भागलपुर में बाढ़ सुरक्षा कार्यों का जायजा लेने पहुंचे जल संसाधन विभाग के सचिव, तटबंध कार्यों में तेजी के निर्देश

भागलपुर जिले में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित कटाव को देखते हुए बाढ़ सुरक्षा कार्यों को लेकर प्रशासनिक सक्रियता तेज हो गई है। इसी क्रम में बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने शनिवार को भागलपुर जिले के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य तटबंध सुरक्षा, कटाव निरोधक उपायों और बाढ़ से बचाव के लिए चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना था। इस दौरान अधिकारियों और अभियंताओं को कार्य की गुणवत्ता बनाए रखते हुए तय समयसीमा के भीतर सभी योजनाओं को पूरा करने के निर्देश दिए गए।

सचिव ने सबसे पहले इस्माईलपुर–बिंदटोली तटबंध क्षेत्र का निरीक्षण किया, जहां गंगा नदी के बाएं तट पर कटाव रोकने के लिए बड़े स्तर पर सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र को लंबे समय से बाढ़ और कटाव के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। हर वर्ष मानसून के दौरान गंगा का दबाव बढ़ने से तटबंधों पर खतरा मंडराने लगता है, जिससे आसपास के गांवों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन जाती है। इसी कारण इस बार प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता दी है।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने स्पर संख्या 07 से 09 के बीच चल रहे कटाव निरोधक कार्यों की प्रगति का विस्तृत जायजा लिया। अधिकारियों ने उन्हें मौके पर कार्य की वर्तमान स्थिति, संसाधनों की उपलब्धता और निर्माण की गति से अवगत कराया। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि तटबंध को मजबूत करने के लिए बोल्डर एप्रन, स्लोप पिचिंग और अन्य संरचनात्मक उपायों पर तेजी से काम चल रहा है। सचिव ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि निर्माण सामग्री की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।

सचिव ने कहा कि बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि तटबंधों की मजबूती केवल कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर दिखाई देनी चाहिए। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग और तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य में गति और गुणवत्ता दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

इसके बाद सचिव ने रंगरा प्रखंड अंतर्गत ज्ञानीदास–झल्लूदास क्षेत्र का दौरा किया। यह इलाका भी गंगा नदी के कटाव से प्रभावित माना जाता है, जहां ग्रामीण लंबे समय से नदी कटाव की समस्या झेल रहे हैं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने वहां चल रहे कटाव निरोधक कार्यों का बारीकी से अवलोकन किया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बोल्डरों का पर्याप्त भंडारण हर समय उपलब्ध रहे ताकि कार्य बाधित न हो।

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि इस परियोजना के तहत लगभग 1394 मीटर लंबाई में बोल्डर एप्रन और स्लोप पिचिंग का कार्य प्रस्तावित है। यह संरचना नदी के दबाव को कम करने और किनारों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार पूरा हो जाता है, तो आसपास के गांवों को कटाव और संभावित बाढ़ से बड़ी राहत मिल सकती है।

सचिव ने मौके पर मौजूद अभियंताओं को निर्देश दिया कि वे कार्यस्थल पर नियमित कैंप करें और निर्माण कार्य की लगातार निगरानी करें। उनका कहना था कि केवल औपचारिक निरीक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर निरंतर उपस्थिति से कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित होती है। उन्होंने अभियंताओं से कहा कि हर चरण पर तकनीकी निरीक्षण किया जाए ताकि बाद में किसी प्रकार की संरचनात्मक कमजोरी सामने न आए।

गोपालपुर प्रखंड में स्थित इस्माईलपुर–बिंदटोली तटबंध का निरीक्षण इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। यहां गंगा नदी के बाएं किनारे पर स्पर-8 से स्पर-9 के बीच कटाव निरोधक कार्य युद्धस्तर पर जारी है। यह क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है क्योंकि तेज जलधारा सीधे तटबंध पर दबाव बनाती है।

अधिकारियों ने बताया कि इस हिस्से में लगभग 740 मीटर क्षेत्र में बोल्डर एप्रन, बोल्डर स्लोप पिचिंग और बांध के टो क्षेत्र में शीट पाइल लगाने का कार्य किया जा रहा है। शीट पाइल तकनीक का उपयोग तटबंध की नींव को अतिरिक्त मजबूती देने के लिए किया जाता है, जिससे तेज धारा के बावजूद संरचना स्थिर बनी रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक कटाव रोकने में प्रभावी साबित होती है।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने कार्य की गति बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि बोल्डर की आपूर्ति लगातार जारी रहनी चाहिए और श्रमिकों की संख्या बढ़ाई जाए। साथ ही मशीनों की उपलब्धता भी बढ़ाने को कहा गया ताकि कार्य दिन-रात जारी रह सके। उनका कहना था कि मानसून के सक्रिय चरण में प्रवेश से पहले सुरक्षा कार्यों का पूरा होना बेहद आवश्यक है।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि सभी कार्यों को अगले 15 दिनों के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए। समयसीमा को लेकर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी तरह की देरी सीधे प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा को जोखिम में डाल सकती है। इसलिए सभी विभागों के बीच समन्वय बनाए रखते हुए तेजी से काम करना जरूरी है।

स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह निरीक्षण उम्मीद लेकर आया है। लंबे समय से कटाव और बाढ़ की आशंका के बीच रहने वाले लोगों को उम्मीद है कि इन सुरक्षात्मक उपायों के पूरा होने के बाद उनकी चिंता काफी हद तक कम होगी। हर वर्ष गंगा के जलस्तर में वृद्धि के साथ तटवर्ती गांवों में भय का माहौल बन जाता है, लेकिन इस बार प्रशासन की सक्रियता लोगों में भरोसा जगा रही है।

भागलपुर प्रशासन और जल संसाधन विभाग का मानना है कि समय रहते किए जा रहे ये सुरक्षात्मक कार्य आगामी मानसून में बड़े नुकसान को रोकने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि सभी परियोजनाएं तय समयसीमा और गुणवत्ता मानकों के साथ पूरी हो जाती हैं, तो हजारों लोगों की आबादी को बाढ़ और कटाव के खतरे से सुरक्षित किया जा सकेगा। फिलहाल विभाग की प्राथमिकता यही है कि सभी संवेदनशील स्थलों पर सुरक्षा कार्य बिना किसी बाधा के तेजी से पूरे किए जाएं।

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