भक्ति के रंग में रंगा अंग जनपद: तरडीहा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, भव्य कलश शोभायात्रा के साथ नौ दिवसीय ‘श्री राम कथा’ का शंखनाद; अयोध्या के सुरों से गुंजायमान हुआ गोनू धाम

  • ​भागलपुर के जगदीशपुर प्रखंड अंतर्गत तरडीहा गांव में अध्यात्म की नई गंगा प्रवाहित होनी शुरू हो गई है, जहाँ नौ दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव का भव्य और गरिमामय शुभारंभ हुआ।
  • ​गोनू बाबा धाम मंदिर परिसर से निकली ऐतिहासिक कलश शोभायात्रा में हजारों की संख्या में पीतवस्त्र धारी महिलाओं और युवतियों ने सहभागिता कर पूरे क्षेत्र को केसरिया रंग में सराबोर कर दिया।
  • ​अयोध्या धाम की पावन मिट्टी से आए स्वरूप सरकार के सानिध्य में आयोजित इस महोत्सव की शुरुआत ‘सुंदरकांड’ के पाठ से हुई, जिसने उपस्थित जनसमूह को रामभक्ति के सागर में गोते लगाने पर मजबूर कर दिया।
  • ​विख्यात कथावाचक पंडित राजीव लोचन सरन जी महाराज के मुखारविंद से अगले नौ दिनों तक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्शों और जीवन प्रसंगों की अमृत वर्षा होगी।
  • ​गांव की हर गली और चौराहे पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया, जो इस बात का प्रमाण है कि विकास की दौड़ के बीच आज भी हमारी जड़ें अपनी संस्कृति और आस्था से मजबूती से जुड़ी हैं।

भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार/अपना भागलपुर)।

अध्यात्म की गूँज और तरडीहा का गौरव: जब भक्ति के आगे छोटा पड़ा भूगोल

भागलपुर का अंग जनपद अपनी ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक सहिष्णुता के लिए विश्व विख्यात है। इसी कड़ी में जगदीशपुर प्रखंड का तरडीहा गांव गुरुवार को एक नए इतिहास का साक्षी बना। मौका था नौ दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव के शुभारंभ का। गोनू धाम स्थित तरडीहा गांव की सड़कों पर जब हजारों कलश धारी श्रद्धालुओं का कारवां निकला, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात सरयू की लहरें गंगा के तट पर उतर आई हों। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भागलपुर की उस सामूहिक चेतना का प्रदर्शन है, जो धर्म को समाज जोड़ने का माध्यम मानती है। भक्ति और श्रद्धा का ऐसा मेल विरले ही देखने को मिलता है जहाँ उम्र और जाति की दीवारें ढह जाती हैं और केवल ‘जय श्री राम’ का उद्घोष शेष रह जाता है।

कलश शोभायात्रा: पीतवस्त्रों का समंदर और आस्था की लहरें

कार्यक्रम का विधिवत आगाह श्री श्री 1008 गोनू बाबा धाम मंदिर परिसर से हुआ। सुबह के सूर्य की पहली किरण के साथ ही मंदिर परिसर में हजारों महिलाओं और युवतियों का जुटना शुरू हो गया था। सिर पर पवित्र कलश, माथे पर चंदन का तिलक और होठों पर राम नाम का जाप—यह दृश्य किसी दिव्य लोक की कल्पना जैसा था। शोभायात्रा जैसे ही मंदिर परिसर से निकली, पूरा गांव सड़कों पर उतर आया। ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के बीच जब हजारों कलश एक साथ चले, तो तरडीहा की गलियां पीत सागर में तब्दील हो गईं। ग्रामीणों ने अपनी छतों और दरवाजों से फूल बरसाकर शोभायात्रा का स्वागत किया। यह दृश्य भावुक करने वाला था कि कैसे एक छोटा सा गांव इतने बड़े आध्यात्मिक आयोजन के लिए एक सूत्र में बंध गया है।

राम दरबार की झांकी: आकर्षण का केंद्र और श्रद्धा का आधार

शोभायात्रा में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र ‘राम दरबार’ की भव्य झांकी रही। सजे-धजे रथ पर सवार भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और वीर हनुमान के स्वरूपों को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। जगह-जगह लोग रथ के पास पहुँचकर आशीर्वाद ले रहे थे और आरती उतार रहे थे। यह झांकी केवल कला का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और महाकाव्य रामायण के पात्रों से रूबरू कराने का एक जीवंत माध्यम थी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस दिव्य झांकी की एक झलक पाने को लालायित दिखा। झांकी के साथ चल रहे कीर्तन मंडलियों के गीतों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

