पुलिस महकमे में वार्षिक ‘शुद्धिकरण’ अभियान; आईजी विवेक कुमार ने रक्षित कार्यालय की फाइलों को खंगाला, काम में लापरवाही देख प्रभारियों की लगाई क्लास

समाचार के मुख्य बिंदु: फाइलों के प्रबंधन और पारदर्शिता पर आईजी की पैनी नजर

  • सालाना मुआयना: पुलिस महानिरीक्षक विवेक कुमार ने शनिवार को पुलिस केंद्र का विस्तृत वार्षिक निरीक्षण किया ताकि प्रशासनिक कामकाज की गुणवत्ता को परखा जा सके.
  • शाखाओं का पोस्टमार्टम: निरीक्षण के दौरान रक्षित कार्यालय के तहत आने वाली दिवा, अवकाश, उपस्कर, परिवहन और शस्त्रागार जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं के रजिस्टरों और कामकाज की बारीकी से जांच की गई.
  • अभिलेखों का ऑडिट: आईजी ने फाइलों के प्रबंधन, रजिस्टरों के अपडेशन और सरकारी उपकरणों की वर्तमान स्थिति का गहन अवलोकन किया.
  • सराहना और सुधार: अधिकांश विभागों में पारदर्शिता और सुव्यवस्थित प्रबंधन देखकर आईजी ने संतोष जताया, लेकिन कुछ शाखाओं में पुराने मामलों की पेंडेंसी देख नाराजगी भी जाहिर की.
  • कड़ी फटकार: पुराने मामलों को लटकाए रखने और अभिलेखों को अपडेट न करने वाले शाखा प्रभारियों को आईजी ने कड़ी चेतावनी देते हुए काम में तेजी लाने का निर्देश दिया.
  • VOB इनसाइट: पुलिस केंद्र केवल बल की तैनाती का केंद्र नहीं है, बल्कि यह पूरी फोर्स की ‘लॉजिस्टिक रीढ़’ है। हथियारों का रखरखाव (शस्त्रागार) और जवानों की छुट्टियां (अवकाश शाखा) सीधे तौर पर पुलिस बल के मनोबल और कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं। आईजी विवेक कुमार की यह सख्ती केवल एक वार्षिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह पुलिसिंग के ‘बैक-एंड’ को डिजिटल और आधुनिक मानकों के अनुरूप चुस्त-दुरुस्त बनाने की एक बड़ी कवायद है। फाइलों में दबी शिथिलता को दूर करना ही सुशासन का असली मंत्र है।

भागलपुर | 29 मार्च, 2026

​पुलिस महकमे के भीतर प्रशासनिक अनुशासन को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से शनिवार को एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली। पुलिस महानिरीक्षक विवेक कुमार ने पुलिस केंद्र का वार्षिक निरीक्षण करते हुए रक्षित कार्यालय के कामकाज की परतों को उधेड़ कर रख दिया। यह निरीक्षण केवल फाइलों को पलटने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह पुलिस बल की कार्यप्रणाली में छिपी उन कमियों को खोजने की कोशिश थी जो अक्सर कागजों के ढेर में दब जाती हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, आईजी के इस औचक लेकिन विस्तृत मुआयने ने उन अधिकारियों की नींद उड़ा दी है जो ‘कल करेंगे’ की मानसिकता के साथ सरकारी अभिलेखों के साथ खेल रहे थे।

रक्षित कार्यालय का रणक्षेत्र: शाखा-दर-शाखा जांच की कहानी

​निरीक्षण की शुरुआत शनिवार सुबह उस समय हुई जब विवेक कुमार रक्षित कार्यालय के मुख्य परिसर में पहुँचे। उन्होंने अपनी जांच का आगाज दिवा शाखा और अवकाश शाखा से किया। अवकाश शाखा पुलिसकर्मियों के लिए सबसे संवेदनशील विभाग माना जाता है, क्योंकि यहाँ से जवानों की छुट्टियों का प्रबंधन होता है। आईजी ने यह सुनिश्चित किया कि छुट्टियों का रजिस्टर पारदर्शी हो और किसी भी जवान का हक प्रशासनिक देरी के कारण न मारा जाए।

​इसके बाद जांच का कारवां उपस्कर शाखा (Equipment Branch) और परिवहन शाखा (Transport Branch) की ओर बढ़ा। परिवहन शाखा में वाहनों के लॉग-बुक, तेल की खपत और गाड़ियों की कंडीशन की बारीकी से जांच की गई। पुलिस महानिरीक्षक ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन स्थितियों में वाहनों की उपलब्धता और उनकी तकनीकी स्थिति में कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शस्त्रागार की शुचिता: हथियारों और उपकरणों का हिसाब

