‘आशा’ को खुशियों का ट्रिपल डोज, ‘ममता’ को मिलेगा दोगुना सम्मान

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की आशा व ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि में भारी वृद्धि की घोषणा

पटना | 31 जुलाई 2025: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे रही महिलाओं को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा उपहार दिया है। राज्य सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि को तीन गुना और ममता कार्यकर्ताओं की राशि को दोगुना करने का फैसला लिया है। अब आशा कार्यकर्ताओं को प्रत्येक माह 1,000 रुपये की जगह 3,000 रुपये, जबकि ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 300 रुपये की जगह 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।

इस निर्णय से राज्य की लगभग एक लाख आशा और ममता कार्यकर्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। सरकार ने इसे ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।


सीएम ने ‘एक्स’ पर दी जानकारी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर यह घोषणा साझा की। उन्होंने लिखा:

“नवम्बर 2005 से हमारी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए कई कदम उठाए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आशा और ममता कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद अहम रही है। उनके योगदान के सम्मान में उनकी मानदेय राशि में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इससे न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में भी सुधार होगा।


स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं आशा-ममता कार्यकर्ता

आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) और ममता कार्यकर्ता राज्य की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला हैं। ये महिलाएं टीकाकरण, प्रसव, मातृ-शिशु देखभाल, पोषण जागरूकता और अन्य प्राथमिक सेवाएं गाँव-गाँव तक पहुंचाती हैं।

सुदूर और सीमावर्ती गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में इनकी भूमिका अमूल्य मानी जाती है। सरकार द्वारा इनकी प्रोत्साहन राशि में वृद्धि को उनके समर्पण और सेवा भावना का सम्मान माना जा रहा है।


प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी: पहले और अब

कार्यकर्ता का नाम पूर्व प्रोत्साहन राशि नई प्रोत्साहन राशि वृद्धि
आशा कार्यकर्ता ₹1,000 प्रति माह ₹3,000 प्रति माह 3 गुना
ममता कार्यकर्ता ₹300 प्रति प्रसव ₹600 प्रति प्रसव 2 गुना

राज्य सरकार के इस फैसले को स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकार महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक ठोस कदम मान रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस घोषणा से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊर्जा और महिला स्वास्थ्य कर्मियों को नया सम्मान मिलेगा।


 

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