बेगूसराय: ‘अपराध बढ़ा, फिर भी आपने इन्हीं को चुना’; प्रशांत किशोर का जनता से सीधा सवाल, कहा- 17 लाख लोगों का विश्वास हमारी पूंजी

  • तीखा हमला: ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ के तहत बेगूसराय पहुंचे प्रशांत किशोर; बोले- जब जनता ने अपराध बढ़ने के बावजूद उसी सरकार को वोट दिया, तो अब सुधार की उम्मीद कैसी?
  • जनादेश का सम्मान: जन सुराज की भूमिका पर बोले पीके- 17 लाख लोगों ने हमें वोट देकर जनता के बीच रहने को कहा है, हम वही जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
  • कानून-व्यवस्था: बिगड़ते हालात पर सरकार को घेरा, लेकिन गेंद जनता के पाले में भी डाली; कहा- सरकार वही है जिसे आपने चुना है।

द वॉयस ऑफ बिहार (बेगूसराय/ब्यूरो)

जन सुराज (Jan Suraaj) के सूत्रधार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने एक बार फिर बिहार की कानून-व्यवस्था और जनता के चुनावी फैसलों पर बेबाक टिप्पणी की है। ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ (Bihar Navnirman Abhiyan) के तहत मंगलवार को बेगूसराय (Begusarai) पहुंचे पीके ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान बढ़ते अपराध के लिए सरकार के साथ-साथ जनता के फैसले को भी आईना दिखाया।

‘सरकार वही चुनी, तो परिणाम अलग कैसे होगा?’

​बिहार में आए दिन हो रही आपराधिक घटनाओं और हत्याओं पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए प्रशांत किशोर ने तंज कसा।

  • तर्क: उन्होंने कहा कि जब बिहार में अपराध का ग्राफ ऊपर जा रहा था, तब भी चुनाव में लोगों ने मौजूदा सरकार को ही चुना।
  • सवाल: पीके ने सीधा सवाल दागा- “बिहार में अपराध बढ़ने के बाद भी लोगों ने इसी सरकार को चुना है, तो अपराध कैसे कम होगा?” उनका इशारा साफ था कि अगर जनता बदलाव के लिए वोट नहीं करेगी, तो व्यवस्था में सुधार की उम्मीद बेमानी है।

’17 लाख लोगों ने हमें विपक्ष की जिम्मेदारी दी’

​जन सुराज की आगे की रणनीति और भूमिका पर प्रशांत किशोर ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि चुनावी हार-जीत से अलग, जन सुराज को एक बड़ा जनसमर्थन मिला है।

  • भरोसा: उन्होंने कहा, “17 लाख लोगों ने जन सुराज को वोट दिया है। इन लोगों ने वोट देकर हमसे कहा है कि आप हारिए मत, जनता के बीच रहकर काम कीजिए।”
  • संकल्प: पीके ने कहा कि वे और उनका संगठन 17 लाख मतदाताओं के उस भरोसे को टूटने नहीं देंगे और विपक्ष की सकारात्मक भूमिका निभाते हुए जनता के मुद्दों पर संघर्ष करते रहेंगे। “हमलोग अपनी वही जिम्मेदारी निभा रहे हैं,” उन्होंने स्पष्ट किया।

लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि है, लेकिन पीके का सवाल चुभने वाला है।

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