“मां का दूध – नवजात के लिए अमृत, मां के लिए सुरक्षा कवच”
भागलपुर, 7 अगस्त 2025 —इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) की भागलपुर शाखा द्वारा एसएम कॉलेज, खंजरपुर में विश्व स्तनपान सप्ताह 2025 के अवसर पर भव्य जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य माताओं को स्तनपान के प्रति जागरूक करना और युवा छात्राओं को इससे जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी देना था।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसमें IMA अध्यक्ष डॉ. रेखा झा, IAP बिहार के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आर.के. सिन्हा, IAP भागलपुर के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह, जेएलएनएमसीएच के शिशु विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर प्रियदर्शी और IAP सचिव डॉ. सुदर्शन झा शामिल रहे।
इसके बाद मेडिकल छात्रों और IAP के सदस्यों द्वारा स्तनपान के समर्थन में एक प्रेरणादायक रैली निकाली गई, जिसने कॉलेज परिसर में जागरूकता की लहर दौड़ा दी।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा,
“मां के दूध का कोई विकल्प नहीं, यह संकल्प हमें आज लेना होगा। शिशु को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराना और पहले छह महीने तक केवल मां का दूध देना – यही स्वस्थ बचपन और मजबूत राष्ट्र की नींव है।”
कार्यक्रम में डॉ. आर.के. सिन्हा और डॉ. रेखा झा ने छात्राओं को मां के दूध के वैज्ञानिक और भावनात्मक महत्व को समझाया।
कार्यक्रम के वैज्ञानिक चेयरमैन डॉ. अंकुर प्रियदर्शी ने बताया,
“मां का दूध हर हफ्ते के अनुसार बदलता है – यदि शिशु समय से पूर्व (प्रीमेच्योर) जन्मा है, तो दूध भी उसी हिसाब से पोषण देता है। इसमें मौजूद जीवंत तत्व नवजात को प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते हैं। इसे गर्म करने की जरूरत नहीं, यह हर मौसम में संपूर्ण और संक्रमण रहित होता है।”
डॉ. सुदर्शन झा ने कहा,
“मां का दूध केवल बच्चे को नहीं, मां को भी अनेक रोगों से बचाता है – जैसे स्तन कैंसर और ओवरी कैंसर की आशंका कम होती है। यह प्रकृति का दिया ऐसा उपहार है जो मुफ्त, तुरंत और सुरक्षित है।”
कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डॉ. हिमांशु शेखर, डॉ. प्रीता बसु, डॉ. डाली सहित अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। मंच संचालन स्नेहा और उषा ने किया।
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की स्वयंसेविकाओं – दिव्या, मनीषा, कीर्ति झा, प्रिया और नेहा ने आयोजन में विशेष भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि आने वाली पीढ़ी को सही पोषण और सही परामर्श देना हम सबकी ज़िम्मेदारी है। IAP के इस प्रयास को छात्राओं, शिक्षकों और समाज के विभिन्न वर्गों से सराहना मिली।


