पटना के रानीतालाब में ‘बालू माफिया’ का दुस्साहस! पुलिस टीम पर 12 राउंड फायरिंग और पथराव; 4 सिपाही समेत 5 घायल

HIGHLIGHTS: सोन नद के किनारे ‘रणक्षेत्र’ बना धनराज छपरा

  • बड़ा हमला: अवैध बालू खनन रोकने गई पुलिस टीम पर 150 से अधिक लोगों ने किया हमला।
  • खूनी संघर्ष: माफियाओं ने पुलिस पर बरसाईं गोलियां; जवाब में पुलिस ने भी आत्मरक्षा में की फायरिंग।
  • घायल जांबाज: 4 सिपाही और 1 होमगार्ड जवान जख्मी; पुलिस वाहन को भी पहुंचाया नुकसान।
  • बरामदगी: मौके से 4 ट्रैक्टर, 3 बाइक और एक ‘तलवार’ जब्त।

पटना (रानीतालाब) | 18 मार्च, 2026

​राजधानी पटना के ग्रामीण इलाकों में बालू माफियाओं का दुस्साहस कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार की रात रानीतालाब थाना क्षेत्र का धनराज छपरा गांव उस वक्त गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा, जब अवैध खनन के खिलाफ छापेमारी करने गई पुलिस टीम को माफियाओं ने चारों तरफ से घेर लिया। अंधेरे का फायदा उठाकर किए गए इस हमले में कई पुलिसकर्मी लहूलुहान हो गए हैं।

छापेमारी की ‘इनसाइड स्टोरी’: जब माफिया ने दिखाई दादागिरी

​घटनाक्रम की शुरुआत सोमवार शाम 7:30 बजे हुई:

  • गुप्त सूचना: पुलिस को खबर मिली थी कि सोन नदी से 15 ट्रैक्टरों पर अवैध बालू लादकर निकाला जा रहा है।
  • पुलिस की दबिश: जैसे ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और ट्रैक्टरों को पकड़ना शुरू किया, माफियाओं के गुर्गे उग्र हो गए।
  • हमला: कार्रवाई से नाराज माफियाओं और उनके समर्थकों ने पुलिस पर ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते 10-12 राउंड फायरिंग की गई।
  • जवाबी कार्रवाई: पुलिस ने भी आत्मरक्षा में 4 राउंड हवाई फायरिंग की, जिसके बाद हमलावर भाग निकले।

अपराधियों का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में

  • कुल घायल: 5 पुलिसकर्मी (4 सिपाही और 1 होमगार्ड)।
  • फायरिंग: माफियाओं की ओर से 10-12 राउंड, पुलिस की ओर से 4 राउंड।
  • प्राथमिकी (FIR): 15 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज।
  • जब्त सामान: 4 बालू लदे ट्रैक्टर, 3 मोटरसाइकिल और 1 तलवार।
  • पुलिस कमान: प्रशिक्षु डीएसपी विनय रंजन के नेतृत्व में जारी है छापेमारी।

VOB का नजरिया: क्या ‘सफेद सोने’ की चमक के आगे कानून बेअसर है?

​सोन नदी के बालू को ‘सफेद सोना’ कहा जाता है, और इसकी अवैध कमाई ने माफियाओं के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि वे अब वर्दी पर हाथ डालने से भी नहीं कतरा रहे। 150 लोगों का एक साथ पुलिस पर हमला करना यह बताता है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है। मौके से तलवार का मिलना इस बात का प्रमाण है कि माफिया हर वक्त खून-खराबे के लिए तैयार रहते हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का सवाल है— जब प्रशिक्षु डीएसपी स्तर के अधिकारी पर हमला हो सकता है, तो क्या आम जनता इन माफियाओं के सामने सुरक्षित है? पुलिस को अब केवल ट्रैक्टर नहीं, बल्कि इन माफियाओं के ‘आकाओं’ को सलाखों के पीछे भेजना होगा।

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