
भागलपुर जिले में मानसून के सक्रिय होने के साथ ही बाढ़ और नदी कटाव से प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसी क्रम में बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने जिले के संवेदनशील इलाकों का दौरा कर बाढ़ सुरक्षा एवं तटबंध संरक्षण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को समयबद्ध तथा गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्य पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। सचिव का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब गंगा नदी के जलस्तर में धीरे-धीरे वृद्धि दर्ज की जा रही है और तटवर्ती क्षेत्रों में कटाव की आशंका बढ़ रही है।
जल संसाधन विभाग द्वारा भागलपुर जिले के कई संवेदनशील इलाकों में पहले से ही बाढ़ सुरक्षा और कटाव निरोधक कार्य चलाए जा रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि समय रहते सुरक्षात्मक उपायों को मजबूत कर संभावित नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। सचिव के निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य इन्हीं परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति को समझना और निर्माण कार्य की गति बढ़ाना था।
निरीक्षण के दौरान सचिव ने सबसे पहले इस्माईलपुर–बिंदटोली तटबंध क्षेत्र का दौरा किया। यह इलाका लंबे समय से गंगा नदी के दबाव और कटाव की समस्या से जूझता रहा है। हर वर्ष मानसून के दौरान नदी की तेज धारा तटबंधों पर दबाव बनाती है, जिससे आसपास के गांवों में खतरे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसी कारण इस क्षेत्र को बाढ़ सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
सचिव ने इस्माईलपुर–बिंदटोली तटबंध के स्पर संख्या 07 से 09 के बीच चल रहे सुरक्षात्मक कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया। अधिकारियों ने उन्हें निर्माण कार्य की प्रगति, उपयोग की जा रही सामग्री और मौजूदा चुनौतियों की जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि तटबंध को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर बोल्डर एप्रन, स्लोप पिचिंग और अतिरिक्त संरचनात्मक सुरक्षा उपायों पर कार्य किया जा रहा है।
इसके बाद सचिव ने ज्ञानीदास–झल्लूदास गांव का दौरा किया, जहां गंगा नदी के कटाव से बचाव के लिए विशेष परियोजना पर काम चल रहा है। भागलपुर जिले के रंगरा प्रखंड अंतर्गत स्थित यह क्षेत्र कटाव की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। स्थानीय ग्रामीण वर्षों से नदी कटाव के खतरे का सामना करते रहे हैं, जिससे खेती योग्य भूमि और आवासीय क्षेत्रों पर लगातार संकट बना रहता है।
ज्ञानीदास–झल्लूदास में निरीक्षण के दौरान सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि निर्माण कार्य में प्रयुक्त होने वाले बोल्डरों की पर्याप्त उपलब्धता हर समय सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि क्रेट और अन्य आवश्यक निर्माण सामग्री का भंडारण पर्याप्त मात्रा में किया जाए ताकि कार्य के दौरान किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। उनका मानना था कि निर्माण सामग्री की कमी कई बार परियोजनाओं में देरी का प्रमुख कारण बनती है।
उन्होंने मौके पर मौजूद अभियंताओं को निर्देश दिया कि वे कार्यस्थल पर नियमित रूप से कैंप करें और निर्माण कार्य की निरंतर निगरानी करें। सचिव ने कहा कि केवल कागजी प्रगति रिपोर्ट पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर मौजूद रहकर गुणवत्ता की निगरानी करना अधिक आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि ज्ञानीदास–झल्लूदास क्षेत्र में गंगा नदी के बाएं तट पर लगभग 1394 मीटर लंबाई में बोल्डर एप्रन और स्लोप पिचिंग का कार्य प्रस्तावित है। यह संरचना नदी की तेज धारा के दबाव को कम करने और तट की स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह परियोजना समय पर पूरी हो जाती है तो आसपास के गांवों को कटाव और बाढ़ से बड़ी राहत मिल सकती है।
सचिव का अगला निरीक्षण गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत गंगा नदी के बाएं किनारे स्थित इस्माईलपुर–बिंदटोली तटबंध के उस हिस्से में हुआ, जहां स्पर-8 से स्पर-9 के बीच कटाव निरोधक कार्य चल रहा है। यह क्षेत्र वर्तमान में सबसे संवेदनशील स्थानों में गिना जा रहा है, क्योंकि यहां नदी की धारा सीधे तटबंध पर प्रभाव डालती है।
निरीक्षण के दौरान सचिव ने निर्माण कार्य की गति पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने पाया कि कार्य जारी है, लेकिन मानसून की स्थिति को देखते हुए इसे और तेज करने की आवश्यकता है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि बोल्डर की आपूर्ति बिना किसी रुकावट जारी रखी जाए। साथ ही श्रमिकों की संख्या बढ़ाने और अतिरिक्त मशीनें लगाने का निर्देश भी दिया गया ताकि कार्य दिन-रात जारी रखा जा सके।
अधिकारियों के अनुसार इस हिस्से में स्पर-8 से स्पर-9 के बीच लगभग 740 मीटर क्षेत्र में बोल्डर एप्रन और बोल्डर स्लोप पिचिंग का कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त बांध के टो (Toe) क्षेत्र में शीट पाइल लगाने का प्रावधान भी किया गया है। शीट पाइल तकनीक तटबंध की नींव को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करती है और तेज धारा के दौरान कटाव को नियंत्रित करने में बेहद प्रभावी मानी जाती है।
सचिव ने इस परियोजना को अत्यधिक प्राथमिकता वाला बताते हुए इसे 15 दिनों के भीतर हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ तो मानसून के दौरान खतरा बढ़ सकता है। इसलिए सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर युद्धस्तर पर कार्य करना जरूरी है।
स्थानीय ग्रामीणों ने भी सचिव के निरीक्षण को सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि हर वर्ष गंगा के जलस्तर में वृद्धि के साथ भय का माहौल बन जाता है। यदि तटबंध सुरक्षा कार्य समय पर पूरे हो जाते हैं तो हजारों लोगों को राहत मिल सकती है।
भागलपुर में चल रहे ये बाढ़ सुरक्षा और कटाव निरोधक कार्य इस बात का संकेत हैं कि प्रशासन इस वर्ष संभावित बाढ़ संकट को लेकर पहले से सतर्क है। जल संसाधन विभाग की प्राथमिकता स्पष्ट है—तटबंधों को मजबूत बनाना, कटाव रोकना और तटवर्ती गांवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। यदि सभी परियोजनाएं तय समयसीमा और गुणवत्ता मानकों के अनुसार पूरी होती हैं, तो आने वाले मानसून में भागलपुर के कई संवेदनशील क्षेत्रों को बड़े नुकसान से बचाया जा सकेगा।


