
रोहतास: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम में रोहतास जिले की बेटी सानिया कलीम ने शानदार सफलता हासिल करते हुए डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) का पद प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, मोहल्ले और पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है।
पहले ही प्रयास में हासिल किया DSP का पद
डेहरी के कमरनगंज निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक कलीम अहमद और शिक्षिका अंजुम परवीन की बड़ी बेटी सानिया कलीम ने अपने पहले ही प्रयास में BPSC परीक्षा पास कर 283वीं रैंक हासिल की है। इस रैंक के आधार पर उनका चयन DSP पद के लिए हुआ है।
सबसे खास बात यह है कि सानिया ने किसी भी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। उन्होंने केवल सेल्फ स्टडी, अनुशासन और निरंतर मेहनत के दम पर यह सफलता हासिल की।
पिता बोले- “बेटी ने बेटे की कमी भी पूरी कर दी”
बेटी की सफलता पर पिता कलीम अहमद की खुशी का ठिकाना नहीं है। उन्होंने कहा कि सानिया बचपन से ही मेहनती और लक्ष्य के प्रति समर्पित रही है।
“मेरी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी ने अपनी मेहनत और लगन से जो मुकाम हासिल किया है, उसने बेटे की कमी भी पूरी कर दी है। सानिया बचपन से ही काफी मेहनती रही है।”
बचपन से था प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना
परिवार के अनुसार सानिया का सपना बचपन से ही प्रशासनिक सेवा में जाने का था। वह हमेशा अपने पिता के सपनों को पूरा करना चाहती थीं।
उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सिकरिया स्थित सेंट जेम्स स्कूल से की। इसके बाद नई दिल्ली की प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी।
मां के संघर्ष और त्याग की कहानी
सानिया की सफलता के पीछे उनकी मां अंजुम परवीन का त्याग और समर्पण भी कम नहीं है। बेटी की सफलता को याद करते हुए वह भावुक हो जाती हैं।
“तैयारी के दौरान कई बार रात के तीन बजे तक पढ़ाई करते हुए उसे भूख लग जाती थी। जब वह आवाज देती थी तो मैं तुरंत उठकर उसके लिए खाना बनाती थी। मेरी दुआ है कि मेरी बेटी इसी तरह आगे बढ़ती रहे और देश की सेवा करे।”
निराशा के बीच परिवार बना सबसे बड़ी ताकत
सानिया बताती हैं कि तैयारी के दौरान कई बार ऐसे मौके आए जब उन्हें निराशा महसूस हुई, लेकिन माता-पिता और छोटी बहन सदफ ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया।
उनका कहना है कि परिवार का सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा।
लड़कियों को दिया खास संदेश
अपनी सफलता के बाद सानिया ने युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए प्रेरणादायक संदेश दिया।
“अगर आपके भीतर दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण है तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। असफलताओं से घबराने की बजाय लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। लड़कियों से कहना चाहूंगी कि अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखें और उसे पाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ जुट जाएं, सफलता एक दिन जरूर आपके कदम चूमेगी।”
पूरे जिले के लिए बनीं प्रेरणा
मोहल्ले के पूर्व वार्ड पार्षद धरमु चौधरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए सानिया एक मिसाल बन गई हैं।
उनके अनुसार, आज भी कई लड़कियां बड़े सपने देखने से हिचकती हैं, लेकिन सानिया ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।
रोहतास की बेटी ने बढ़ाया बिहार का मान
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सानिया कलीम की सफलता केवल उनके परिवार की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे रोहतास जिले और बिहार के लिए गर्व का विषय है। उनकी कहानी उन हजारों युवाओं को प्रेरणा देती है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।