​सबसे महत्वपूर्ण निरीक्षण शस्त्रागार (Armoury) शाखा का रहा। यहाँ आईजी ने हथियारों की साफ-सफाई, उनके रजिस्टरों में दर्ज विवरण और गोला-बारूद के स्टॉक का मिलान किया। शस्त्रागार किसी भी पुलिस बल की शक्ति का केंद्र होता है, और यहाँ अभिलेखों का अद्यतन (Update) होना सुरक्षा के दृष्टिकोण से अनिवार्य है। विवेक कुमार ने उपकरणों की वर्तमान स्थिति को स्वयं देखा और अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो उपकरण पुराने हो चुके हैं या मरम्मत के लायक हैं, उनके लिए तत्काल प्रक्रिया शुरू की जाए।

प्रशंसा और फटकार: एक संतुलित प्रशासनिक दृष्टिकोण

​निरीक्षण के दौरान आईजी ने ‘गाजर और छड़ी’ (Carrot and Stick) की नीति अपनाई। समीक्षा के प्रारंभिक दौर में वे यह देखकर काफी प्रभावित हुए कि अधिकांश शाखाओं में फाइलों का बेहतर प्रबंधन किया गया है और कार्यों में पारदर्शिता बरती जा रही है। कई विभागों का कार्य मानक के अनुरूप पाया गया, जिस पर उन्होंने अधिकारियों की पीठ थपथपाई।

लापरवाही पर हंटर:

लेकिन यह प्रसन्नता उस समय नाराजगी में बदल गई जब आईजी ने कुछ महत्वपूर्ण फाइलों में ‘शिथिलता’ के प्रमाण पाए। उन्होंने देखा कि कुछ शाखाओं में पुराने मामले अनावश्यक रूप से लंबित पड़े हैं और अभिलेखों को अद्यतन करने की प्रक्रिया बहुत धीमी है। आईजी ने इसे ‘प्रशासनिक अक्षमता’ करार देते हुए संबंधित शाखा प्रभारियों को जबरदस्त फटकार लगाई। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अभिलेखों का संधारण केवल एक कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह विभाग की जवाबदेही का प्रतीक है।

निरीक्षण का सांख्यिकीय और विश्लेषणात्मक विवरण

शाखा का नाम

मुख्य अवलोकन (आईजी विवेक कुमार के अनुसार)

स्थिति

दिवा एवं अवकाश शाखा

छुट्टियों के प्रबंधन और दैनिक डायरी का मिलान

संतोषजनक

परिवहन शाखा

वाहनों की स्थिति और लॉग-बुक का ऑडिट

व्यवस्थित

शस्त्रागार शाखा

हथियारों का स्टॉक और रखरखाव की जांच

मानक के अनुरूप

अभिलेख संधारण

पुराने मामलों की पेंडेंसी और रजिस्टर अपडेशन

असंतोषजनक (फटकार लगी)

VOB का नजरिया: आधुनिक पुलिसिंग में ‘रिकॉर्ड मैनेजमेंट’ की चुनौती

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि आईजी विवेक कुमार का यह कदम पुलिस विभाग में बढ़ते ‘प्रोफेशनलिज्म’ का संकेत है।

  1. डिजिटलीकरण की जरूरत: पुरानी फाइलों और धूल फांकते रजिस्टरों के बजाय अब पुलिस केंद्र को ‘ई-ऑफिस’ की ओर बढ़ना चाहिए। यदि रिकॉर्ड डिजिटल होंगे, तो आईजी स्तर के अधिकारियों को पेंडेंसी देखने के लिए साल भर का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
  2. जवाबदेही तय करना: शाखा प्रभारियों को फटकार लगाना अच्छा है, लेकिन एक ऐसी प्रणाली विकसित करनी होगी जहाँ फाइलों के रुकने पर ‘ऑटो-अलर्ट’ जारी हो।
  3. पारदर्शिता से मनोबल: जब पुलिस केंद्र की आंतरिक व्यवस्था पारदर्शी होती है, तो फील्ड में तैनात जवानों को पता होता है कि उनका हक (जैसे अवकाश या भत्ता) उन्हें समय पर मिलेगा, जिससे उनका कार्य-प्रदर्शन बढ़ता है।

निष्कर्ष: सुशासन के लिए फाइलों का ‘फास्ट ट्रैक’

​विवेक कुमार का यह वार्षिक निरीक्षण विभाग के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। फटकार के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ हफ्तों में लंबित मामलों का निपटारा युद्धस्तर पर किया जाएगा। पुलिस केंद्र की शाखाओं को अब यह समझना होगा कि पारदर्शिता और समयबद्धता ही उनकी कार्यशैली का मूल मंत्र होनी चाहिए।

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