भागलपुर | 01 मार्च, 2026: स्मार्ट सिटी भागलपुर की साइबर पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने उत्तर प्रदेश और बिहार के 5,000 से अधिक लोगों की खून-पसीने की कमाई पर डाका डाला है। बैंक खातों की ‘केवाईसी’ (KYC) अपडेट करने के नाम पर लोगों का फिंगरप्रिंट क्लोन करने वाले इस शातिर सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस को यह अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है।
मिरजानहाट में दबोचा गया गिरोह का सदस्य: भारी मात्रा में उपकरण बरामद
साइबर थाने की पुलिस पिछले एक साल से इस गिरोह के पीछे लगी थी। आखिरकार गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने शहर के मिरजानहाट स्थित वारसलीगंज मोहल्ले में छापेमारी कर गिरोह के एक सदस्य को दबोच लिया। तलाशी के दौरान पुलिस के भी होश उड़ गए जब वहां से डिजिटल डकैती का पूरा ‘सेटअप’ मिला:
- क्लोनिंग डिवाइस: फिंगरप्रिंट क्लोन करने वाली अत्याधुनिक मशीन।
- डेटा का जखीरा: भारी संख्या में लोगों के आधार कार्ड नंबर और गोपनीय डेटा।
- गैजेट्स: लैपटॉप, फिंगरप्रिंट स्कैनर और कई आपत्तिजनक दस्तावेज।
- नकद राशि: ठगी की गई मोटी नकद राशि और पावती रसीदें।
कैसे चलता था ठगी का ‘मायाजाल’: बैंक मित्र बनकर देते थे झांसा
साइबर डीएसपी कनिष्क श्रीवास्तव के अनुसार, इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिर था। ये ठग सीधे भोले-भाले ग्रामीणों को निशाना बनाते थे:
- भरोसा जीतना: गिरोह के सदस्य गांव-गांव घूमकर खुद को बैंक मित्र या सीएसपी (CSP) संचालक बताते थे।
- केवाईसी का लालच: लोगों को डराया जाता था कि अगर केवाईसी अपडेट नहीं हुई तो खाता बंद हो जाएगा।
- बायोमेट्रिक चोरी: अपडेट करने के बहाने वे लोगों का फिंगरप्रिंट लेते थे और चालाकी से उसे ‘क्लोन’ (नकल) कर लेते थे।
- खाता साफ: फिंगरप्रिंट और आधार डेटा मिलते ही आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के जरिए ग्राहकों के खातों से पैसे गायब कर दिए जाते थे।
यूपी से बिहार तक छापेमारी: मास्टरमाइंड अब भी फरार
जांच में पता चला है कि इस गिरोह की जड़ें वाराणसी और गोरखपुर से लेकर पटना तक फैली हुई हैं। साइबर डीएसपी के नेतृत्व में 8 से 10 जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।
हालांकि, इस पूरे खेल के दो मुख्य मास्टरमाइंड—गौतम कुमार और अशोक तांती—फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। उनकी तलाश में पुलिस की टीमें वाराणसी और पटना के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि उनकी गिरफ्तारी के बाद करोड़ों रुपये के और भी कई बड़े घोटालों का खुलासा होगा।
VOB का नजरिया: आपकी उंगलियों के निशान अब ‘चाबी’ नहीं, ‘खतरा’ भी हैं
डिजिटल इंडिया के दौर में बायोमेट्रिक सुरक्षा को सबसे पुख्ता माना जाता था, लेकिन भागलपुर की इस घटना ने साबित कर दिया है कि अपराधी तकनीक के मामले में दो कदम आगे चल रहे हैं। जब आप किसी अनजान व्यक्ति को अपना अंगूठा स्कैन करने देते हैं, तो आप उसे अपने लॉकर की चाबी सौंप रहे होते हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ नागरिकों से अपील करता है कि केवल अधिकृत बैंक शाखा में जाकर ही अपनी बायोमेट्रिक जानकारी साझा करें।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


