
HIGHLIGHTS:
- बड़ी त्रासदी: मिडिल ईस्ट की जंग की आंच बिहार तक; अमेरिकी तेल टैंकर ‘सेफसी विष्णु’ पर मिसाइल हमला।
- शहादत: कहलगांव के रानिबिमिया निवासी एडिशनल चीफ इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह की मौत।
- आखिरी बातचीत: “मैं समुद्र में हूँ, ड्यूटी पर हूँ…”— मौत से चंद घंटों पहले हुई थी घर पर बात।
- ग्लोबल टेंशन: ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या के बाद भड़का है प्रतिशोध का ज्वालामुखी; दुनिया भर में तेल संकट।
जब समंदर बना ‘कब्रगाह’: भागलपुर के बेटे ने देश के बाहर दी शहादत
भागलपुर: दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच छिड़ी ‘ईगो’ की जंग ने आज बिहार के एक और घर का चिराग बुझा दिया। भागलपुर के कहलगांव प्रखंड के रानिबिमिया गांव में आज चूल्हा नहीं जला है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनी ‘ब्रावो शिपिंग’ के एडिशनल चीफ इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। इराक के बसरा से सिंगापुर की ओर जा रहे अमेरिकी ऑयल टैंकर ‘सेफसी विष्णु’ पर हुए मिसाइल (या विस्फोटक नाव) हमले ने एक होनहार इंजीनियर की जिंदगी लील ली।
“ड्यूटी पर हूँ…”— वो आख़िरी कॉल जो आख़िरी ही रह गई
देवनंदन एक अनुशासित प्रोफेशनल थे, और उनके आखिरी शब्द भी उनकी ड्यूटी को ही समर्पित थे। परिजनों ने रोते हुए बताया कि हमले से कुछ ही समय पहले उनकी फोन पर बात हुई थी।
”मैं अभी समुद्र के बीच में हूँ और ड्यूटी पर तैनात हूँ, इसलिए ज्यादा देर बात नहीं कर पाऊँगा।”
यही वो आखिरी वाक्य था जो उनके परिवार ने सुना। इसके बाद कंपनी की ओर से जो संदेश आया, उसने पूरे भागलपुर को सन्न कर दिया।
[बिखर गया परिवार: सपनों पर फिरा पानी]
देवनंदन के पीछे उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं।
- बेटा: जापान की एक निजी कंपनी में कार्यरत है (खबर सुनकर भारत के लिए रवाना)।
- बेटी: मेडिकल की तैयारी कर रही है, पिता का सपना उसे डॉक्टर बनते देखने का था। अब परिवार की बस एक ही मांग है— “हमारे बेटे का पार्थिव शरीर सम्मान के साथ वतन वापस लाया जाए।”
जंग के पीछे की ‘इनसाइड स्टोरी’: ट्रंप, खामेनेई और तेल का खेल
यह हमला कोई सामान्य घटना नहीं है। जानकारों की मानें तो:
- प्रतिशोध की आग: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान ‘आर-पार’ के मूड में है।
- ट्रंप का ‘वार कार्ड’: चर्चा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने घरेलू फाइलों (एपस्टीन केस) से ध्यान भटकाने के लिए युद्ध छेड़ा, लेकिन अब ईरान के पलटवार ने उनके लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी है।
- ग्लोबल इम्पैक्ट: इस जंग की वजह से भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
VOB का नजरिया: निर्दोष भारतीयों की जान का हिसाब कौन देगा?
रानिबिमिया का एक बेटा सात समंदर पार इसलिए गया था ताकि बिहार का नाम रौशन कर सके और अपनी बेटी को डॉक्टर बना सके। लेकिन वैश्विक राजनीति की बिसात पर एक बार फिर आम आदमी का खून बहा है। भारत सरकार को न केवल देवनंदन के पार्थिव शरीर की वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा पूरी मजबूती से उठाना होगा। ‘सेफसी विष्णु’ तो सुरक्षित नहीं रहा, लेकिन कम से कम हमारे लोगों का भविष्य तो सुरक्षित रहे!


