विक्रमशिला सेतु संकट: अब हर 10 मिनट में मिलेगी गंगा पार करने के लिए नाव; डीएम-एसएसपी ने बरारी और बाबूपुर घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था का लिया जायजा

भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर और नवगछिया के बीच उपजे भीषण परिवहन संकट को दूर करने के लिए जिला प्रशासन अब पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में है। सोमवार, 04 मई 2026 की दोपहर जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने एक बार फिर मोर्चा संभाला और गंगा के विभिन्न घाटों का सघन निरीक्षण किया। प्रशासनिक टीम ने विशेष रूप से बाबूपुर और बरारी घाटों का दौरा किया, जहाँ से महादेवपुर घाट के लिए नाव और जेटी का परिचालन शुरू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के आलोक में, प्रशासन का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि सड़क मार्ग बंद होने के बाद जल मार्ग के जरिए लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने न केवल व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि नावों पर सुरक्षा मानकों की भी कड़ी जांच की। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था एक ‘लाइफलाइन’ के रूप में काम करेगी और इसमें सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

बाबूपुर और बरारी घाटों पर प्रशासनिक दबिश: सुरक्षा मानकों की पड़ताल

​विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 133 के पास स्लैब गिरने की घटना के बाद हजारों लोग गंगा पार करने के लिए नावों पर निर्भर हो गए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा खतरा नावों पर होने वाली ‘ओवरलोडिंग’ (क्षमता से अधिक सवारी) का है। सोमवार को जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी और एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने बाबूपुर और बरारी घाटों पर पहुँचकर सबसे पहले इसी बिंदु पर गौर किया। उन्होंने मौके पर मौजूद नावों और जेटी का निरीक्षण किया और यह देखा कि कहीं नाविक अधिक मुनाफे के चक्कर में लोगों की जान जोखिम में तो नहीं डाल रहे हैं।

​जिलाधिकारी ने स्वयं नावों पर चढ़कर क्षमता के बोर्ड देखे और नाविकों को सख्त चेतावनी दी कि यदि किसी भी नाव पर निर्धारित संख्या से एक भी व्यक्ति अधिक पाया गया, तो नाविक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने वहां तैनात पुलिस बल को निर्देश दिया कि वे कतारबद्ध तरीके से लोगों को नाव पर चढ़ाएं और यह सुनिश्चित करें कि हर यात्री सुरक्षित तरीके से गंगा पार करे। बाबूपुर से महादेवपुर और बरारी से महादेवपुर के बीच का यह जल मार्ग अब भागलपुर की वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था का मुख्य केंद्र बन चुका है।

सुबह 5 से शाम 5 तक निःशुल्क सरकारी सेवा: हर 10 मिनट में मिलेगी नाव

​निरीक्षण के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने राहत भरी घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की ओर से बरारी और बाबूपुर घाटों से महादेवपुर के लिए निःशुल्क सरकारी नाव और जेटी सेवा शुरू कर दी गई है। यह सेवा प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से लेकर संध्या 5:00 बजे तक बिना किसी शुल्क के उपलब्ध रहेगी। जिलाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार की जानकारी देते हुए कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि यात्रियों को घाट पर अधिक समय तक इंतजार न करना पड़े।

​उन्होंने बताया कि सरकार के माध्यम से अतिरिक्त नावों और बड़ी जेटी की व्यवस्था की जा रही है। संभवतः बहुत जल्द ऐसी स्थिति होगी कि हर 5 से 10 मिनट के अंतराल पर एक नाव इन घाटों से रवाना होगी। इससे घाटों पर लगने वाली भीड़ कम होगी और यात्री सुगमता से अपने गंतव्य तक पहुँच सकेंगे। सरकार का लक्ष्य जल मार्ग को इतना प्रभावी बनाना है कि विक्रमशिला सेतु बंद होने का असर आम आदमी की दिनचर्या पर न्यूनतम पड़े। दैनिक मजदूरी करने वाले, छात्र और छोटे व्यापारी इस निःशुल्क सेवा का लाभ उठाकर बिना किसी आर्थिक बोझ के अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे।

