
मुख्य बिंदु:
- प्रशासनिक कार्रवाई: अररिया जिलाधिकारी विनोद दूहन ने कर्तव्य में कोताही बरतने वाले तीन राजस्व कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया।
- निलंबित कर्मचारी: फारबिसगंज अंचल के विकास कुमार मंडल व राजेश कुमार शशि और नरपतगंज अंचल की रेणु कुमारी पर गिरी गाज।
- बड़ी आंच: नरपतगंज के अंचलाधिकारी (सीओ) रवींद्र कुमार के खिलाफ भी प्रपत्र ‘क’ में आरोप पत्र गठित करने का आदेश।
- वजह: बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन और आम जनता के कार्यों में अनावश्यक विलंब।
- आधिकारिक पुष्टि: जिला एवं जनसंपर्क पदाधिकारी शंभू रजक ने कार्रवाई की विस्तृत जानकारी साझा की।
अररिया। बिहार के प्रशासनिक ढांचे में भ्रष्टाचार और कार्य के प्रति उदासीनता को जड़ से मिटाने के लिए राज्य सरकार के सख्त निर्देशों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। अररिया जिले में राजस्व विभाग के भीतर फैले ‘सिस्टम के दीमक’ को साफ करने के लिए जिलाधिकारी विनोद दूहन ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। जिलाधिकारी ने शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही, अकर्मण्यता और नियम-विरुद्ध कार्य करने के आरोप में तीन राजस्व कर्मचारियों को सेवा से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई केवल उन कर्मचारियों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि विभागीय जवाबदेही तय करते हुए नरपतगंज के अंचलाधिकारी के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अररिया समाहर्ता की इस धमक ने जिले के अन्य अंचल कार्यालयों में हड़कंप मचा दिया है, जहाँ फाइलों के बोझ और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बीच आम आदमी पिस रहा था।
दाखिल-खारिज में ‘खेल’ और नियमों की बलि: कार्रवाई की पृष्ठभूमि
बिहार में भूमि सुधार और दाखिल-खारिज (Mutation) की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ‘बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम’ के तहत कड़े प्रावधान किए हैं। इसके बावजूद, अररिया के विभिन्न अंचलों से लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि राजस्व कर्मचारी जानबूझकर आवेदनों को लंबित रखते हैं या नियमों को ताक पर रखकर अपनी मर्जी से फाइलों का निपटारा करते हैं।
जिलाधिकारी विनोद दूहन ने इन शिकायतों की गुप्त जांच कराई और विभागीय समीक्षा के दौरान पाया कि फारबिसगंज और नरपतगंज अंचल में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। फारबिसगंज अंचल के विकास कुमार मंडल और राजेश कुमार शशि की कार्यशैली को लेकर लंबे समय से उंगलियां उठ रही थीं। वहीं, नरपतगंज अंचल की रेणु कुमारी पर भी सरकारी निर्देशों की अवहेलना का दोष सिद्ध पाया गया। इन तीनों कर्मचारियों पर आरोप है कि इन्होंने दाखिल-खारिज के मामलों में न केवल विलंब किया, बल्कि अधिनियम की उन धाराओं का उल्लंघन किया जो आम जनता को समयबद्ध सेवा देने की गारंटी देती हैं।
नरपतगंज सीओ पर भी बड़ी आंच: प्रपत्र ‘क’ का साया
जिलाधिकारी की यह कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने यह संदेश भी दिया है कि अंचल का मुखिया अपने अधीनस्थों की गलतियों के लिए उतना ही जिम्मेदार है। नरपतगंज के अंचलाधिकारी रवींद्र कुमार के खिलाफ प्रपत्र ‘क’ (Prapatra Ka) में आरोप पत्र गठित करने का निर्देश देना इस बात का प्रमाण है कि जिला प्रशासन अब ‘लीपापोती’ के मूड में नहीं है।
प्रशासनिक शब्दावली में प्रपत्र ‘क’ का गठन तब किया जाता है जब किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर विभागीय जांच की आवश्यकता होती है और प्रथम दृष्टया उनके विरुद्ध ठोस सबूत मिलते हैं। रवींद्र कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अपने अंचल में कार्यरत राजस्व कर्मचारियों की गतिविधियों पर न तो अंकुश लगाया और न ही दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने में रुचि ली। एक अंचलाधिकारी के रूप में उनकी विफलता ने नरपतगंज की जनता के लिए बड़ी समस्याएं खड़ी कर दी थीं।
सुशासन की कसौटी पर राजस्व विभाग: शंभू रजक की रिपोर्ट
जिला एवं जनसंपर्क पदाधिकारी शंभू रजक ने इस पूरी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि जिलाधिकारी ने यह कदम साक्ष्यों के आधार पर उठाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निलंबित किए गए तीनों कर्मचारियों को निलंबन अवधि के दौरान नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा और इनका मुख्यालय अलग-अलग स्थानों पर निर्धारित किया गया है।
शंभू रजक के अनुसार, जिलाधिकारी ने समीक्षा के दौरान पाया कि भूमि सुधार के लक्ष्यों को प्राप्त करने में ये कर्मचारी बाधक बन रहे थे। बिहार सरकार की प्राथमिकता है कि भूमि विवादों को कम करने के लिए दाखिल-खारिज और ऑनलाइन लगान रसीद जैसी सेवाओं को त्रुटिहीन बनाया जाए। अररिया में जिस तरह से नियमों का उल्लंघन किया गया, उससे राज्य के वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।
आम जनता की पीड़ा और भ्रष्टाचार का गठजोड़
अररिया जैसे सीमावर्ती जिले में भूमि विवाद अक्सर हिंसक रूप ले लेते हैं। इन विवादों की जड़ में अक्सर राजस्व कर्मचारियों की सुस्ती या उनके द्वारा की गई गलत प्रविष्टियाँ होती हैं। आम किसान जब अपनी जमीन का म्यूटेशन कराने अंचल कार्यालय पहुँचता है, तो उसे ‘राजस्व कर्मचारी-बिचौलिया’ के उस मकड़जाल का सामना करना पड़ता है जहाँ बिना ‘सुविधा शुल्क’ के फाइल आगे नहीं बढ़ती।
विकास कुमार मंडल, राजेश कुमार शशि और रेणु कुमारी पर हुई कार्रवाई ने उस गठजोड़ पर प्रहार किया है जो वर्षों से राजस्व महकमे को अपनी जागीर समझे बैठा था। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो भी फाइलें लंबित हैं, उनका निष्पादन अब युद्धस्तर पर किया जाए और किसी भी आवेदक को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
निष्कर्ष: अन्य अधिकारियों के लिए कड़ी चेतावनी
विनोद दूहन की यह कार्रवाई अररिया जिले के बाकी सात अंचलों के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और लेटलतीफी के खिलाफ यह एक निर्णायक युद्ध की शुरुआत मानी जा रही है। अगर एक अंचलाधिकारी स्तर के अधिकारी पर प्रपत्र ‘क’ गठित हो सकता है, तो यह स्पष्ट है कि प्रशासन में जवाबदेही की नई परिभाषा लिखी जा रही है।
अब देखना यह होगा कि इस कार्रवाई के बाद अररिया के अंचल कार्यालयों में फाइलों की रफ्तार कितनी बढ़ती है और क्या आम आदमी को बिना किसी सिफारिश या रिश्वत के अपना अधिकार मिल पाता है। फिलहाल, तीन कर्मचारियों के निलंबन और एक अधिकारी पर जांच की तलवार ने अररिया के प्रशासनिक गलियारों में शुचिता की नई उम्मीद जगा दी है।


