
भागलपुर। गंगा नदी पार कर आने-जाने वाले हजारों लोगों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले बाबूपुर घाट पर पिछले कई दिनों से जहाज सेवा बंद रहने के कारण आम लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। 29 मई से बंद पड़ी इस सेवा ने न केवल स्थानीय यात्रियों बल्कि मरीजों, दैनिक मजदूरों, व्यापारियों और अन्य आवश्यक कार्यों से यात्रा करने वाले लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं।
जहाज सेवा के अचानक बंद होने के बाद इसके पीछे अलग-अलग कारण सामने आ रहे हैं। एक तरफ जहाज से जुड़े कर्मचारी तकनीकी खराबी को परिचालन बंद होने की वजह बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का आरोप है कि जहाज को जानबूझकर बंद रखा गया है। इन विरोधाभासी दावों के बीच स्थानीय लोग प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।
नदी पार करने वालों के लिए बनी बड़ी समस्या
बाबूपुर घाट भागलपुर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण नदी घाट माना जाता है, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग नदी पार कर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। इस मार्ग का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों के लोग, छोटे व्यापारी, छात्र, नौकरीपेशा कर्मचारी और मरीज नियमित रूप से करते हैं।
29 मई से जहाज सेवा बंद होने के बाद लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे यात्रा में अधिक समय लग रहा है और अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है। कई यात्रियों का कहना है कि जिस दूरी को वे कुछ ही समय में तय कर लेते थे, अब उसी के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हो रही है जिन्हें प्रतिदिन काम के सिलसिले में नदी पार करनी पड़ती है।
तकनीकी खराबी का दावा
जहाज सेवा से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि जहाज में तकनीकी खराबी आ गई है, जिसके कारण उसका परिचालन फिलहाल सुरक्षित नहीं माना जा रहा है।
स्टाफ के अनुसार जब तक आवश्यक मरम्मत कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक जहाज को दोबारा संचालन में नहीं लाया जा सकता। उनका कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही सेवा को अस्थायी रूप से रोका गया है।
कर्मचारियों का तर्क है कि यदि किसी तकनीकी समस्या के बावजूद जहाज को चलाया जाता और कोई दुर्घटना हो जाती, तो उससे कहीं बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती थी। इसलिए पहले मरम्मत और सुरक्षा जांच जरूरी है।
चालक ने लगाए अलग आरोप
जहाज बंद होने को लेकर एक दूसरा पक्ष भी सामने आया है। घाट पर मौजूद एक चालक ने दावा किया कि जहाज को तकनीकी कारणों से नहीं बल्कि अन्य वजहों से बंद रखा गया है।
चालक का आरोप है कि जहाज चलाने के लिए कहा गया था, लेकिन जहाज के स्टाफ ने संचालन से इनकार कर दिया। उसका कहना है कि जहाज को चलाया जा सकता था, लेकिन कर्मचारियों की ओर से सहयोग नहीं किया गया।
चालक के अनुसार जहाज के एक स्टाफ सदस्य आनंद कुमार ने स्पष्ट रूप से यह कहा कि जहाज नहीं चलेगा। इस बयान के बाद पूरे मामले को लेकर और अधिक सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
घाट पर तैनात रही मेडिकल टीम और पुलिस
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर कुछ एहतियाती कदम भी उठाए गए थे। जानकारी के अनुसार घाट क्षेत्र में मेडिकल टीम, एम्बुलेंस और पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जहाज सेवा बाधित होने के कारण बड़ी संख्या में यात्री घाट पर जमा हो रहे थे। ऐसे में किसी प्रकार की अव्यवस्था या आपात स्थिति की संभावना को देखते हुए सुरक्षा इंतजाम किए गए।
हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उस समय घाट पर कोई दंडाधिकारी या मजिस्ट्रेट मौजूद नहीं था, जिससे कई लोगों ने प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल भी उठाए।
मरीजों को सबसे अधिक परेशानी
जहाज सेवा बंद होने का सबसे ज्यादा असर उन मरीजों पर पड़ा है जिन्हें नियमित रूप से इलाज के लिए भागलपुर या अन्य क्षेत्रों में जाना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मरीजों को अस्पताल पहुंचने में देरी हुई। कुछ मामलों में मरीजों और उनके परिजनों को लंबा चक्कर लगाकर दूसरे रास्तों से यात्रा करनी पड़ी।
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि नदी पार करने के लिए जहाज सेवा उनके लिए सबसे सुविधाजनक और कम खर्च वाला साधन है। इसके बंद होने से गरीब और जरूरतमंद परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है।
दैनिक यात्रियों की बढ़ी मुश्किल
घाट से जुड़े कई गांवों के लोग रोजाना काम के सिलसिले में नदी पार करते हैं। इनमें मजदूर, छोटे दुकानदार, निजी कर्मचारी और छात्र शामिल हैं।
जहाज सेवा बंद होने के कारण अब उन्हें या तो लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है या फिर अन्य महंगे साधनों का उपयोग करना पड़ रहा है।
दैनिक यात्रियों का कहना है कि यदि सेवा जल्द बहाल नहीं हुई तो उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा। कई लोगों ने बताया कि अतिरिक्त किराया और समय दोनों उनकी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने की जांच की मांग
घाट पर मौजूद लोगों का कहना है कि प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जहाज वास्तव में तकनीकी खराबी के कारण बंद है या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण है।
लोगों का कहना है कि यदि तकनीकी समस्या है तो मरम्मत कार्य में तेजी लाई जाए। वहीं यदि किसी प्रकार का प्रशासनिक या संचालन संबंधी विवाद है तो उसे तत्काल सुलझाया जाए।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन सेवा लंबे समय तक बंद रहने से हजारों लोगों की दिनचर्या प्रभावित होती है, इसलिए समस्या का जल्द समाधान आवश्यक है।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल बाबूपुर घाट पर जहाज सेवा बहाल नहीं हो सकी है। स्थानीय लोग लगातार प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।
लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यात्रियों को यह जानकारी देनी चाहिए कि सेवा कब तक दोबारा शुरू होगी। पारदर्शिता की कमी के कारण भी लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
लोगों की मांग- जल्द शुरू हो जहाज सेवा
स्थानीय ग्रामीणों, वाहन चालकों और यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि जहाज सेवा को जल्द से जल्द पुनः शुरू कराया जाए। उनका कहना है कि यह सेवा केवल एक परिवहन सुविधा नहीं बल्कि हजारों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी हुई है।
फिलहाल बाबूपुर घाट पर जहाज सेवा बंद रहने का वास्तविक कारण जांच का विषय बना हुआ है। एक ओर तकनीकी खराबी की बात कही जा रही है, तो दूसरी ओर संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आखिर 29 मई से बंद पड़ी इस महत्वपूर्ण सेवा के पीछे असली वजह क्या है और यात्रियों को राहत कब मिलेगी।


