भागलपुर, 25 अक्टूबर 2025। बिहार विधानसभा आम निर्वाचन-2025 के मद्देनजर भारत निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों के लिए ए.आई. सृजित या सिंथेटिक प्रचार सामग्री के उपयोग पर नई एडवाइजरी जारी की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रचार में इस्तेमाल होने वाले किसी भी बनावटी या डिजिटल तरीके से तैयार किए गए कंटेंट पर पारदर्शिता अनिवार्य है।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा हाइपर-रियलिस्टिक और ए.आई. सृजित कंटेंट का गलत इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि इस तरह के कंटेंट में “AI-Generated”, “डिजिटली एनहैंस्ड” या “सिंथेटिक कंटेंट” का लेबल स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए, जो डिस्प्ले एरिया का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा कवर करे। ऑडियो कंटेंट के लिए यह लेबल शुरुआती 10 प्रतिशत ड्यूरेशन में होना अनिवार्य है।
एडवाइजरी के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- लेबलिंग और पहचान: हर ए.आई. या सिंथेटिक कंटेंट पर निर्माता की पहचान स्पष्ट रूप से होनी चाहिए।
- गैरकानूनी सामग्री प्रतिबंधित: किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी पहचान, रूप-रंग या आवाज़ का इस्तेमाल करना या उसे गलत तरीके से प्रस्तुत करना गैरकानूनी है।
- त्वरित हटाना: अगर किसी ऑफिशियल पार्टी हैंडल पर ए.आई. या सिंथेटिक कंटेंट में गलत जानकारी पाए जाने पर उसे 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।
- रिकॉर्ड रखना: राजनीतिक दलों को सभी AI-जेनरेटेड कंटेंट का इंटरनल रिकॉर्ड, क्रिएटर की डिटेल और टाइमस्टैम्प सुरक्षित रखना होगा, ताकि आयोग द्वारा मांगे जाने पर वेरिफिकेशन किया जा सके।
निर्वाचन आयोग ने जोर दिया है कि आईटी अधिनियम-2021 और आयोग के पूर्व निर्देशों का पालन करना सभी दलों के लिए अनिवार्य है। यह एडवाइजरी तुरंत प्रभावी होगी और अगले आदेश तक सभी आम और उपचुनावों के दौरान लागू रहेगी।
इस कदम का उद्देश्य चुनावी ईमानदारी और मतदाता के भरोसे को बनाए रखना है, ताकि किसी भी प्रकार की फर्जी या बनावटी जानकारी से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित न हो।


