भागलपुर। सबौर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चांयचक कालीघाट और ममलखा में गंगा नदी का भयंकर कटाव लगातार जारी है। बुधवार की सुबह इस कटाव ने भयावह रूप ले लिया जब हनुमान मंदिर और एक प्राचीन विशाल पीपल का पेड़ पूरी तरह से गंगा की धारा में समा गए।
मंगलवार से ही था खतरे का संकेत
मंगलवार को ही क्षेत्र में मिट्टी का कटाव शुरू हो गया था और पेड़ की जड़ें पूरी तरह उजागर हो गई थीं। ग्रामीणों ने तब से ही आशंका जताई थी कि यह इलाका जल्द ही नदी में समा जाएगा। बुधवार तड़के जब लोग बाहर निकले, तो देखा कि मंदिर और पेड़ दोनों गंगा में समा चुके हैं।
सड़क, बिजली खंभे, तार भी बह गए
गंगा की धारा इतनी तेज थी कि लगभग 200 फीट पीसीसी सड़क, बिजली के खंभे और तार भी ध्वस्त हो गए। चांयचक के समीप आधा दर्जन से अधिक घर अब खतरे की जद में आ चुके हैं। गंगा का पानी गांव की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है।
कटाव रोकने की कोशिशें नाकाम
फ्लड फाइटिंग विभाग ने बांस-बल्लियों और बालू की बोरियों से कटाव को रोकने का प्रयास किया, लेकिन तेज जलधारा के आगे यह प्रयास सफल नहीं हो सके। बोरियां पानी में बह गईं और कटाव का क्षेत्र और भी बड़ा हो गया।
विभाग की प्रतिक्रिया
एसडीओ राजीव रंजन, फ्लड फाइटिंग विभाग, ने बताया कि:
“चांयचक कालीघाट, ममलखा क्षेत्र में कटाव निरोधी कार्य युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। हालांकि, गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के कारण कटाव रोकना बेहद कठिन हो गया है।”
बाढ़ का पानी निचले इलाकों में घुसा
गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण प्रखंड क्षेत्र के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। एनएच-80 सड़क के किनारे तक भी पानी पहुंच चुका है, जिससे यातायात और सुरक्षा को लेकर भी खतरा मंडराने लगा है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल स्थायी कटाव निरोधी कार्य और पुनर्वास की व्यवस्था की मांग की है। कई लोगों ने कहा कि हर साल ऐसे हालात बनते हैं, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई केवल अस्थायी उपायों तक सीमित रह जाती है।


