओं और बच्चों की चहल-पहल देखने लायक थी।
चाट-पकौड़ी, खिलौने और झूले की दुकानों पर रौनक देर रात तक बनी रही।

बंगाल की परंपरा के साथ हुआ कालीबाड़ी मंदिर में पूजन

कालीबाड़ी मंदिर में बंगाल की विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना संपन्न हुई।
सैतिया (बंगाल) से आए पंडित देवाशीष मुखर्जी ने पारंपरिक बंग्ला विधि से मां की आराधना कराई।
बंगाली समाज की महिलाओं ने लाल-पीले पारंपरिक परिधान में मां काली को फल, खिचड़ी, पांच प्रकार की भुजिया, चटनी, खीर और सब्जी का भोग लगाया।

इशाकचक के बुढ़िया काली मंदिर में तारापीठ जैसा दृश्य

इशाकचक के बुढ़िया काली मंदिर में इस बार पंडाल को पश्चिम बंगाल के तारापीठ मंदिर की तर्ज पर सजाया गया।
यहां सोमवार की मध्यरात्रि में प्रतिमा स्थापित हुई और पारंपरिक रूप से पाठा (बकरे) की बलि दी गई।
पूरी रात जागरण और भक्ति संगीत के आयोजन से माहौल भक्तिमय रहा।
स्थानीय कलाकारों ने मां काली के भक्ति गीतों से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आज दोपहर विदाई पूजन, फिर शोभायात्रा

बुधवार दोपहर चार बजे से पहले मां काली को दही-चूड़ा का भोग लगाकर भक्त विदाई पूजन करेंगे।
इसके बाद विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी जो देर रात तक चलेगी।
सड़कों पर ध्वज-पताका, जयकारे, डीजे और पारंपरिक संगीत की गूंज से पूरा शहर देवी भक्ति में सराबोर रहेगा।

प्रशासन अलर्ट मोड पर

काली विसर्जन शोभायात्रा के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने विशेष सुरक्षा योजना बनाई है।
पुलिस, होमगार्ड और सिविल डिफेंस की टीमें तैनात रहेंगी।
ड्रोन कैमरे से निगरानी होगी, वहीं नगर निगम ने विसर्जन मार्गों पर अतिरिक्त रोशनी और सफाई की व्यवस्था की है।


काली पूजा और विसर्जन सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि भागलपुर की आत्मा का हिस्सा बन चुका है।
जब मां काली की प्रतिमाएं जयघोष के साथ सड़कों पर निकलती हैं, तो पूरा शहर भक्ति, ऊर्जा और एकता की शक्ति से भर उठता है।


 

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