निजी नावों के लिए पंजीकरण और किराया निर्धारण अनिवार्य

​सरकारी नावों के अलावा, प्रशासन ने निजी नावों और जेटी के परिचालन को भी हरी झंडी दी है, लेकिन इसके लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जो भी निजी नाविक इस मार्ग पर परिचालन करना चाहते हैं, उन्हें जिला प्रशासन के पास अपना अनिवार्य पंजीकरण (Registration) कराना होगा। बिना पंजीकरण के नाव चलाने वालों को अवैध माना जाएगा और उनकी नाव जब्त कर ली जाएगी।

​सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निजी नावों के लिए किराए की दर जिला प्रशासन द्वारा तय की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में किसी भी यात्री का आर्थिक शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निजी नाव संचालकों को तय दर की सूची अपनी नाव पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी। इसमें यात्रियों के साथ-साथ साइकिल और मोटरसाइकिल जैसे छोटे वाहनों के लिए भी दरें निर्धारित की जाएंगी। प्रशासन की मंशा यह है कि यात्रियों के पास सरकारी और निजी दोनों विकल्प मौजूद रहें, लेकिन दोनों ही स्थितियों में सुरक्षा और पारदर्शिता बनी रहे।

घाटों पर सुविधाओं का अंबार: रोशनी, पेयजल और चिकित्सा शिविर

​जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान घाटों पर उपलब्ध नागरिक सुविधाओं का भी जायजा लिया। चूंकि जल मार्ग का उपयोग सुबह जल्दी और शाम तक होना है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से रोशनी की व्यवस्था सबसे अहम है। जिलाधिकारी के निर्देश पर बरारी और बाबूपुर घाटों पर शक्तिशाली लाइटों और जनरेटर बैकअप का प्रबंध किया गया है।

  1. पेयजल की व्यवस्था: भीषण गर्मी के मौसम को देखते हुए घाटों पर यात्रियों के लिए शुद्ध पेयजल के टैंकर्स और स्टैंड पोस्ट लगाए गए हैं।
  2. चिकित्सा सुविधा: आपातकालीन स्थिति के लिए घाटों पर मेडिकल टीम और एम्बुलेंस की तैनाती की गई है। यदि किसी यात्री की तबीयत बिगड़ती है, तो उसे तुरंत प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
  3. मजिस्ट्रेट और पुलिस बल: सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए प्रत्येक घाट पर मजिस्ट्रेट और पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई है। ये अधिकारी और जवान सुबह से शाम तक घाटों पर मौजूद रहकर व्यवस्था को सुचारू बनाए रखेंगे।

​वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने भी मीडिया से बात करते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि सभी घाटों पर पुलिस की गश्ती बढ़ाई गई है और सादी वर्दी में भी पुलिसकर्मी तैनात हैं ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या असामाजिक तत्वों की पहचान की जा सके। एसएसपी ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है ताकि लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

प्रशासनिक तालमेल: डीडीसी और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति

​इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी और एसएसपी के साथ उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह और कई अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी भी उपस्थित थे। उप विकास आयुक्त को नावों के पंजीकरण और नाविकों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों की इस बड़ी टीम ने घाटों पर पहुँचकर वहां की भौगोलिक चुनौतियों का भी अध्ययन किया। महादेवपुर घाट (हाई लेवल) की ओर जाने वाले जल मार्ग में पानी के बहाव और मिट्टी के कटाव पर भी नजर रखी जा रही है ताकि नावों की ‘लैंडिंग’ सुरक्षित रहे।

​निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि यात्रा करने वाले यात्रियों को कोई असुविधा न हो। उन्होंने स्थानीय लोगों से भी अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और प्रशासन द्वारा तय किए गए सुरक्षा नियमों का पालन करें। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर प्रशासन ने जिस तेजी से जल मार्ग को एक प्रभावी विकल्प के रूप में खड़ा किया है, वह सराहनीय है। अब भागलपुर और नवगछिया के बीच की यह गंगा यात्रा न केवल सुरक्षित होगी, बल्कि आम आदमी की जेब पर भी भारी नहीं पड़ेगी। प्रशासन की सक्रियता यह दर्शाती है कि पुल की मरम्मत होने तक जल मार्ग ही जिले की नई ‘परिवहन धुरी’ बनकर उभरेगा।

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