
भागलपुर। वर्ष 2018 में अकबरनगर थाना क्षेत्र में तेजाब पिलाकर की गई एक विवाहिता की हत्या मामले में सात साल तक अनुसंधान में लापरवाही बरतने वाले नौ पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश जारी किया गया है। आईजी विवेक कुमार ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए संबंधित अफसरों की भूमिका की समीक्षा की और बड़ी चूक सामने आने पर कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है।
सात वर्षों में नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई
घटना के बाद 13 अप्रैल 2018 को दर्ज केस में वर्षों बीत जाने के बावजूद जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी। आईजी स्तर पर हुई समीक्षा में यह सामने आया कि केस से जुड़े पुलिसकर्मियों ने अनुसंधान के प्रति घोर लापरवाही बरती। विसरा तक सड़ गया, जिससे जांच प्रभावित हुई और अभियोजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
इन अधिकारियों पर होगी विभागीय कार्रवाई
जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया है, उनमें शामिल हैं:
- तत्कालीन कांड के आईओ इंस्पेक्टर विकास कुमार
- एसआई नसीम खां
- एसआई मो. वारिस खान
- एसआई मो. दिलशाद
- एसआई संतोष कुमार शर्मा
- एसआई पुष्पलता कुमारी
- एसआई संतोष कुमार वर्मा
- एसआई राकेश कुमार
- एएसआई जितेंद्र कुमार
इसके साथ ही दो तत्कालीन डीएसपी—नेसार अहमद शाह और डॉ. गौरव कुमार—पर भी अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा पुलिस मुख्यालय से की गई है।
मृत्यु से पहले विवाहिता ने दर्ज कराया था बयान
इस मामले में पीड़िता रजनी कुमारी ने मौत से पहले मायागंज अस्पताल में 31 मार्च 2018 को पुलिस के सामने बयान दर्ज कराया था। उसने बताया था कि उसकी शादी धर्मवीर रजक से चार साल पहले हुई थी और उनका एक बेटा भी था। शादी के बाद से ही उसे पति, सास और गोतनी द्वारा प्रताड़ित किया जाता था।
रजनी के अनुसार, 28 मार्च 2018 को एक मामूली कहासुनी के बाद उसकी सास और गोतनी ने टॉयलेट साफ करने वाला तेजाब पिला दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। उसे मायागंज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद मामला दर्ज हुआ, लेकिन वर्षों तक न कोई गिरफ्तारी हुई, न ही केस में प्रगति।
न्याय के लिए वर्षों से तरसता रहा परिवार
पीड़िता के परिवार वालों ने वर्षों तक न्याय की उम्मीद की, लेकिन पुलिस की लापरवाही ने केस को ठंडे बस्ते में डाल दिया। आईजी द्वारा की गई इस कार्रवाई को न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
यह रिपोर्ट वेबसाइट पर पीड़िता के न्याय की मांग, पुलिस जवाबदेही और प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता को उजागर करने के लिए प्रकाशित की जा सकती है। यदि SEO शीर्षक, मेटा विवरण, टैग या संबंधित केस अपडेट चाहिए हों तो बताएं।
भागलपुर। वर्ष 2018 में अकबरनगर थाना क्षेत्र में तेजाब पिलाकर की गई एक विवाहिता की हत्या मामले में सात साल तक अनुसंधान में लापरवाही बरतने वाले नौ पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश जारी किया गया है। आईजी विवेक कुमार ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए संबंधित अफसरों की भूमिका की समीक्षा की और बड़ी चूक सामने आने पर कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है।
सात वर्षों में नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई
घटना के बाद 13 अप्रैल 2018 को दर्ज केस में वर्षों बीत जाने के बावजूद जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी। आईजी स्तर पर हुई समीक्षा में यह सामने आया कि केस से जुड़े पुलिसकर्मियों ने अनुसंधान के प्रति घोर लापरवाही बरती। विसरा तक सड़ गया, जिससे जांच प्रभावित हुई और अभियोजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
इन अधिकारियों पर होगी विभागीय कार्रवाई
जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया है, उनमें शामिल हैं:
- तत्कालीन कांड के आईओ इंस्पेक्टर विकास कुमार
- एसआई नसीम खां
- एसआई मो. वारिस खान
- एसआई मो. दिलशाद
- एसआई संतोष कुमार शर्मा
- एसआई पुष्पलता कुमारी
- एसआई संतोष कुमार वर्मा
- एसआई राकेश कुमार
- एएसआई जितेंद्र कुमार
इसके साथ ही दो तत्कालीन डीएसपी—नेसार अहमद शाह और डॉ. गौरव कुमार—पर भी अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा पुलिस मुख्यालय से की गई है।
मृत्यु से पहले विवाहिता ने दर्ज कराया था बयान
इस मामले में पीड़िता रजनी कुमारी ने मौत से पहले मायागंज अस्पताल में 31 मार्च 2018 को पुलिस के सामने बयान दर्ज कराया था। उसने बताया था कि उसकी शादी धर्मवीर रजक से चार साल पहले हुई थी और उनका एक बेटा भी था। शादी के बाद से ही उसे पति, सास और गोतनी द्वारा प्रताड़ित किया जाता था।
रजनी के अनुसार, 28 मार्च 2018 को एक मामूली कहासुनी के बाद उसकी सास और गोतनी ने टॉयलेट साफ करने वाला तेजाब पिला दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। उसे मायागंज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद मामला दर्ज हुआ, लेकिन वर्षों तक न कोई गिरफ्तारी हुई, न ही केस में प्रगति।
न्याय के लिए वर्षों से तरसता रहा परिवार
पीड़िता के परिवार वालों ने वर्षों तक न्याय की उम्मीद की, लेकिन पुलिस की लापरवाही ने केस को ठंडे बस्ते में डाल दिया। आईजी द्वारा की गई इस कार्रवाई को न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


