
नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने नीट (NEET-UG) सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्रों का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और किसी भी आंदोलन का समाधान हिंसा नहीं हो सकता।
“शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए”
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में अन्ना हजारे ने कहा कि यदि किसी मामले में व्यापक जन असंतोष है, तो संबंधित मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा, “शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। जनता ही मालिक है और मंत्री व अधिकारी जनता के सेवक हैं।”
उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में लोग किसी मांग को उठा रहे हैं, तो सरकार को उस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
लाठीचार्ज की आलोचना
अन्ना हजारे ने छात्रों पर कथित लाठीचार्ज की आलोचना करते हुए कहा कि हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता। उन्होंने कहा कि अपने आंदोलनों के दौरान उन्होंने हमेशा अहिंसा का मार्ग अपनाया और कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया।
उन्होंने कहा, “लाठीचार्ज करना गलत है। मैंने कई आंदोलन किए, लेकिन ऐसी स्थिति कभी नहीं आई। पहले संवाद होना चाहिए।”
प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
अन्ना हजारे ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रदर्शनकारी छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई है। उन्होंने पेपर लीक, भर्ती में देरी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को गंभीर सामाजिक विषय बताते हुए इन पर संवेदनशीलता से कार्रवाई करने की अपील की।
जवाबदेही तय करने की मांग
अन्ना हजारे ने कहा कि यदि नीट पेपर लीक मामले में संबंधित मंत्री का इस्तीफा स्वीकार किया जाता है, तो इससे शासन व्यवस्था में जवाबदेही का संदेश जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी विवाद का समाधान दमनात्मक कार्रवाई के बजाय संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।
नोट: यह समाचार अन्ना हजारे के समाचार एजेंसी ANI को दिए गए बयान और प्रधानमंत्री को लिखे उनके पत्र में व्यक्त विचारों पर आधारित है।


