बंगाल और असम चुनाव: मतदान कम-ज्यादा होने से हार-जीत का आकलन नामुमकिन

पश्चिम बंगाल और असम में पहले फेज के मतदान में हालांकि मतदान का प्रतिशत अच्छा रहा है, लेकिन इन राज्यों में पिछली बार की तुलना में यह थोड़ा कम है। इसलिए मतदान के प्रतिशत को लेकर राजनीतिक अटकलों का दौर चल पड़ा है। राजनीतिक दल अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार अपने हक में इसका आंकलन कर रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ चुनावों के मतदान प्रतिशत और नतीजों को देखें तो ऐसा लगता है कि मतदान प्रतिशत का किसी दल की हार-जीत से कोई सीधा संबंध नहीं है। यह राज्य दर राज्य वहां की स्थिति पर निर्भर करता है।

पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनावों की बात करें तो वहां मतदान प्रतिशत 56 से बढ़कर 57 फीसदी के करीब हुआ। भाजपा को फायदा पहुंचा। लेकिन 2015 में जब मतदान प्रतिशत 53 से बढ़कर 56 फीसदी हुआ तो भाजपा को नुकसान हुआ। उससे पहले झारखंड के चुनावों पर नजर डालें तो झारखंड और हरियाणा में मतदान कम होने से भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा।

2019 के लोकसभा चुनावों से पूर्व 2018 में तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव हुए। तीनों राज्यों में भाजपा थी और तीनों राज्य उसके हाथ से निकल गए थे। लेकिन यदि मतदान के प्रतिशत पर नजर डाली जाए तो राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ में इसमें पिछले चुनाव से एक-एक प्रतिशत की कमी हुई थी और मध्य प्रदेश में यह तीन फीसदी बढ़ा था।

चुनाव आंकड़ों के एक अन्य विश्लेषण के अनुसार 2014-2018 के बीच दस राज्यों में जहां मतदान के प्रतिशत में बढ़ोत्तरी हुई और भाजपा प्रमुख दल के रूप में चुनाव लड़ रही थी, उनमें से सात राज्यों में उसे फायदा पहुंचा। जबकि तीन राज्यों में नुकसान हुआ। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में मतदान प्रतिशत 60-64, हरियाणा में 72-77, झारखंड में 59-66 तथा जम्मू-कश्मीर में 60-65, असम में 75-84, मणिपुर में 79-94 फीसदी होने से भाजपा को फायदा हुआ। कहीं उसकी सरकार बनी तो कहीं बड़े दल के रूप में उभरी। लेकिन दिल्ली और बिहार में मतदान बढ़ने के बावजूद भाजपा को फायदा नही हुआ। तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की बात करें तो यूपी एवं हिप्र में मतदान बढ़ा और भाजपा को फायदा हुआ। जबकि उत्तराखंड में मत प्रतिशत घटने के बावजूद भाजपा को फायदा हुआ।

गुजरात में 68.41 से मतदान बढ़कर 71.32 फीसदी हुआ लेकिन यहां भाजपा की सीटें पहले से कम हुई। यह अलग बात है कि वह सरकार बनाने में कामयाब हुई। राजनीतिक जानकारों के अनुसार मतदान प्रतिशत के साथ कई और कारक भी महत्वपूर्ण हैं। मसलन, इस बात की भूमिका भी बेहद अहम है कि जिस राज्य में चुनाव हो रहे हैं, उसमें पहले किस दल की सरकार है। पूर्व के आंकड़ों के विश्लेषण से कुछ राज्यों में यह रुझान यह दिखता है कि यदि वहां दूसरे दल की सरकार पहले हैं और मत प्रतिशत बढ़ा है तो उसका फायदा भाजपा को मिला है। लेकिन ऐसा भी सभी राज्यों में नहीं दिखा है।

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