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गंगा और कोसी नदी का जलस्तर बढ़ते ही पत्थर टोला में कटाव शुरू, ग्रामीणों में दहशत

ByAditya

Jun 11, 2021

कटिहार। गंगा और कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से रेलवे गाइड डैम के पास पाथर टोला गांव की ओर तेजी से कटाव हो रहा है। कटाव की रफ्तार देख गांव के लोगों में दहशत है।गंगा और कोसी नदी के कटाव से गांव के अस्तित्व को खतरा होने का अंदेशा है। प्रतिदिन लगभग एक एकड़ उपजाऊ भूमि कोसी नदी में समाहित हो रही है। ग्रामीणों का मानना ​​है कि जिस तेजी से कटाव हो रहा है, वह लोगों को पलायन करने पर मजबूर कर देगा। वहीं दूसरी तरफ लगातार उपजाऊ जमीन की कटाई से किसान परेशान हैं। उन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि रोजगार के अभाव में परिवार का भरण पोषण कैसे होगा, जबकि आजीविका का साधन ही उर्वर भूमि है, जो कोसी और गंगा नदी में समा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन का ध्यान भी कटाव की ओर खींचा गया, लेकिन अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई पहल नहीं की गई है। ऐसे में नदी के कटाव से ग्रामीण रात में जागने को मजबूर हैं।

ज्ञात हो कि स्थानीय लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से पिछले वर्ष 57 करोड़ रुपये की लागत से पाथर टोला के अंतर्गत गंगा के मुहाने के पास जीरो पॉइंट गंगा और कोसी के चार किलोमीटर पूर्व तक कटाव रोधी कार्य शुरू किया गया था।  पत्थर टोला के पास जीरो पॉइंट से 500 मीटर की दूरी पर उत्तर रेलवे पुल का ठोकर है, जो क्षतिग्रस्त कुर्सेला जोनिया सुरक्षा तटबंध से पाया जाता है। पूर्व की ओर कोसी नदी द्वारा रेलवे पुल के नीचे जीरो पॉइंट तक कटाव हो रहा है। जल संसाधन विभाग की लापरवाही से सुरक्षा तटबंध और पत्थर टोले तक कटाव हो रहा है. ग्रामीणों ने प्रशासन व जल संसाधन विभाग से कटान रोधी कार्य जल्द से जल्द कराने की मांग की है, ताकि पाथर टोला गांव के अस्तित्व को बचाया जा सके।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र : बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में छाया टोला, खरवार टोला, कटारिया, दक्षिण मुरादपुर पंचायत का छाया टोला, खरवार टोला, कटारिया, दक्षिण मुरादपुर पंचायत का खेरिया, तिंगहरिया, बालू टोला, गांधी गांव, बिड टोली, पत्थर टोला, पूर्वी मुरादपुर पंचायत का कमलकानाही, बसुहर मजदिया शामिल हैं। जरलाही पंचायत के मोकना टोला, गुमटी टोला, पश्चिम मुरादपुर पंचायत के बाघमारा, पंचखुट्टी, मेहर मियां टोला में बाढ़ पूर्व तैयारियों के संबंध में अंचल अधिकारी अमर कुमार वर्मा ने बताया कि प्रखंड में आठ सरकारी नावें हैं, जिनमें से चार की मरम्मत की जा चुकी है और चार क्षतिग्रस्त हैं। 58 निजी नाव मालिकों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। 27 हाई रिफ्यूज को चिह्नित किया गया है। छह स्थानों पर पशु राहत शिविरों की पहचान की गई है। विषम परिस्थितियों के लिए तीन हेलीपैड के स्थान भी चिह्नित किए गए हैं।