बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड की रहने वाली कामिनी कुमारी आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। अपनी सादगी, ओजपूर्ण भाषण और ज़मीनी स्तर पर किए गए कार्यों के कारण उनकी पहचान अब केवल जिले तक सीमित नहीं रही। सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय मंचों तक लोग उन्हें प्यार से ‘जल क्रांति वाली दीदी’ के नाम से पुकारते हैं।
संघर्ष से पहचान तक का सफर
सामाजिक कार्यों से जुड़े एक एनजीओ का संचालन करने वाली कामिनी कुमारी की कहानी संघर्षों से भरी रही है। आज वह किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए कामिनी बताती हैं कि एक बार वह अपने संगठन की महिलाओं के साथ रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण के लिए देहरादून गई थीं।
कामिनी कुमारी कहती हैं,
“देहरादून में पहाड़ी इलाकों में हमने देखा कि जगह-जगह जमीन में छेद बनाए गए हैं। जानकारी मिली कि जलस्तर गिरने से रोकने के लिए जल छिद्र बनाए गए हैं। तभी मन में आया कि अगर पहाड़ों में रहने वाले लोग इतना प्रयास कर सकते हैं, तो हम समतल क्षेत्र में क्यों नहीं कर सकते।”
जल संरक्षण में अमूल्य योगदान
देहरादून से लौटने के बाद कामिनी कुमारी ने अपनी टीम के साथ जल संरक्षण के लिए काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि बिहार संसाधनों से भरपूर है, बस जरूरत है उन्हें सहेजने की। उनके साथ काम करने वाली अधिकतर महिलाएं पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन वे हाथों से माप कर वाटर रिचार्ज पिट (जल छिद्र) बना लेती हैं। इस काम से महिलाओं में आत्मविश्वास और खुशी दोनों देखने को मिलती है।
सरकार ने भी माना काम का लोहा
भारत सरकार ने वर्ष 2015 में जल क्रांति योजना की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण और प्रबंधन को बढ़ावा देना था। इसी विचार से प्रेरित होकर कामिनी कुमारी ने अपना जीवन इस कार्य को समर्पित कर दिया। उनके प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि उन्होंने न सिर्फ देशभर में पहचान बनाई, बल्कि सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों को भी जल संरक्षण से जोड़ा।
बिहार और गांव का नाम कर रहीं रोशन
एक सामान्य परिवार से आने वाली कामिनी कुमारी आज देश के बड़े मंचों पर बिहार का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। महिलाओं को उनके साथ जुड़कर जीवन का नया उद्देश्य मिला है। सामाजिक कार्यों के कई क्षेत्रों में सक्रिय रहने के बावजूद उनकी असली पहचान जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों से बनी है।
पुरस्कार और सहयोग भी मिला
कामिनी कुमारी बताती हैं कि उनका मकसद महिलाओं के चेहरे पर खुशी लाना है। उनके कार्यों को देखकर कई संस्थाओं ने आर्थिक सहयोग भी दिया है। अर्थो एंड स्विच होम नामक संस्था ने उनकी संस्था को इम्पैक्ट लीडर के रूप में चुना और आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके अलावा जल शक्ति मंत्रालय ने भी उन्हें बिहार की स्थिति देश के सामने रखने के लिए आमंत्रित किया।
कामिनी कुमारी कहती हैं,
“जल शक्ति मंत्रालय के मंच से अपनी बात रखना हमारे लिए गर्व की बात थी। हम छोटे-छोटे प्रयास कर रहे हैं—पौधारोपण, वाटर रिचार्ज पिट बनाना, वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करना। जमीन जितनी कम तपेगी, उतना ही पानी संरक्षित रहेगा।”
जल संवर्धन पर लगातार फोकस
कामिनी कुमारी लोगों को चापाकल के पास सोख्ता बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं, ताकि पानी बेकार न बहे और सीधे जमीन में जाकर जलस्तर को बनाए रखे। उनका मानना है कि भले ही संसाधन सीमित हों, लेकिन सही प्रयास से जल संरक्षण संभव है।
उनकी मेहनत और समर्पण को देखते हुए अब सरकार भी उनके प्रयासों में सहयोग कर रही है। आज जब दुनिया में जलस्तर तेजी से गिर रहा है, ऐसे समय में ‘जल क्रांति वाली दीदी’ का काम समाज के लिए एक मजबूत उदाहरण बन चुका है।


