आरा में दर्दनाक सड़क हादसा: पटना ड्यूटी जा रहे स्पेशल ब्रांच ASI की स्कूल बस की टक्कर से मौत, सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

बिहार में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसे अब चिंता का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। हर दिन कहीं न कहीं तेज रफ्तार और लापरवाही लोगों की जान ले रही है। ताजा मामला भोजपुर जिले के आरा शहर से सामने आया है, जहां सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में बिहार पुलिस की स्पेशल ब्रांच में तैनात एएसआई की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा इतना भयावह था कि घटना स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। इस घटना ने एक बार फिर बिहार में सड़क सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक नियंत्रण और स्कूल बसों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृतक की पहचान 43 वर्षीय राजीव रंजन सिंह उर्फ गोल्डी सिंह के रूप में हुई है। वे भोजपुर जिले के अयर थाना क्षेत्र के बालिगांव गांव के निवासी थे और बिहार पुलिस की स्पेशल ब्रांच में एएसआई के पद पर कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार वे रोजाना की तरह सोमवार सुबह अपने गांव से पटना ड्यूटी के लिए निकले थे। उन्हें यह अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।

बताया जा रहा है कि जब वे आरा शहर स्थित तपेश्वर सिंह हिंदू महिला कॉलेज के पास पहुंचे, तभी एक तेज रफ्तार स्कूल बस ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस की रफ्तार काफी अधिक थी और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। टक्कर इतनी जोरदार थी कि राजीव रंजन सिंह सड़क पर कई फीट दूर जा गिरे और गंभीर चोट लगने के कारण उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।

हादसे के तुरंत बाद वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोग मौके की ओर दौड़ पड़े और घायल एएसआई को संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

इस दुर्घटना में शामिल बस माउंट लिट्रा स्कूल की बताई जा रही है। हादसे के बाद बस चालक वहां से भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन आसपास मौजूद लोगों के गुस्से और पुलिस की तत्परता के कारण बस को तुरंत जब्त कर लिया गया। पुलिस चालक की तलाश में जुट गई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा चालक की लापरवाही, तेज रफ्तार या वाहन में किसी तकनीकी खराबी के कारण हुआ।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि शहर में स्कूल बसों की रफ्तार पर कोई नियंत्रण नहीं है। कई बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, जिसके कारण ऐसे हादसे लगातार सामने आते रहते हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि कई स्कूल बस चालक यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हैं और बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ आम लोगों की जिंदगी भी खतरे में डालते हैं।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल वाहनों की नियमित जांच कराई जाए, फिटनेस टेस्ट अनिवार्य किया जाए और लापरवाह चालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।

वहीं इस दुखद घटना की खबर जैसे ही मृतक के गांव और परिवार तक पहुंची, वहां मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी शोक का माहौल बना हुआ है। राजीव रंजन सिंह को एक ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और मिलनसार पुलिस अधिकारी के रूप में जाना जाता था। उनके अचानक निधन से न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके और पुलिस विभाग में गहरी शोक की लहर दौड़ गई है।

पुलिस विभाग के कई अधिकारियों और कर्मियों ने उनके निधन पर दुख जताया है। बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से बिहार पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे थे और अपने व्यवहार के कारण विभाग में काफी लोकप्रिय थे। साथी पुलिसकर्मियों का कहना है कि राजीव रंजन सिंह हमेशा अपनी ड्यूटी को गंभीरता से निभाते थे और हर परिस्थिति में जिम्मेदारी के साथ काम करते थे।

इधर बिहार में लगातार हो रहे सड़क हादसों को लेकर सरकार भी चिंतित नजर आ रही है। हाल के दिनों में राज्य सरकार ने सामूहिक सड़क दुर्घटनाओं को फिर से विशेष स्थानीय आपदा की श्रेणी में शामिल करने का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सड़क हादसों में जान गंवाने वाले या गंभीर रूप से घायल लोगों के परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। इससे पहले भी वर्ष 2015 में ऐसी व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन बाद में इसमें बदलाव कर दिया गया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण हैं। इनमें तेज रफ्तार, ट्रैफिक नियमों का पालन न करना, सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी और वाहनों की उचित जांच का अभाव प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। खासकर स्कूल बसों के मामले में नियमों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि इन वाहनों में बच्चों की सुरक्षा भी जुड़ी होती है।

आरा में हुई यह घटना एक बार फिर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। लोगों का कहना है कि केवल जांच और बयानबाजी से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई और निगरानी की आवश्यकता है। शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था को मजबूत करना, स्कूल वाहनों की नियमित मॉनिटरिंग और सड़क सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराना अब बेहद जरूरी हो गया है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और जल्द ही चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। लेकिन इस हादसे ने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया और एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर सड़क पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और संबंधित एजेंसियां कब तक प्रभावी कदम उठाएंगी।

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