HIGHLIGHTS:
- सीधी सुनवाई: जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कलेक्ट्रेट में सुनी जनता की समस्याएं।
- Ease of Living: ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ मुहिम के तहत 45 आवेदनों का हुआ ऑन-स्पॉट रिव्यू।
- मुद्दे: पेंशन, जमीन विवाद और दाखिल-खारिज जैसे संवेदनशील मामलों पर डीएम ने दिए कड़े निर्देश।
- टीम वर्क: सहायक समाहर्ता जतिन कुमार और अपर समाहर्ता दिनेश राम की मौजूदगी में शिकायतों का निपटारा।
आम आदमी की ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर डीएम का फोकस: कलेक्ट्रेट में लगी शिकायतों की ‘अदालत’
भागलपुर: सुशासन के संकल्प और “7 निश्चय-3” के विजन को जमीन पर उतारने के लिए भागलपुर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। शुक्रवार को समाहर्णालय स्थित अपने कार्यालय प्रकोष्ठ में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने जिले के दूर-दराज से आए आम जनों की समस्याएं सुनीं। डीएम ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आम आदमी के लिए सुलभ और आसान बनाना है।
अधिकारियों को ‘अल्टीमेटम’: काम में देरी बर्दाश्त नहीं!
सुनवाई के दौरान डीएम के साथ सहायक समाहर्ता जतिन कुमार और अपर समाहर्ता दिनेश राम भी मौजूद रहे। डीएम ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि पेंशन और दाखिल-खारिज जैसे मामलों को बेवजह लटकाने वाले कर्मियों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि “जीवन आसान” तभी होगा जब गरीब आदमी को अपने हक के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
“7 निश्चय-3”: बिहार के विकास का नया रोडमैप
जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (सं:- 1539) के अनुसार, यह पूरी कवायद ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ पहल का हिस्सा है। इस अभियान का उद्देश्य जिला स्तर पर लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन करना है ताकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के “7 निश्चय-3” के लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जा सके।
VOB का नजरिया: क्या ‘ईज ऑफ लिविंग’ केवल कागजों तक सीमित रहेगी?
जिलाधिकारी द्वारा खुद फरियादियों की बात सुनना एक सकारात्मक कदम है। अक्सर देखा जाता है कि पेंशन और जमीन के मामले निचले स्तर पर भ्रष्टाचार या सुस्ती की भेंट चढ़ जाते हैं। डॉ. नवल किशोर चौधरी की यह सक्रियता निचले अधिकारियों में खौफ और आम जनता में भरोसा पैदा करती है। हालांकि, 45 आवेदनों का निपटारा तो हुआ, लेकिन असल चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले समय में आवेदनों की संख्या कम हो, यानी सिस्टम इतना दुरुस्त हो जाए कि किसी को डीएम दफ्तर तक आने की जरूरत ही न पड़े।


