भागलपुर: वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 61 बटुकों का हुआ सामूहिक उपनयन संस्कार; बूढ़ानाथ मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

भागलपुर | 23 फरवरी, 2026: शहर के ऐतिहासिक बूढ़ानाथ स्थित मसानी काली मंदिर परिसर में रविवार को ‘अखिल भारतीय कान्यकुब्ज ब्राह्मण विकास मंच’ के तत्वावधान में भव्य सामूहिक उपनयन संस्कार का आयोजन किया गया। यह मंच द्वारा आयोजित 20वां वार्षिक समारोह था, जिसमें विभिन्न जिलों से आए बटुकों ने सनातन परंपरा के अनुसार जनेऊ धारण किया।

चार जिलों के बटुक हुए शामिल

​इस धार्मिक अनुष्ठान की खास बात यह रही कि इसमें केवल भागलपुर ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिलों और राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचे थे। मंच के अध्यक्ष डॉ. पी. एन. पाण्डेय ने बताया कि आयोजन में कुल 61 बटुकों का उपनयन संपन्न हुआ।

सहभागी क्षेत्र:

  • बिहार: भागलपुर, बांका और नवगछिया।
  • झारखंड: गोड्डा जिला।
  • अन्य: विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्र।

20 सालों से जारी है सेवा का संकल्प

​सामूहिक उपनयन संस्कार का यह सिलसिला पिछले दो दशकों से निरंतर जारी है। डॉ. पाण्डेय ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और मितव्ययिता के साथ संस्कारों को बढ़ावा देना है।

वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुआ अनुष्ठान

  • मंत्रोच्चार: विद्वान पुरोहितों की देखरेख में सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनुष्ठान शुरू हुआ।
  • परंपरा: बटुकों ने मुंडन संस्कार के बाद जनेऊ धारण किया और भिक्षाटन की परंपरा पूरी की।
  • माहौल: बूढ़ानाथ मंदिर परिसर जयकारों और शंखध्वनि से गुंजायमान रहा। इस अवसर पर बटुकों के परिजनों के साथ-साथ समाज के कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।

सांस्कृतिक महत्व

​मंच के सदस्यों ने बताया कि उपनयन संस्कार मनुष्य के ‘दूसरे जन्म’ का प्रतीक माना जाता है, जो उसे शिक्षा और संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आयोजन की सफलता में विकास मंच के सभी पदाधिकारियों और मंदिर समिति का सराहनीय योगदान रहा।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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