- बड़ी खबर: भागलपुर के टाउन हॉल में डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने किया ‘फार्मर रजिस्ट्री’ कार्यक्रम का उद्घाटन; साफ कहा- जिनके नाम जमीन, उन्हें बनवाना होगा ‘किसान कार्ड’।
- अनिवार्य नियम: नौकरीपेशा हो या व्यवसायी, अगर खेती करते हैं तो रजिस्ट्रेशन जरूरी; बिना आईडी न खाद मिलेगी, न पैक्स में धान बेच पाएंगे।
- डेडलाइन: 2 मार्च तक अभियान मोड में होगा काम; बिहार में भागलपुर तीसरे नंबर पर, शिवहर और कटिहार से निकलने की होड़।
द वॉयस ऑफ बिहार (भागलपुर/ब्यूरो)
भागलपुर (Bhagalpur) जिले के किसानों के लिए अब ‘फार्मर आईडी’ (Farmer ID) बनवाना अनिवार्य हो गया है। अगर आपके पास यह आईडी नहीं होगी, तो भविष्य में न तो आपको सरकारी खाद-बीज मिलेगा और न ही आप पैक्स में अपनी फसल बेच पाएंगे। यह सख्त संदेश जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी (Dr. Naval Kishore Chaudhary) ने सोमवार को टाउन हॉल में आयोजित ‘फार्मर रजिस्ट्री एवं ई-केवाईसी उन्मुखीकरण कार्यक्रम’ में दिया।
नौकरी वाले भी बनवाएं कार्ड, अगर जमीन है नाम पर
जिलाधिकारी ने ‘किसान’ की परिभाषा स्पष्ट करते हुए कहा कि चाहे कोई व्यक्ति नौकरी करता हो या व्यवसाय, अगर उसके नाम पर जमीन है, तो सरकार उसे किसान मानती है।
- पहचान: उन्होंने कहा, “आपकी एक पहचान होनी चाहिए और वह पहचान किसान का नंबर (Farmer ID) है। 80 से 85% जनसंख्या कृषि पर आधारित है और जिनके नाम से जमीन है, उन सभी का ई-केवाईसी और किसान रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य है।”
भागलपुर बिहार में तीसरे नंबर पर
डीएम ने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों की फार्मर रजिस्ट्री में भागलपुर पूरे बिहार में चौथे और संख्यात्मक रूप से तीसरे नंबर पर है।
- प्रतिस्पर्धा: उन्होंने बताया कि अभी शिवहर, कटिहार और पूर्णिया जिले भागलपुर से आगे हैं। उन्होंने अधिकारियों और कर्मियों को धन्यवाद देते हुए और मेहनत करने को कहा।
2 मार्च तक ‘मिशन मोड’ में काम
कार्यक्रम में डीएम ने सभी मुखिया, बीडीओ (BDO), सीओ (CO) और कृषि पदाधिकारियों को टीम भावना से काम करने का निर्देश दिया।
- लक्ष्य: उन्होंने 2 मार्च तक अभियान मोड में बचे हुए सभी किसानों का ई-केवाईसी और रजिस्ट्रेशन पूरा करने का आदेश दिया है।
- रणनीति: उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह ने पीएम किसान के अंशदान को 40% से 50% तक ले जाने की अपील की। वहीं, अपर समाहर्ता (राजस्व) दिनेश राम ने वार्ड-वार डेटा तैयार कर काम करने का निर्देश दिया।
इस अवसर पर कहलगांव, नारायणपुर, जगदीशपुर, सन्हौला और सबौर के बीडीओ तथा कई मुखिया ने अपने अनुभव साझा किए।
किसानों के लिए यह कार्ड अब ‘आधार’ जितना ही जरूरी हो गया है।


