रिश्वतखोरी में फंसे बरौली के राजस्व अधिकारी निलंबित, विजिलेंस ने 6500 रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा

पटना/गोपालगंज — बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत एक और बड़ा मामला सामने आया है। गोपालगंज जिले के बरौली अंचल में पदस्थापित राजस्व अधिकारी विजय कुमार सिंह को रिश्वत लेने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने उन्हें दाखिल-खारिज के काम के बदले घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है। विभागीय स्तर पर तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

विजिलेंस टीम ने जाल बिछाकर की गिरफ्तारी

जानकारी के अनुसार 13 जनवरी को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की सात सदस्यीय टीम ने बरौली अंचल कार्यालय में छापेमारी की थी। टीम का नेतृत्व निगरानी अधीक्षक नागेंद्र कुमार कर रहे थे।

विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि राजस्व अधिकारी विजय कुमार सिंह जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत की पुष्टि होने के बाद टीम ने जाल बिछाया और आरोपी अधिकारी को 6500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।

तीन साल से भटक रहा था किसान

यह पूरा मामला बरौली थाना क्षेत्र के बघेझी गांव निवासी अमरेंद्र साह से जुड़ा बताया जा रहा है। अमरेंद्र अपनी करीब 9.3 डिसमिल जमीन के दाखिल-खारिज के लिए पिछले तीन वर्षों से कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे।

आरोप है कि राजस्व अधिकारी ने उनका काम कराने के लिए 20 हजार रुपये की मांग की थी। बार-बार की मांग और परेशानियों से तंग आकर अमरेंद्र साह ने निगरानी विभाग से शिकायत की। शिकायत के आधार पर विजिलेंस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारी को पकड़ लिया।

सरकार का कड़ा रुख

मामले के सामने आने के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्त रुख अपनाया। डिप्टी सीएम और राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर आरोपी अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

बताया गया है कि बिहार सरकारी सेवक नियमावली 2005 के तहत यह कार्रवाई की गई है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है, ताकि आगे की सेवा से संबंधित निर्णय लिया जा सके।

मुजफ्फरपुर में रहेगा मुख्यालय

निलंबन अवधि के दौरान विजय कुमार सिंह का मुख्यालय बदल दिया गया है। उन्हें तिरहुत प्रमंडल आयुक्त कार्यालय, मुजफ्फरपुर में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है। न्यायिक हिरासत से बाहर आने के बाद उन्हें वहीं नियमित रूप से उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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