आसाराम बापू की मुश्किलें बढ़ीं, सुप्रीम कोर्ट ने सजा स्थगित करने की याचिका पर विचार करने से किया इनकार

रेप के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू संत आसाराम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें आसाराम की सजा स्थगित करने का अनुरोध किया गया था।  जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने आसाराम की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत से कहा कि यह अदालत याचिका पर विचार करने का इच्छुक नहीं है। पीठ ने उनसे उसकी (आसाराम की) उम्रकैद की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील पर दलील की तैयारी करने को कहा।

जोधपुर की अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

आसाराम को जोधपुर की एक निचली अदालत ने 25 अप्रैल 2018 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। कामत ने दलील दी कि उनका मुवक्किल करीब 10 साल से जेल में है और हाईकोर्ट ने उसके खराब स्वास्थ्य के पहलू पर विचार नहीं कर त्रुटि की। पीठ ने कहा, ‘‘आपको एक नियमित अपील के लिए तैयारी करनी चाहिए, जो हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए आनी है।’’ इसने कहा कि यह राजस्थान हाईकोर्ट के सात जुलाई 2022 के आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज करने की इच्छुक है। कामत ने अदालत से अपील खाारिज नहीं करने का अनुरोध किया और कहा कि वह इसे वापस लेना चाहते हैं।

किशोरी के साथ रेप के मामले में इंदौर से हुई थी गिरफ्तारी

इसके बाद पीठ ने उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और कहा कि यदि आसाराम की दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ नियमित अपील शीघ्रता से सुनवाई के लिए नहीं ली गई, तो उन्हें सजा स्थगित कराने के लिए हाईकोर्ट के समक्ष नयी अर्जी दायर करने की छूट होगी। आसाराम अपने आश्रम में एक किशोरी के साथ बलात्कार के मामले में इंदौर में गिरफ्तार किये जाने और जोधपुर लाए जाने के बाद, दो सितंबर 2013 से जेल में है।

करीब चार साल से ज्यादा समय तक चली सुनवाई के बाद 2018 में ट्रायल कोर्ट ने आसाराम को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि आसाराम की गिरफ्तारी के बाद सूरत की दो महिलाओं ने भी शिकायत दर्ज कराई और यह आरोप लगाया कि वर्ष 2002 और 2005 के बीच आसाराम और उनके बेटे ने उनके साथ रेप किया। इस बीच आसाराम कई बार अपनी उम्र का हवाला देते हुए जमानत की अपील कर चुके हैं लेकिन हर बार उनकी याचिका खारिज हो जा रही है।

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