आरा जंक्शन पर कलेजा चीर देने वाला हादसा: सामान खरीदकर चलती ट्रेन पकड़ने के प्रयास में गिरे पिता-पुत्र, मासूम की मौके पर मौत, अस्पताल में पिता ने तोड़ा दम

आरा, 23 मई 2026। दानापुर-पीडीडीयू रेलखंड के अंतर्गत आने वाले आरा जंक्शन रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार की सुबह एक अत्यंत मर्मान्तिक, हृदयविदारक और विस्मयकारी रेल दुर्घटना दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश से बिहार की राजधानी पटना शिफ्ट होने की उम्मीदों के साथ रेल यात्रा पर निकले एक ही परिवार के दो मुख्य सदस्यों—पिता और उनके महज चार वर्षीय मासूम पुत्र की चलती एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होने के दौरान पैर फिसलने से दर्दनाक मौत हो गई।

​सामान खरीदने के प्रशासनिक अंतराल के बाद जैसे ही ट्रेन मुख्य प्लेटफार्म से खुली, दोनों कप्तानों ने बोगी के गेट को पकड़ने का प्रखर प्रयास किया, परंतु यांत्रिक गति के असंतुलन के कारण वे सीधे पहियों और प्लेटफार्म के मलबे के बीच संधारित गैप में जा गिरे। इस भयावह हादसे के लाइव मोड पर आते ही संपूर्ण आरा जंक्शन परिसर के भीतर भारी सनसनी, कोहराम और यात्रियों के बीच गहरा मानसिक अवसाद छा गया। सूचना मिलते ही शासकीय रेल पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के खोजी दस्ते तुरंत मुहाने पर मुस्तैद हुए और राहत संचिकाओं को सक्रिय किया।

मुरादाबाद से पटना शिफ्ट हो रहा था पूरा परिवार, आरा जंक्शन पर सामान खरीदने उतरे थे दोनों

​इस दुखद और आंखें नम कर देने वाली दुर्घटना की पारिवारिक पृष्ठभूमि और धरातलीय कड़ियों को आपस में जोड़ने पर यह प्रामाणिक सत्य पटल पर आता है कि मृतक उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के टांडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रामपुर गांव के मूल निवासी थे। मृतकों की पहचान 35 वर्षीय अजीम और उनके चार वर्षीय मासूम पुत्र डानयाल के रूप में मुकम्मत की गई है। अजीम अपनी जीविका के विन्यास को प्रखर करने के उद्देश्य से बिहार की राजधानी पटना के एक सुप्रसिद्ध होटल में विधिक रूप से कार्यरत संधारित थे।

​चूंकि उनका काम पटना में स्थाई रूप से व्यवस्थित हो चुका था, इसलिए उन्होंने अपनी पूरी पारिवारिक सांख्यिकी को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से हमेशा के लिए पटना स्थानांतरित (शिफ्ट) करने का एक बड़ा निर्णय लिया था। इसी कूटनीतिक योजना के तहत अजीम अपनी धर्मपत्नी नाजिया परवीन, बड़े पुत्र डानयाल और अपने एक छोटे दुधमुंहे बेटे छोटू के साथ मुरादाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन से गुरुवार को जनसाधारण एक्सप्रेस ट्रेन के जनरल विन्यास में सवार हुए थे। पूरा परिवार नए शहर में नई जिंदगी की शुरुआत करने की उमंग के साथ यात्रा पर लाइव था।

​शुक्रवार की अलसुबह जब ट्रेन दानापुर रेलखंड के आरा जंक्शन प्लेटफार्म पर आकर खड़ी हुई, तो अजीम ने सफर के दौरान बच्चों की आवश्यकताओं और खान-पान के प्रबंध हेतु कतिपय सामान और खाद्य सामग्रियां खरीदने का विनिर्देश तय किया। वे अपने चार वर्षीय बेटे डानयाल की उंगली थामकर बोगी से नीचे प्लेटफार्म के मुख्य स्टॉल प्रक्षेप की ओर प्रविष्ट हुए थे।

अचानक खुली ट्रेन और पैर फिसलने से हुआ वीभत्स हादसा, मासूम की ऑन-स्पॉट थमीं सांसें

