
भागलपुर स्थित (बीएयू), सबौर ने “सॉइल डिटेक्टिव: हैंड्स-ऑन लेबोरेटरी स्किल्स एंड सॉइल एनालिसिस ट्रेनिंग” विषय पर आयोजित 10-दिवसीय राष्ट्रीय ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन कर लिया। यह कार्यक्रम कृषि शिक्षा और शोध के क्षेत्र में व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। इंटर्नशिप का उद्देश्य स्नातक छात्रों को आधुनिक मृदा विज्ञान, उन्नत प्रयोगशाला तकनीकों और कृषि अनुसंधान से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था, ताकि वे कक्षा शिक्षण से आगे बढ़कर वास्तविक परिस्थितियों में वैज्ञानिक कौशल विकसित कर सकें।
यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सबौर कंसल्टेंसी सर्विसेज (SABCONs) के तत्वावधान में मृदा विज्ञान विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया। 10 जून से 19 जून तक चले इस इंटर्नशिप कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से आए कुल 22 छात्रों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में , , तथा के छात्र शामिल रहे। अलग-अलग राज्यों से आए छात्रों की भागीदारी ने इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई।
इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को मृदा विज्ञान के कई महत्वपूर्ण आयामों से परिचित कराया गया। प्रशिक्षण का केंद्र केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे पूरी तरह व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ डिजाइन किया गया था। प्रतिभागियों को मृदा नमूना संग्रहण की वैज्ञानिक पद्धति, मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता का मूल्यांकन, मृदा परीक्षण रिपोर्टों का विश्लेषण तथा पोषक तत्वों की पहचान जैसी प्रक्रियाओं का गहन प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञों ने छात्रों को बताया कि मृदा परीक्षण केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने का साधन नहीं है, बल्कि यह टिकाऊ खेती और भूमि संरक्षण के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की सही पहचान से किसान फसलों के लिए उचित उर्वरक और पोषण प्रबंधन रणनीति तैयार कर सकते हैं। इस प्रकार मृदा विश्लेषण सीधे तौर पर कृषि उत्पादकता और पर्यावरणीय संतुलन दोनों से जुड़ा हुआ है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रयोगशाला सुरक्षा प्रक्रियाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया। छात्रों को बताया गया कि किसी भी वैज्ञानिक प्रयोग के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। प्रयोगशाला में रसायनों के उपयोग, नमूनों की प्रोसेसिंग और मशीनों के संचालन के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों को विस्तार से समझाया गया। इससे प्रतिभागियों को पेशेवर प्रयोगशाला कार्यप्रणाली की बेहतर समझ मिली।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण रहा। छात्रों को आधुनिक प्रयोगशाला उपकरणों के संचालन का अवसर मिला, जिससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि वैज्ञानिक शोध और परीक्षण प्रक्रियाएं वास्तविक स्तर पर कैसे संचालित होती हैं। कई प्रतिभागियों ने बताया कि यह उनके लिए पहली बार था जब उन्हें इतनी आधुनिक तकनीकों के साथ काम करने का अवसर मिला।
इंटर्नशिप में व्यावहारिक सत्रों के अलावा विशेषज्ञ व्याख्यान और फील्ड डेमोंस्ट्रेशन भी आयोजित किए गए। इन सत्रों के माध्यम से छात्रों ने कृषि अनुसंधान, विस्तार सेवाओं और सतत भूमि प्रबंधन से जुड़े अनेक पहलुओं को समझा। विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और मिट्टी की गुणवत्ता संरक्षण की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान संबोधित करते हुए बीएयू सबौर के कुलपति ने अनुभवात्मक शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। कृषि क्षेत्र तेजी से तकनीकी बदलावों से गुजर रहा है, ऐसे में छात्रों को आधुनिक उपकरणों और वैज्ञानिक पद्धतियों की व्यावहारिक समझ होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से दक्ष कृषि पेशेवर ही भविष्य की कृषि चुनौतियों का प्रभावी समाधान दे सकते हैं।
कुलपति ने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान की भूमिका लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा, मृदा संरक्षण और टिकाऊ खेती जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। इस दिशा में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम का समन्वयन SABCONs के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा किया गया, जबकि आयोजन सचिव के रूप में डॉ. सोनल कुमारी ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। आयोजन टीम ने पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम को व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से संचालित किया, जिससे प्रतिभागियों को अधिकतम सीखने का अवसर मिला।
प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के अनुभव को बेहद सकारात्मक बताया। कई छात्रों ने कहा कि यह प्रशिक्षण उनके लिए नियमित कक्षा शिक्षण से अलग और अधिक प्रभावी सीखने का माध्यम साबित हुआ। उनका मानना था कि इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों को उद्योग, शोध और फील्ड कार्य की वास्तविक जरूरतों के लिए तैयार करते हैं। प्रतिभागियों ने विशेष रूप से आधुनिक प्रयोगशाला उपकरणों के साथ काम करने के अनुभव की सराहना की।
समापन सत्र में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। प्रमाणपत्र वितरण के दौरान छात्रों के उत्साह और संतोष को स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता था। प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय और आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह इंटर्नशिप उनके करियर विकास में उपयोगी साबित होगी।
बीएयू सबौर द्वारा आयोजित यह राष्ट्रीय ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम एक बार फिर विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत कौशल विकास, नवाचार और व्यावहारिक कृषि शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। यह पहल न केवल छात्रों के ज्ञान को समृद्ध करती है, बल्कि देश के कृषि क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित और सक्षम मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। आने वाले समय में इस तरह के कार्यक्रम कृषि शिक्षा को और अधिक आधुनिक तथा प्रभावी बनाने में सहायक साबित होंगे।


