- लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव से जुड़े विवाद में नया मोड़; अनुष्का के भाई आकाश यादव ने तोड़ी चुप्पी
- ‘उज्जयिनी के पिता कौन?’ सवाल पर बोले आकाश- ‘अभी नहीं बताऊंगा, उनकी जान को खतरा है… वो बहुत सारे कानूनी दांवपेच में फंसे हैं’
- ‘तेजप्रताप ने भले ही रिश्ता नकारा हो, लेकिन हम उन्हें माफ करते हैं, मेरा और उनका परिवार सब जानता है’
द वॉयस ऑफ बिहार (पटना)
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव और उनकी परिचित अनुष्का से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। गुरुवार को इस विवाद में अनुष्का के बड़े भाई आकाश यादव ने मीडिया के सामने आकर कई बड़े बयान दिए, जिससे अनुष्का की बेटी उज्जयिनी के ‘पिता’ को लेकर चल रही चर्चाएं फिर से तेज हो गई हैं।
“तेजप्रताप हमारे परिवार के सदस्य”
आकाश यादव ने तेजप्रताप यादव को बार-बार अपने ‘परिवार का सदस्य’ बताया।
- सम्मान: उन्होंने कहा, “वे हमारे लिए माननीय थे, हैं और रहेंगे। मेरी बहन का हक बिल्कुल नहीं छिनेगा।”
- माफी: तेजप्रताप द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अनुष्का से संबंध नकारने के सवाल पर आकाश ने कहा, “हम उनकी ऐसी तमाम बातों के लिए उन्हें परिवार के सदस्य के रूप में माफ करते हैं। मेरा व उनका परिवार जानता है कि हमलोगों के क्या संबंध हैं।”
- सबूत: आकाश ने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए दोनों के फोटो और वीडियो का हवाला भी दिया।
बच्ची के पिता कौन? सवाल पर सस्पेंस बरकरार
जब आकाश से सीधा सवाल पूछा गया कि आखिर ‘उज्जयिनी के पिता कौन हैं?’, तो उन्होंने इसका सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया।
- वजह: आकाश ने कहा, “अभी नहीं बताऊंगा। इसलिए कि उनकी जान पर खतरा है। वे बहुत सारे कानूनी दांवपेच में फंसे हैं।”
- अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट: जब उनसे पूछा गया कि क्या अनुष्का की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में उज्जयिनी के पिता के रूप में तेजप्रताप का नाम है और क्या यह रिपोर्ट फर्जी है? तो आकाश ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया, बल्कि सवालिया लहजे में कहा- “क्या यह रिपोर्ट फर्जी है?”
“जरूरत पड़ी तो कानूनी रास्ते खुले हैं”
आकाश ने फिलहाल किसी से हक मांगने की बात को खारिज किया, लेकिन भविष्य के लिए चेतावनी भी दी।
- उन्होंने कहा, “कौन हक छीना है? कहां हक छीना गया? हम किसी से हक मांग रहे क्या? इसकी जरूरत नहीं है।”
- लेकिन साथ ही उन्होंने जोड़ा, “जब लगेगा कि उज्जयिनी को पिता की गोद चाहिए और अनुष्का को न्याय नहीं मिला, तो बहुत सारे दूसरे कानूनी रास्ते हैं।”


