असिस्टेंट प्रोफेसर का इंटरव्यू देने जा रही थी पत्नी, डॉक्टर पति ने रास्ते में दिया तीन तलाक; विरोध करने पर बोला- मैं सिर्फ शरीयत को मानता हूं

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने एक बार फिर दहेज उत्पीड़न, वैवाहिक विवाद और तीन तलाक जैसे संवेदनशील मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक उच्च शिक्षित महिला ने अपने डॉक्टर पति और ससुराल पक्ष के कई सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि उसे शादी के बाद लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया गया और आखिरकार उसके पति ने उसे दो अलग-अलग मौकों पर तीन तलाक कहकर रिश्ता खत्म करने की कोशिश की।

पीड़िता के अनुसार, पहली घटना उस समय हुई जब वह उत्तराखंड में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए इंटरव्यू देने जा रही थीं। वहीं दूसरी बार परिवार न्यायालय में सुनवाई के दौरान भी पति ने तलाक की बात दोहराई। मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

निकाह के कुछ समय बाद बदल गया माहौल

पीड़ित महिला, जिनका नाम गोपनीयता के लिए बदला गया है, ने पुलिस को बताया कि उनका निकाह वर्ष 2019 में हरिद्वार निवासी एक डॉक्टर से हुआ था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटी का विवाह एक पढ़े-लिखे और प्रतिष्ठित परिवार में हो रहा है, जिससे उसका भविष्य सुरक्षित रहेगा।

लेकिन महिला का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष का व्यवहार बदलने लगा। शुरुआत में उसे ताने दिए जाने लगे और बाद में दहेज को लेकर दबाव बनाया जाने लगा। महिला का कहना है कि उसके गहने भी अपने कब्जे में ले लिए गए और उसे लगातार कम दहेज लाने की बात कहकर अपमानित किया जाता था।

अस्पताल और पढ़ाई के नाम पर पैसों की मांग

महिला के मुताबिक, ससुराल पक्ष का कहना था कि उनका बेटा एक डॉक्टर है और उसे आगे की पढ़ाई करनी है। साथ ही भविष्य में निजी अस्पताल खोलने की योजना भी थी। इसी आधार पर महिला और उसके परिवार से बड़ी आर्थिक मदद की अपेक्षा की जा रही थी।

परिजनों का आरोप है कि जब उनकी ओर से ऐसी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो महिला के साथ दुर्व्यवहार बढ़ गया। उसे मानसिक दबाव में रखा जाने लगा और कई बार मारपीट की घटनाएं भी हुईं।

मायके लौटने को मजबूर हुई महिला

लगातार विवाद और प्रताड़ना के कारण महिला कुछ समय बाद अपने मायके लौट आई। इसी दौरान उसने एक बेटे को जन्म दिया। परिवार के प्रयासों और रिश्तेदारों की पहल के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ और महिला एक बार फिर ससुराल चली गई।

हालांकि, पीड़िता का कहना है कि हालात में कोई बदलाव नहीं आया और उसे फिर से प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। अंततः वह दोबारा अपने मायके लौट आई और वहीं रहने लगी।

इंटरव्यू देने जा रही थी, रास्ते में हुआ विवाद

महिला ने अपनी शिकायत में एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उसके अनुसार, जनवरी 2025 में वह अपने पिता के साथ उत्तराखंड में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आयोजित इंटरव्यू में शामिल होने जा रही थीं।

इसी दौरान उनके पति और कुछ अन्य लोग वहां पहुंचे और उनका रास्ता रोक लिया। महिला का आरोप है कि इस दौरान उनसे कुछ मांगों को मानने का दबाव बनाया गया और विवाद बढ़ने पर पति ने सार्वजनिक रूप से तीन तलाक बोल दिया।

महिला का कहना है कि इस घटना का उनके पिता पर भी गहरा असर पड़ा और उनकी तबीयत बिगड़ गई।

परिवार न्यायालय में फिर दोहराई गई बात

महिला ने वैवाहिक विवाद को कानूनी तरीके से सुलझाने के लिए परिवार न्यायालय का सहारा लिया। लेकिन उनका आरोप है कि न्यायालय में सुनवाई के दौरान भी पति ने तीन तलाक की बात दोहराई।

महिला के अनुसार, पति ने यह भी कहा कि वह केवल धार्मिक नियमों को मानता है और भारतीय कानून को स्वीकार नहीं करता। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता की जांच पुलिस और न्यायालय की प्रक्रिया के तहत की जा रही है।

आर्थिक अनियमितताओं के आरोप भी लगाए

शिकायत में महिला ने कुछ आर्थिक अनियमितताओं के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि उनसे कुछ ऐसे दस्तावेजों और प्रक्रियाओं में सहयोग करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था, जिन्हें वह सही नहीं मानती थीं।

महिला का आरोप है कि जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया तो उनके साथ मारपीट और धमकी की घटनाएं बढ़ गईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी।

पुलिस अधिकारियों से लगाई न्याय की गुहार

लगातार विवाद और कथित धमकियों से परेशान होकर महिला ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया और मामले में कार्रवाई की मांग की। शिकायत के बाद संबंधित थाना पुलिस को जांच के निर्देश दिए गए।

इसके बाद पुलिस ने पति और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया और जांच शुरू कर दी।

पुलिस कर रही है सभी पहलुओं की जांच

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और उपलब्ध दस्तावेजों एवं साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

तीन तलाक पर कानून क्या कहता है?

भारत में तत्काल तीन तलाक को लेकर वर्ष 2019 में कानून बनाया गया था। इस कानून के तहत एक साथ तीन बार तलाक कहकर विवाह समाप्त करने की प्रथा को अवैध घोषित किया गया है। ऐसे मामलों में शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी है।

हालांकि, किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आता है। इसलिए आरोपों और तथ्यों की पुष्टि जांच एजेंसियों और अदालतों द्वारा की जाती है।

समाज के सामने खड़े होते सवाल

यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं बल्कि समाज के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े करता है। शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और कानूनी जागरूकता के बावजूद वैवाहिक संबंधों में उत्पन्न होने वाले विवाद आज भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि परिवारों के बीच संवाद, पारदर्शिता और आपसी सम्मान किसी भी रिश्ते की सबसे मजबूत नींव होते हैं। वहीं, कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी भी ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में जांच के बाद मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। वहीं पीड़िता ने न्याय और सुरक्षा की मांग करते हुए प्रशासन से उचित कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

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