भागलपुर: अपनी मांगों को लेकर गरजे चौकीदार-दफादार; डीएम कार्यालय पर धरना, कमिश्नर को सौंपा 5 सूत्री ज्ञापन

भागलपुर | 28 फरवरी, 2026: अपनी लंबित मांगों और पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में आज भागलपुर जिला समाहरणालय (DM कार्यालय) परिसर चौकीदारों और दफादारों के नारों से गूंज उठा। बिहार राज्य चौकीदार व दफादार संघ के बैनर तले सैकड़ों कर्मियों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी 5 सूत्री मांगों के समर्थन में प्रमंडलीय आयुक्त (कमिश्नर) को एक ज्ञापन भी सौंपा।

पटना लाठीचार्ज पर फूटा गुस्सा: “दोषियों को मिले सजा”

​धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संघ के भागलपुर प्रमंडलीय अध्यक्ष कैलाश झा ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला:

  • दमनकारी कार्रवाई: उन्होंने आरोप लगाया कि पटना में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे चौकीदारों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज किया गया और उन पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई।
  • दंड की मांग: संघ ने मांग की है कि लाठीचार्ज का आदेश देने वाले और इसे अंजाम देने वाले पदाधिकारियों को तत्काल चिह्नित कर दंडित किया जाए।

प्रमुख मांगें: सेवा और सम्मान की लड़ाई

​चौकीदार-दफादार संघ ने अपनी 5 सूत्री मांगों को प्रमुखता से रखा है:

  1. विरासत की बहाली: सेवानिवृत्त चौकीदारों के आश्रितों (परिवार के सदस्यों) को पूर्व की भांति सेवा में बहाल किया जाए।
  2. वेतन और पेंशन: सभी कार्यरत चौकीदारों को सम्मानजनक मानदेय, नियमित वेतन और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की सुविधा सुनिश्चित की जाए।
  3. सुरक्षा और मान: ड्यूटी के दौरान चौकीदारों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार पर रोक लगे और उन्हें पुलिस विभाग के अभिन्न अंग के रूप में सम्मान मिले।

सैकड़ों की संख्या में जुटे कर्मी

​इस धरना प्रदर्शन में भागलपुर प्रमंडल के कोने-कोने से आए चौकीदार और दफादार शामिल हुए। मुख्य रूप से निम्नलिखित सदस्यों ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया:

    • कैलाश झा (प्रमंडलीय अध्यक्ष)
    • अमरजीत कुमार, जितेन्द्र पासवान, नरेश पासवान
    • बलराम पासवान, विनोद पासवान

VOB का नजरिया: ग्रामीण सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी की अनदेखी क्यों?

चौकीदार और दफादार ग्रामीण स्तर पर पुलिस और प्रशासन के ‘कान और आंख’ होते हैं। अपराध नियंत्रण से लेकर सूचना संकलन तक में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। अपनी जायज मांगों, विशेषकर अनुकंपा बहाली और पेंशन के लिए उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, यह व्यवस्था की विफलता है। पटना में हुई लाठीचार्ज जैसी घटनाएं संवाद के बजाय दमन का रास्ता दिखाती हैं, जिससे इन कर्मियों का मनोबल गिरता है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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