पटना, 30 अगस्त।बिहार में मकान मालिक और किरायेदार के बीच कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किरायानामा निबंधन को लेकर लोगों में जागरूकता लगातार बढ़ रही है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात वर्षों (2018 से 2025) में पूरे राज्य में 4,811 किरायानामा निबंधित कराए गए हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 इस मामले में सबसे अहम रहा, जब कुल 842 लोगों ने किरायानामा का रजिस्ट्रेशन कराया। वहीं 2022 में 702, 2024 में 607 और 2025 में अब तक 643 लोगों ने निबंधन कराया है।
व्यावसायिक भवनों का निबंधन अधिक
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि किरायानामा आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक सभी प्रकार की संपत्तियों के लिए किया जाता है। हालांकि, अब तक हुए निबंधनों में व्यावसायिक भवनों की संख्या आवासीय भवनों की तुलना में अधिक है।
हर साल के आंकड़े
- 2018 – 643
- 2019 – 678
- 2020 – 266
- 2021 – 430
- 2022 – 702
- 2023 – 842
- 2024 – 607
- 2025 (अब तक) – 643
निबंधित किरायानामा क्यों है जरूरी?
निबंधित किरायानामा दोनों पक्षों – मकान मालिक और किरायेदार – के हितों की सुरक्षा करता है। इसमें तय शर्तों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है। विवाद की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया आसान हो जाती है। साथ ही, आपसी सहमति से किरायानामा रद्द भी किया जा सकता है।
स्टाम्प शुल्क पर सरकार की छूट
सरकार ने किरायानामा को बढ़ावा देने के लिए स्टाम्प शुल्क बेहद कम रखा है। किराए के मूल्य का केवल 0.5 प्रतिशत शुल्क लिया जाता है। यह प्रक्रिया सभी निबंधन कार्यालयों के साथ-साथ ऑनलाइन भी उपलब्ध है। निबंधन के लिए मकान मालिक और किरायेदार दोनों का आधार कार्ड या वोटर आईडी और पासपोर्ट साइज फोटो आवश्यक है।


