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घाटी में सेना ने 6 एनकाउंटर में 9 आतंकी मारे, पुलवामा का बदला होने वाला है पूरा

ByShailesh Kumar

Oct 14, 2021

जम्मू-कश्मीर में कई हत्याओं के बाद चलाए गए आतंकवाद विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों ने बुधवार को जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडर शमीम अहमद सोफी को मार गिराया है। इसी के साथ पुलवामा हमले का बदला भी पूरा होने वाला है। पिछले कुछ दिनों में आतंकियों और सुरक्षाबलों के साथ कुल 6 एनकाउंटर हुए हैं जिसमें 9 आंतकियों को ढेर किया गया है। बुधवार को सोफी की मुठभेड़ को सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सफलात के रूप में देखा जा रहा है।

अवंतीपोरा में चलाए गए आतंकविरोधी अभियानों में सोफी सुरक्षा बलों को चमका देते हुए भाग खड़ा हुआ था। तब जैश प्रमुख मसूद अजहर का भतीजा, मोहम्मद इस्माइल अल्वी उर्फ ​​लम्बू, और स्थानीय आतंकवादी समीर अहमद डार मारा गया था। लम्बू और डार पुलवामा हमले की योजना बनाने में शामिल थे, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवानों की जान चली गई थी।

गृह मंत्री के निर्देश के बाद एक्शन में सुरक्षा बल

सोफी की मुठभेड़ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से घाटी में हुई हत्याओं से अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और पाकिस्तान समर्थित स्थानीय मॉड्यूल से जुड़े आतंकवादियों के खिलाफ कड़े कार्रवाई के निर्देश के कुछ दिनों बाद हुई है। गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों से आतंकवाद निरोधी विशेषज्ञों को कश्मीर भेजने और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। घाटी में हाल ही में एक प्रमुख कश्मीरी पंडित फार्मासिस्ट और एक सिख स्कूल के प्रिंसिपल सहित कई अल्पसंख्यक नागरिकों की हत्या हुई है।

2019 में घर छोड़कर जैश-ए-मोहम्मद में हुआ था शामिल

जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा के त्राल इलाके के तिलवानी मोहल्ला में हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने सोफी को मार गिराया। सोफी, जो 2019 में घर छोड़कर जैश-ए-मोहम्मद संगठन के आतंकवादी रैंक में शामिल हो गया था। इसके बाद से यह घाटी में युवाओं को आतंकवाद में शामिल होने के लिए उन्हें प्रेरित कर रहा था। सोफी का पुलवामा हमले की योजना और साजिश में शामिल आईईडी विशेषज्ञ लम्बू से भी संपर्क था।

शादी के दो साल राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में हुआ था शामिल

1974 में सतूरा अरिपाल गांव में जन्मे जैश के मारे गए कमांडर सोपी ने गरीबी के कारण पढ़ाई छोड़ दी थी और एक दुकानदार के रूप में भी काम किया था। बीच में शादी भी हुई और दो साल तक दुकानदारी करने के बाद उसने 2004 में अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया। यहीं से यह राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल हुआ और एक तलाशी अभियान के दौरान स्थानीय पुलिस ने इसे गिरफ्तार भी किया था।

सोफी के पास से गोला बारूद बरामद

सोफी को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत दो साल के लिए हिरासत में लिया गया था, लेकिन जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद रिहा कर दिया गया था। इसके बाद वो जैश संगठन में शामिल होने से पहले मनरेगा में एक ठेकेदार के रूप में भी काम किया। जम्मू-कश्मीर पुलिस के विश्वसनीय इनपुट के आधार पर मुठभेड़ में मारे गए सोफी के पास से सुरक्षाबलों ने एक एके 56, तीन एके मैगजीन, 55 राउंड गोला बारूद और दो हथगोला बरामद किया है।