​सफर के दौरान प्लेटफार्म पर सामान खरीदने की यह सामान्य प्रविष्टि कतिपय मिनटों के भीतर ही एक वीभत्स खूनी चक्रव्यूह में डाइवर्ट हो गई। अजीम अभी स्टॉल से सामान का लेनदेन मुकम्मल कर ही रहे थे कि बिना किसी पूर्व लाउडस्पीकर उद्घोषणा या आंशिक संकेत के जनसाधारण एक्सप्रेस ट्रेन के यांत्रिक पहिये अचानक प्लेटफार्म से आगे की दिशा में प्रखरता से बढ़ने लगे। ट्रेन को खुलता देख अजीम के भीतर अपनी पत्नी और छोटे बच्चे से बिछड़ने का एक तीव्र मनोवैज्ञानिक भय संधारित हो गया। उन्होंने बिना समय गंवाए मासूम बेटे डानयाल को अपनी गोद में उठाया और दौड़ते हुए चलती हुई बोगी के पायदान (फुटबोर्ड) को पकड़ने का अत्यंत जोखिम भरा प्रयास लाइव किया।

​परंतु, बोगी के प्रवेश द्वार पर अन्य मुसाफिरों की भारी भीड़ और ट्रेन की गति के अचानक तीव्र होने के कारण अजीम का पैर पायदान से पूरी कड़ाई से फिसल गया। संतुलन बिगड़ते ही अजीम अपनी गोद में लिए मासूम बच्चे के साथ सीधे प्लेटफार्म और पटरी के बीच अवस्थित गहरे कंक्रीट मलबे के गैप में जा गिरे। इस गिरने के दौरान चार वर्षीय डानयाल सीधे ट्रेन के प्रखर लोहे के पहियों की चपेट में आ गया, जिससे उसका शरीर क्षत-विच्छत हो गया और ऑन-स्पॉट उसकी सांसें सदा के लिए म्यूट हो गईं। वहीं पिता अजीम भी पटरी के किनारे कंक्रीट के गर्डर्स से टकराकर गंभीर रूप से सिर और आंतरिक अंगों में चोट लगने के कारण अत्यंत लहूलुहान और अचेत अवस्था में चले गए।

जीआरपी दस्तों ने आरा सदर अस्पताल में कराया भर्ती, इलाज के दौरान पिता ने भी तोड़ा दम

​प्लेटफार्म संख्या पर घटित हुए इस रूह कंपा देने वाले दृश्य को देखते ही वहां मौजूद अन्य यात्रियों, वेंडरों और रेल कर्मियों के बीच भारी चीख-पुकार और कोहराम मच गया। लोगों की चिल्लाहट सुनकर प्लेटफार्म ड्यूटी पर तैनात शासकीय रेल पुलिस (GRP) और आरपीएफ के जवान तुरंत आक्रामक गति से घटना स्थल की ओर दौड़े। पुलिस ने सबसे पहले क्षत-विच्छत हो चुके मासूम डानयाल के निर्जीव शरीर को अपने विधिक कब्जे में लिया। इसके तुरंत बाद, अत्यधिक रक्तस्राव के कारण जीवन और मृत्यु के बीच तड़प रहे अजीम को रेलवे के आपातकालीन स्ट्रेचर के माध्यम से तुरंत स्टेशन परिसर से बाहर निकाला गया।

​प्रशासनिक तत्परता दिखाते हुए पुलिस के जवानों ने घायल पिता को एम्बुलेंस प्रणालियों के समन्वय से इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल के मुख्य इमरजेंसी केयर वार्ड में लाइव प्रविष्ट कराया। वहां डॉक्टरों के एक विशेष मेडिकल बोर्ड ने अजीम की गंभीर अवस्थिति को देखते हुए वेंटिलेटर और लाइफ-सपोर्ट सिस्टम सक्रिय किए और उनके शरीर के भीतर बह रहे खून को ब्लॉक करने के प्रखर प्रयास मुकम्मल किए।

​परंतु, सिर की मुख्य धमनियों के बुरी तरह फट जाने और अंदरूनी अंगों के मलबे में तब्दील हो जाने के कारण चिकित्सा कप्तानों के तमाम वैज्ञानिक प्रयास पूरी तरह निष्प्रभावी संधारित हुए। उपचार के संक्षिप्त अंतराल के उपरांत ही अजीम के शरीर की धड़कनें पूरी कड़ाई से रुक गईं और डॉक्टरों ने उन्हें भी विधिक रूप से मृत घोषित कर दिया। इस दोहरी मौत के विलेख पटल पर आते ही अस्पताल मुहाने पर उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों की आंखें भी नम हो गईं।

अनभिज्ञ पत्नी छोटे बच्चे संग पहुंची पटना, रिश्तेदारों के माध्यम से मिली विनाशकारी सूचना

