
भागलपुर। भीषण गर्मी और पछुआ हवाओं के चलते बिहार में आगजनी की बढ़ती घटनाओं के बीच भागलपुर जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग द्वारा चलाया गया सात दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। पिछले एक सप्ताह से जिले के हर कोने—चाहे वह तंग गलियां हों, बड़े शैक्षणिक संस्थान हों या फिर औद्योगिक परिसर—में ‘अग्नि सुरक्षा’ का शंखनाद गूँज रहा था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि आम नागरिकों को एक ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ (प्रथम उत्तरदाता) के रूप में तैयार करना था। अभियान के समापन के अवसर पर जिले के विभिन्न हिस्सों में वृहद स्तर पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जहाँ धुएं और आग के बीच खुद को और अपनों को बचाने की बारीकियों का जीवंत प्रदर्शन हुआ। डिविजनल कमांडेंट सह जिला अग्निशमन पदाधिकारी संजय कुमार की देखरेख में चले इस अभियान ने भागलपुर के नागरिकों के भीतर सुरक्षा के प्रति एक नई चेतना जागृत की है।
सात दिनों का सफर: स्कूल से उद्योगों तक पहुँची ‘सतर्कता’
अग्नि सुरक्षा सप्ताह के तहत आयोजित इस सात दिवसीय अभियान का खाका बेहद विस्तृत था। इसकी शुरुआत 15 अप्रैल को हुई थी, जिसके बाद से ही अग्निशमन विभाग की टीमें सक्रिय मोड में थीं। अभियान के दौरान जिले के नामचीन स्कूलों, कॉलेजों और विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्रों जैसे बरारी इंडस्ट्रियल एरिया और नाथनगर के बुनकर क्षेत्रों को कवर किया गया।
संजय कुमार ने बताया कि औद्योगिक संस्थानों में आग लगने का खतरा सबसे अधिक होता है क्योंकि वहां भारी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ और बिजली के उपकरणों का निरंतर उपयोग होता है। इसी तरह, स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सात दिनों के इस सफर में विभाग ने केवल भाषणबाजी नहीं की, बल्कि धरातल पर उतरकर फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमन यंत्र) चलाने, रेत और पानी के सही उपयोग और गैस सिलेंडर में लगी आग को बुझाने के व्यावहारिक तरीके सिखाए। समापन समारोह में भागलपुर के सैकड़ों नागरिक इस बात के साक्षी बने कि कैसे एक छोटी सी सावधानी किसी बड़े हादसे को टाल सकती है।
मॉक ड्रिल: वास्तविक संकट का आभासी अनुभव
अभियान के समापन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘मॉक ड्रिल’ रहा। शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों और शैक्षणिक संस्थानों में आग लगने की कृत्रिम स्थिति पैदा की गई। सायरन की आवाज के साथ जैसे ही अग्निशमन दस्ता पहुँचा, लोगों को यह दिखाया गया कि जब तक दमकल की गाड़ी नहीं पहुँचती, तब तक शुरुआती 5 से 10 मिनट कैसे जीवन रक्षक साबित हो सकते हैं।
मॉक ड्रिल के दौरान यह प्रदर्शित किया गया कि यदि रसोई में गैस सिलेंडर में आग लग जाए, तो घबराने के बजाय गीले बोरे या चादर का उपयोग कर ऑक्सीजन की सप्लाई कैसे काटी जाती है। इसके अलावा, बहुमंजिला इमारतों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने (Evacuation) की प्रक्रिया का भी अभ्यास कराया गया। संजय कुमार ने जोर देकर कहा कि “आग लगने की स्थिति में समय ही सबसे बड़ा दुश्मन या सबसे बड़ा दोस्त होता है।” अगर लोग घबराकर इधर-उधर भागने के बजाय धैर्य से काम लें, तो 90 प्रतिशत मामलों में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है। मॉक ड्रिल को देखकर उपस्थित लोगों ने माना कि किताबों में पढ़ने से कहीं अधिक प्रभावी आँखों के सामने किया गया यह प्रदर्शन रहा।
रचनात्मकता के जरिए संदेश: निबंध और क्विज का सहारा
जागरूकता को केवल प्रदर्शनों तक सीमित न रखते हुए इसे बच्चों के मानस पटल पर अंकित करने के लिए कई प्रतियोगिताओं का भी सहारा लिया गया। जिले के विभिन्न स्कूलों में ‘अग्नि सुरक्षा और हमारा दायित्व’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता, पोस्टर मेकिंग और क्विज का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों ने यह समझा कि बिजली के शॉर्ट सर्किट से लेकर खेत-खलिहानों में जलती बीड़ी-सिगरेट छोड़ने तक की छोटी गलतियां कितनी भारी पड़ सकती हैं।
अभियान के दौरान शहर की दीवारों पर भी वॉल पेंटिंग (भित्ति चित्र) बनाई गईं, जो अब राहगीरों को ‘अग्नि सुरक्षा’ के प्रति सचेत करती रहेंगी। संजय कुमार का मानना है कि जब कोई बच्चा स्कूल में आग से बचाव का तरीका सीखता है, तो वह उसे अपने पूरे परिवार तक पहुँचाता है। समापन कार्यक्रम में इन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया, जिससे युवाओं में सुरक्षा के प्रति एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित हुई है।
गर्मियों की चुनौती और अग्निशमन विभाग की तैयारी
समापन सत्र को संबोधित करते हुए जिला अग्निशमन पदाधिकारी संजय कुमार ने भागलपुर की भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों पर विशेष चर्चा की। उन्होंने कहा कि अप्रैल से जून तक का समय बिहार के लिए अग्नि के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील होता है। इस दौरान पछुआ हवाएं आग की एक छोटी सी चिंगारी को भी विकराल रूप दे देती हैं। उन्होंने किसानों से विशेष अपील की कि वे खेतों में खूंटी न जलाएं और खाना बनाने के बाद चूल्हे की आग को पूरी तरह बुझा दें।
संजय कुमार ने भरोसा दिलाया कि भागलपुर का अग्निशमन विभाग आधुनिक संसाधनों से लैस है और सूचना मिलने के कम से कम समय में (Response Time) मौके पर पहुँचने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनता का सहयोग ही इस लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार है। विभाग ने हेल्पलाइन नंबर्स का भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया ताकि आपात स्थिति में लोग तुरंत संपर्क कर सकें।
सुरक्षा के प्रति ‘शून्य सहिष्णुता’: भविष्य की योजना
सात दिवसीय अभियान के समापन के साथ ही विभाग ने भविष्य की कार्ययोजना भी स्पष्ट कर दी है। संजय कुमार ने कहा कि यह केवल एक सप्ताह का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया की शुरुआत है। आने वाले समय में जिले के सभी मॉल, अस्पतालों और अपार्टमेंट्स का ‘फायर ऑडिट’ भी किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वहां सुरक्षा मानक पूरे हैं या नहीं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। समापन के मौके पर उपस्थित अधिकारियों ने लोगों से शपथ दिलवाई कि वे न केवल स्वयं सतर्क रहेंगे, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करेंगे। इस अभियान ने यह साबित कर दिया है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा कवच है।


