भागलपुर | 27 फरवरी, 2026: जमीन के खेल में फर्जीवाड़े की हदें पार करते हुए एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां कागजों पर एक मृत महिला को ‘जिंदा’ बताकर जमीन का दाखिल-खारिज (Mutation) करा लिया गया। इस सनसनीखेज जालसाजी के उजागर होने के बाद, जगदीशपुर अंचलाधिकारी (CO) के आदेश पर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में कानूनी अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) को लेकर भी थोड़ी रस्साकशी हुई।
थाने के ‘चक्कर’ और क्षेत्राधिकार का सुधार
इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश पहले मोजाहिदपुर थाने को दिया गया था। हालांकि, प्रशासनिक नियमों के पेच के कारण वहां से आदेश वापस लेना पड़ा।
- CO का स्पष्टीकरण: अंचलाधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि नियमानुसार जगदीशपुर अंचल का मुख्यालय थाना ही प्राथमिकी दर्ज करने के लिए अधिकृत है। इसी तकनीकी सुधार के बाद अब मोजाहिदपुर के बदले जगदीशपुर थाने में केस दर्ज हुआ है।
क्या है पूरा ‘मुर्दा-जिंदा’ खेल?
यह पूरा मामला बरहपुरा के सैयद इनामुद्दीन की शिकायत पर शुरू हुआ, जिन्होंने सदर एसडीओ (SDO) को आवेदन देकर इस बड़े फर्जीवाड़े की पोल खोली थी।
- आरोप: मोजाहिदपुर के गणीचक निवासी मो. इस्लाम पर आरोप है कि उसने एक मृत महिला को जीवित बताते हुए एक फर्जी शपथ पत्र (Affidavit) तैयार करवाया।
- फायदा: इसी फर्जी शपथ पत्र के आधार पर उसने अंचल कार्यालय को गुमराह किया और जमीन का दाखिल-खारिज अपने पक्ष में करवा लिया।
पुलिस की कार्रवाई और आरोपी का पक्ष
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जगदीशपुर पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। गुरुवार को जांच के क्रम में आरोपी मो. इस्लाम ने पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष भी रखा। जगदीशपुर थानाध्यक्ष ने पुष्टि की है कि मामला दर्ज कर लिया गया है और दस्तावेजों की गहनता से जांच की जा रही है कि इस खेल में अंचल कार्यालय के किन-किन कर्मियों की संलिप्तता रही है।
VOB का नजरिया: क्या म्यूटेशन की प्रक्रिया केवल ‘कागजी’ रह गई है?
मृत व्यक्ति को जीवित बताकर दाखिल-खारिज करा लेना राजस्व विभाग की पूरी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। यदि हलका कर्मचारी और अंचल कार्यालय के स्तर पर शपथ पत्रों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) ईमानदारी से हो, तो ऐसे जालसाजों के हौसले कभी बुलंद न हों। यह मामला केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में सेंधमारी का प्रमाण है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