​इस पूरी दर्दनाक दास्तान का सबसे संवेगात्मक और विस्मयकारी पहलू यह रहा कि घटना के समय ट्रेन के भीतर बैठी अजीम की पत्नी नाजिया परवीन इस भयंकर तबाही से पूरी तरह अनभिज्ञ संधारित थीं। बोगी के भीतर यात्रियों की अत्यधिक भीड़ और शोर-शराबे के कारण उन्हें यह आंशिक भनक भी हस्तगत नहीं हो सकी कि उनके पति और बड़े बेटे के साथ प्लेटफार्म पर क्या खौफनाक खेल घटित हो चुका है। वे अपने छोटे दुधमुंहे बेटे छोटू को गोद में लिए इसी आस में बैठी रहीं कि शायद उनके पति किसी दूसरी बोगी में सवार हो गए होंगे।

​ट्रेन जब आरा से खुलकर अपने अंतिम गंतव्य यानी राजधानी पटना के मुख्य स्टेशन पर प्रविष्ट हुई, तब नाजिया परवीन बोगी से नीचे उतरीं और अपने पति की तलाश शुरू की। जब काफी देर तक अजीम का कोई सुराग नहीं मिला, तब उन्होंने घबराकर पटना में रहने वाले अपने सहोदर रिश्तेदार मरगूब को दूरभाष के माध्यम से इस विसंगति की सूचना दी।

​इधर, आरा जीआरपी के जासूसों ने मृतकों के पास से बरामद कतिपय दस्तावेजों और मोबाइल के डिजिटल डंप से परिजनों के संपर्क सूत्रों को खंगाल लिया था और पटना रेल पुलिस के केंद्रीय कंट्रोल रूम से संपर्क स्थापित किया था। जब रिश्तेदार मरगूब और अन्य परिजन आरा रेलवे स्टेशन से साझा किए गए विलेखों के माध्यम से घटना स्थल की सांख्यिकी से एकीकृत हुए, तब जाकर नाजिया परवीन को इस खौफनाक हादसे की प्रामाणिक जानकारी हस्तगत कराई गई। अपनी दुनिया उजड़ने और एक साथ पति व मासूम बेटे की खूनी मौत की सूचना मिलते ही नाजिया परवीन पटना स्टेशन के प्लेटफार्म पर ही चीख मारकर अचेत हो गईं, जिन्हें महिला रेल पुलिसकर्मियों ने संभाला।

शवों का पंचनामा तैयार, जीआरपी ने दर्ज की यूडी केस की विधिक संचिका

​शुक्रवार की दोपहर बाद मृतकों के रिश्तेदार मरगूब और अन्य परिजनों का भारी हुजूम रोते-बिलखते हुए आरा सदर अस्पताल के विंग में जा धमका। अपनों के शवों को देखकर परिजनों का करुण विलाप इस कदर प्रखर था कि वहां उपस्थित प्रत्येक मुसाफिर का कलेजा पूरी तरह से फट गया। आरा रेलवे पुलिस के थानाध्यक्ष ने मामले की अग्रिम विधिक कड़ियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दोनों मृतकों के शवों का विधिक पंचनामा (इनक्वेस्ट रिपोर्ट) पूरी शुचिता के साथ तैयार कर लिया गया है।

​पुलिस के खोजी दस्तों ने घटना स्थल यानी आरा जंक्शन के प्लेटफार्म के उस विशिष्ट प्रक्षेप का भी भौतिक और फॉरेंसिक निरीक्षण संधारित किया है जहां पैर फिसलने की विसंगति लाइव हुई थी। रेल पुलिस ने कानून की निर्धारित धाराओं के तहत अपमृत्यु (UD Case) का मामला दर्ज कर अग्रिम विधिक संचिकाओं को लाइन-अप कर दिया है। दोनों शवों का डॉक्टरों के पैनल द्वारा आधिकारिक पोस्टमार्टम मुकम्मल कराए जाने के उपरांत, उन्हें कड़े सुरक्षा घेरे में रोते-बिलखते परिजनों के सुपुर्द (हस्तगत) कर दिया गया है।

​परिजन शवों को एम्बुलेंस के माध्यम से उनके पैतृक निवास उत्तर प्रदेश के रामपुर ले जाने की तैयारियों में मुस्तैद हैं। रेल कप्तानों ने इस हादसे के बाद एक बार फिर आम यात्रियों से प्रखर अपील की है कि चलती हुई ट्रेनों में सवार होने या उतरने का दुस्साहस कतई न करें, क्योंकि यांत्रिक गतियों के बीच बरती गई आंशिक लापरवाही भी हंसते-खेलते परिवारों के विन्यासों को हमेशा के लिए मलबे में तब्दील कर सकती है।

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