बिहार के बगहा व्यवहार न्यायालय में चौतरवा थाना क्षेत्र के एक चर्चित हत्याकांड मामले में बड़ा फैसला सुनाया गया है। एडीजे फोर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने चारों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक अभियुक्त पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अर्थदंड नहीं देने पर अतिरिक्त सजा
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषी अर्थदंड की राशि अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। यह मामला स्पीडी ट्रायल के तहत चलाया गया था, जिसमें सुनवाई पूरी होने के बाद सजा का ऐलान किया गया।
2022 का है मामला
यह हत्याकांड वर्ष 2022 से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार 17 जून 2022 को दीपक यादव (नाम परिवर्तित) घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। काफी खोजबीन के बाद भी जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने चौतरवा थाना में पहले गुमशुदगी और बाद में हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई।
छह दिन बाद मिला था कंकाल
23 जून 2022 को दीपक का कंकाल गन्ना के खेत से बरामद किया गया। इस संबंध में चौतरवा थाना कांड संख्या 239/22 दर्ज की गई थी। पुलिस जांच में मृतक की पत्नी को इस हत्याकांड का मुख्य अभियुक्त बनाया गया।
पत्नी पर साजिश रचने का आरोप
अभियोजन के अनुसार मृतक की पत्नी का पति से विवाद चल रहा था और उसका कृष्णा साह के साथ प्रेम संबंध था। इसी कारण उसने अपने कथित प्रेमी कृष्णा साह के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची। इस मामले में अन्य अभियुक्तों में रणजीत राम और छोटेलाल शामिल थे।
जमानत रद्द, हिरासत में लेने का आदेश
पत्नी को 8 जुलाई 2022 को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था और वह तब से जेल में बंद थी। रणजीत राम भी जेल में था, जबकि कृष्णा साह और छोटेलाल जमानत पर थे। अदालत के फैसले के बाद दोनों की जमानत रद्द कर दी गई और उन्हें तत्काल हिरासत में लेने का आदेश दिया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं
अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र भारती और सतेन्द्र मिश्रा ने बहस की, जबकि बचाव पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी के अभाव सहित कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई। सभी दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने चारों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।