अयोध्या का संदेश और सुंदरकांड का पाठ: महोत्सव की दार्शनिक शुरुआत

आयोजन समिति ने इस बार महोत्सव को विशेष बनाने के लिए अयोध्या धाम से आए स्वरूप सरकार का सानिध्य प्राप्त किया है। कार्यक्रम की शुरुआत सुंदरकांड के सस्वर पाठ से की गई। सुंदरकांड, जो हनुमान जी के पराक्रम और भक्ति का पर्याय है, उसके पाठ ने कथा स्थल पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर दिया। पंडितों के अनुसार, राम कथा शुरू करने से पहले हनुमान जी की वंदना और सुंदरकांड का पाठ अनिवार्य है, क्योंकि हनुमान जी ही राम कथा के सच्चे संरक्षक माने जाते हैं। अयोध्या से आए विद्वानों की उपस्थिति ने इस स्थानीय आयोजन को एक राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान कर दिया है, जिससे तरडीहा का गौरव और बढ़ गया है।

पंडित राजीव लोचन सरन: रामकथा के रस से सराबोर होंगे श्रद्धालु

महोत्सव के मुख्य कथावाचक पंडित राजीव लोचन सरन जी महाराज ने प्रथम दिन की कथा में राम कथा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के भागदौड़ भरे और तनावपूर्ण जीवन में भगवान राम के आदर्श ही शांति का एकमात्र मार्ग हैं। राम कथा केवल एक कहानी नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह हमें सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी मर्यादा को कैसे बनाए रखा जाए। पंडित जी के मधुर भजनों और तर्कसंगत व्याख्याओं ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आने वाले आठ दिनों में वे बाल कांड से लेकर राम राज्य के अभिषेक तक के विभिन्न प्रसंगों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो समाज के लिए एक मार्गदर्शिका का कार्य करेगा।

यजमान और ग्रामवासियों का समर्पण: एक सामूहिक यज्ञ की तरह आयोजन

किसी भी बड़े आयोजन की सफलता उसके पीछे काम करने वाली टीम पर निर्भर करती है। तरडीहा के इस महोत्सव में अजय शुक्ला और शशिकांत शुक्ला यजमान के रूप में अपनी भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। उनके साथ मारुति नंदन चौधरी, राजेंद्र पांडेय, बिनोद शुक्ला, मोनू चौबे, पंकज शुक्ला, चंदन शुक्ला और मृत्युंजय शुक्ला जैसे प्रमुख ग्रामीण दिन-रात व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटे हैं। हजारों लोगों के बैठने की व्यवस्था, पेयजल, और महाप्रसाद का वितरण किसी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन गांव के युवाओं ने जिस तरह से जिम्मेदारी संभाली है, वह काबिले तारीफ है। यह आयोजन तरडीहा की एकता और सेवा भावना का अनुपम उदाहरण पेश कर रहा है।

समाज पर प्रभाव: भक्ति के माध्यम से संस्कार की ओर

इस तरह के आयोजनों का प्रभाव केवल धार्मिक नहीं होता, बल्कि इसके गहरे सामाजिक निहितार्थ भी होते हैं। राम कथा के माध्यम से युवाओं को परिवार के प्रति जिम्मेदारी, माता-पिता का सम्मान और सामाजिक समरसता की सीख मिलती है। जगदीशपुर प्रखंड के अन्य गांवों से भी लोग इस महोत्सव में शामिल होने पहुँच रहे हैं, जिससे आपसी भाईचारा बढ़ रहा है। भागलपुर जैसे व्यापारिक केंद्र के पास स्थित होने के कारण, यहाँ की राम कथा में आधुनिकता और परंपरा का एक अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।

निष्कर्ष: राम नाम की महिमा और तरडीहा का संकल्प

तरडीहा में नौ दिनों तक चलने वाला यह श्री राम कथा महोत्सव निश्चित रूप से क्षेत्र के आध्यात्मिक वातावरण को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा। कलश शोभायात्रा की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि लोग अपनी संस्कृति को सहेजने के लिए कितने आतुर हैं। जब तक पंडित राजीव लोचन सरन जी महाराज की वाणी से राम कथा की अमृत धारा बहेगी, तब तक तरडीहा गांव ‘मिनी अयोध्या’ के रूप में अपनी पहचान बनाए रखेगा। द वॉयस ऑफ बिहार और अपना भागलपुर की टीम इस पूरे महोत्सव की कवरेज करती रहेगी और आप तक प्रभु राम के संदेश पहुँचाती रहेगी। इस भव्य शुरुआत के लिए तरडीहा की पूरी जनता बधाई की पात्र है।

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